पंजाब की राजनीति में एक गंभीर आरोप को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर से जुड़े उन आरोपों का संज्ञान लिया है, जिनमें कथित तौर पर एक दुष्कर्म मामले को दबाने के लिए ₹5 करोड़ की मांग किए जाने की बात कही गई है। आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को आरोपों की जांच कराने और दो सप्ताह के भीतर Action Taken Report (ATR) सौंपने का निर्देश दिया है।
हालांकि, इस स्तर पर ये केवल आरोप हैं और किसी जांच एजेंसी या अदालत ने इन्हें साबित नहीं किया है। NHRC की कार्रवाई का मतलब आरोपों की पुष्टि नहीं, बल्कि शिकायत में उठाए गए मुद्दों की जांच कर रिपोर्ट मांगना है।
पूर्व जज के कथित दावे के बाद NHRC तक पहुंचा मामला
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शिकायत में पंजाब के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस (रिटायर्ड) रणजीत सिंह की ओर से सार्वजनिक रूप से लगाए गए कथित आरोपों का उल्लेख किया गया है। दावा है कि एक दुष्कर्म मामले को कथित तौर पर दबाने के लिए ₹5 करोड़ की मांग की गई थी और शिकायत में मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी गुरप्रीत कौर की कथित भूमिका का जिक्र किया गया है।
मामला Legal Rights Observatory (LRO) की ओर से NHRC के समक्ष रखे जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत में आरोपों की स्वतंत्र जांच, संभावित सबूतों को सुरक्षित रखने और दुष्कर्म मामले की जांच को प्रभावित या कमजोर करने की किसी संभावित कोशिश की पड़ताल करने की मांग की गई है।
प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने लिया संज्ञान
NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले पर संज्ञान लेते हुए पंजाब के मुख्य सचिव और DGP को आरोपों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने दोनों अधिकारियों से कहा है कि वे मामले की जांच के बाद दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। रिपोर्ट मिलने के बाद NHRC यह तय करेगा कि आगे किस तरह की कार्रवाई की आवश्यकता है।
गृह मंत्रालय के महिला सुरक्षा प्रभाग को भी भेजा मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए NHRC ने शिकायत को केंद्रीय गृह मंत्रालय के Women Safety Division के पास भी भेजा है।
आयोग के अनुसार, शिकायत में उठाए गए आरोप यदि सही पाए जाते हैं तो उनका असर कथित पीड़िता के सम्मान, सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और न्याय तक पहुंच के अधिकार पर पड़ सकता है। इसी आधार पर आयोग ने राज्य प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
क्या है ₹5 करोड़ का आरोप?
शिकायत के मुताबिक, एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने कथित तौर पर दावा किया था कि दुष्कर्म से जुड़े एक मामले को दबाने या उसके खिलाफ कार्रवाई प्रभावित करने के बदले ₹5 करोड़ की मांग हुई थी।
शिकायत में इस कथित घटनाक्रम में मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी की भूमिका का आरोप लगाया गया है। लेकिन यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच अभी पूरी नहीं हुई है और NHRC ने भी इन्हें प्रमाणित तथ्य घोषित नहीं किया है।
गुरप्रीत कौर की ओर से कानूनी नोटिस की खबर
इस मामले में दूसरी ओर से भी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। News9 की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि गुरप्रीत कौर ने जस्टिस रणजीत सिंह को कानूनी नोटिस भेजा है और उनसे आरोपों पर जवाब मांगा गया है।
इससे साफ है कि मामला फिलहाल आरोप, प्रत्यारोप और जांच के चरण में है। किसी भी पक्ष की जिम्मेदारी या दोष का अंतिम निर्धारण जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किया जा सकता है।
पीड़िता के अधिकारों को लेकर NHRC की चिंता
शिकायत में कहा गया है कि यदि किसी दुष्कर्म मामले की जांच में राजनीतिक या अन्य प्रभाव डालने का प्रयास किया गया हो तो इससे पीड़िता के संवैधानिक और मानवाधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
विशेष रूप से शिकायत में चार पहलुओं पर चिंता जताई गई है—पीड़िता की गरिमा, उसकी सुरक्षा, निष्पक्ष जांच का अधिकार और न्याय तक पहुंच।
इन्हीं बिंदुओं को देखते हुए NHRC ने पंजाब प्रशासन से जांच रिपोर्ट तलब की है।
पंजाब की राजनीति में तेज हो सकता है विवाद
NHRC की कार्रवाई के बाद यह मामला पंजाब की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है। शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी इस प्रकरण को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा और NHRC द्वारा मांगी गई Action Taken Report का मुद्दा उठाया है।
राजनीतिक आरोपों से अलग, इस मामले का अगला महत्वपूर्ण चरण पंजाब के मुख्य सचिव और DGP की जांच रिपोर्ट होगी।
अब दो सप्ताह की रिपोर्ट पर नजर
NHRC के निर्देश के बाद पंजाब प्रशासन को आरोपों की जांच कर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपनी है। आयोग रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगा।
फिलहाल तीन बातें स्पष्ट हैं—NHRC ने शिकायत पर संज्ञान लिया है, पंजाब के मुख्य सचिव और DGP से रिपोर्ट मांगी गई है और आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं।
ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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