राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित विदेश दौरे से पहले अमेरिका में RSS को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) के शीर्ष अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को उच्चस्तरीय कूटनीतिक सम्मान नहीं देने और कथित धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले सदस्यों के खिलाफ प्रतिबंधों पर विचार करने की बात कही है। इसके बाद भारत सरकार ने USCIRF पर तीखा हमला करते हुए उसे पक्षपाती और अविश्वसनीय संस्था करार दिया है।
रिपोर्टों के मुताबिक मोहन भागवत 25 अगस्त 2026 से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर रहेंगे। अमेरिका में उनका प्रमुख कार्यक्रम 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में प्रस्तावित है, जहां वह ‘Universal Oneness Celebrations’ में शामिल होने वाले हैं। इसी कार्यक्रम से पहले USCIRF अधिकारियों की टिप्पणियों ने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में बहस तेज कर दी है।
USCIRF ने RSS को लेकर क्या कहा?
USCIRF के चेयर असिफ महमूद ने RSS पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव से जुड़े संगठनों का प्रमुख नेटवर्क होने का आरोप लगाया। वहीं आयोग के सदस्य Gene Mills की ओर से कहा गया कि RSS नेताओं को अमेरिकी सरकार द्वारा उच्चस्तरीय बैठकों या कूटनीतिक शिष्टाचार से सम्मानित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कथित धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार RSS सदस्यों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों पर विचार करने की बात कही।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में USCIRF अधिकारियों की मांग मुख्य रूप से RSS के सदस्यों पर targeted sanctions और उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क सीमित करने से जुड़ी है। इसे RSS संगठन पर अमेरिका में औपचारिक कानूनी प्रतिबंध लगाने के फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। USCIRF स्वयं अमेरिकी कांग्रेस द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र द्विदलीय आयोग है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और कांग्रेस को धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों पर सिफारिशें देता है; उसकी सिफारिश अपने-आप अमेरिकी सरकार की नीति नहीं बन जाती।
भारत ने दिया तीखा जवाब
भारत के विदेश मंत्रालय ने USCIRF की टिप्पणियों को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 21 अगस्त को मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि USCIRF लंबे समय से भारत के बारे में गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है।
जायसवाल ने कहा कि यह एक पक्षपाती संगठन है, जिसका अपना एजेंडा है और जिसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि USCIRF की भारत को लेकर टिप्पणियां लगातार चुनिंदा और पूर्वाग्रह से प्रभावित रही हैं।
इससे पहले मार्च 2026 में भी विदेश मंत्रालय ने USCIRF की वार्षिक रिपोर्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उस समय भारत ने आयोग पर भारत की धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति की ‘विकृत और चुनिंदा तस्वीर’ पेश करने का आरोप लगाया था और कहा था कि आयोग संदिग्ध स्रोतों एवं वैचारिक नैरेटिव पर निर्भर करता है।
मोहन भागवत के दौरे से ठीक पहले क्यों बढ़ा विवाद?
विवाद की टाइमिंग को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। मोहन भागवत का विदेश दौरा 25 अगस्त से शुरू होने वाला है और 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में उनका कार्यक्रम प्रस्तावित है। ऐसे में USCIRF अधिकारियों की टिप्पणी दौरे से ठीक पहले सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार भागवत अमेरिका के अलावा कनाडा और ब्रिटेन भी जाएंगे। यह दौरा प्रवासी भारतीय और हिंदू संगठनों के साथ संवाद तथा विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़ा बताया गया है।
USCIRF और भारत के बीच पहले भी हो चुका है टकराव
यह पहला मौका नहीं है जब भारत और USCIRF आमने-सामने आए हों। आयोग पिछले कई वर्षों से भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर सवाल उठाता रहा है। मार्च 2026 की रिपोर्ट में भी आयोग ने भारत को लेकर कई आलोचनात्मक टिप्पणियां की थीं और लक्षित प्रतिबंधों से जुड़ी सिफारिशें सामने आई थीं।
भारत इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि USCIRF वस्तुनिष्ठ तथ्यों के बजाय चुनिंदा घटनाओं और वैचारिक दृष्टिकोण के आधार पर भारत की छवि प्रस्तुत करता है।
अमेरिका में USCIRF की भूमिका क्या है?
USCIRF यानी United States Commission on International Religious Freedom अमेरिकी कांग्रेस द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र और द्विदलीय संघीय आयोग है। इसका काम दुनिया के अलग-अलग देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थितियों की निगरानी करना और अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री तथा कांग्रेस को नीति संबंधी सुझाव देना है। इसके आयुक्त अमेरिकी राष्ट्रपति और कांग्रेस के दोनों सदनों के नेतृत्व द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।
इसलिए USCIRF की टिप्पणी और अमेरिकी सरकार का आधिकारिक रुख एक ही चीज नहीं हैं। आयोग प्रतिबंधों या अन्य कदमों की सिफारिश कर सकता है, लेकिन उन्हें लागू करने का फैसला अमेरिकी प्रशासन के संबंधित विभागों पर निर्भर करता है।
भागवत के दौरे से पहले बहस हुई तेज
RSS प्रमुख के अमेरिकी कार्यक्रम से पहले सामने आए इस विवाद ने धार्मिक स्वतंत्रता, भारत-अमेरिका संबंधों और RSS की अंतरराष्ट्रीय भूमिका से जुड़ी बहस को फिर तेज कर दिया है। एक तरफ USCIRF के अधिकारी RSS से जुड़े लोगों पर लक्षित कार्रवाई की वकालत कर रहे हैं, तो दूसरी ओर भारत ने आयोग की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि मोहन भागवत के अमेरिका पहुंचने के बाद उनके कार्यक्रमों, बैठकों और अमेरिकी प्रशासन के रुख पर इस विवाद का कोई असर दिखाई देता है या नहीं।
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