गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र को जल्द ही देश के उभरते अंतरिक्ष क्षेत्र में नई पहचान मिल सकती है। राज्य सरकार ने सौराष्ट्र के कोडिनार के पास एक अंतरिक्ष प्रक्षेपण स्टेशन यानी स्पेसपोर्ट (Spaceport) स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। गुजरात के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया (Arjun Modhwadia) ने शुक्रवार, 21 अगस्त को अहमदाबाद के साइंस सिटी में आयोजित तीन दिवसीय अंतरिक्ष महोत्सव के शुभारंभ के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा की।
प्रस्तावित स्पेसपोर्ट को गुजरात के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह परियोजना साकार होती है तो गुजरात देश के तेजी से विस्तार कर रहे निजी और व्यावसायिक अंतरिक्ष क्षेत्र से सीधे जुड़ सकता है। इसके साथ ही राज्य में स्पेस टेक्नोलॉजी, रॉकेट लॉन्चिंग, रिसर्च, मैन्युफैक्चरिंग और अंतरिक्ष आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
कोडिनार के पास Spaceport बनाने की तैयारी
गुजरात के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अधिकारियों के अनुसार, कोडिनार के आसपास स्पेसपोर्ट स्थापित करने को लेकर पिछले काफी समय से चर्चा चल रही है। क्षेत्र की भौगोलिक और तटीय स्थिति को अंतरिक्ष संबंधी गतिविधियों के लिए संभावित रूप से उपयुक्त माना गया है।
फिलहाल परियोजना शुरुआती चरण में है। प्रस्तावित स्थल का तकनीकी आकलन और मूल्यांकन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सहयोग से किया जा रहा है। साइट को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद परियोजना के अगले चरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इससे पहले भी गिर और कोडिनार के बीच स्थित तटीय क्षेत्र को गुजरात में अंतरिक्ष गतिविधियों के विकास के लिए संभावित क्षेत्र के तौर पर देखा गया था। मार्च में अर्जुन मोढवाडिया ने विधानसभा में भी बताया था कि स्पेसपोर्ट के लिए उपयुक्त स्थान की पहचान की जा रही है।
श्रीहरिकोटा और कुलसेकरपट्टिनम के बाद गुजरात की बड़ी तैयारी
भारत का प्रमुख अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित है। वहीं तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में देश का दूसरा स्पेसपोर्ट विकसित किया जा रहा है।
ऐसे में गुजरात के कोडिनार के पास प्रस्तावित स्पेसपोर्ट भविष्य में देश के अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे को और विस्तार देने में अहम भूमिका निभा सकता है। विशेष रूप से छोटे उपग्रहों, निजी रॉकेट कंपनियों और कमर्शियल लॉन्चिंग की बढ़ती मांग को देखते हुए नए लॉन्चिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
गुजरात पहले से ही मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और टेक्नोलॉजी निवेश को आकर्षित करने की दिशा में काम कर रहा है। स्पेसपोर्ट इस इकोसिस्टम में एक नया रणनीतिक क्षेत्र जोड़ सकता है।
गुजरात में Space Startups को मिलेगा बड़ा फायदा
गुजरात में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम भी धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, राज्य में 20 से अधिक स्टार्टअप और संगठन स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
स्पेसपोर्ट बनने से रॉकेट एवं सैटेलाइट निर्माण, लॉन्च व्हीकल टेस्टिंग, ग्राउंड सिस्टम, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, डेटा एनालिटिक्स और अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़ी निजी कंपनियों को राज्य में अपना आधार विकसित करने का अवसर मिल सकता है।
इसका फायदा स्थानीय रोजगार और कौशल विकास को भी मिलने की संभावना है। इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस, मैकेनिकल डिजाइन, सॉफ्टवेयर और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में नई नौकरियों और प्रशिक्षण के अवसर पैदा हो सकते हैं।
धोलेरा से हो चुकी है रॉकेट लॉन्चिंग की शुरुआत
गुजरात में निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष गतिविधियों की शुरुआती झलक पहले ही देखने को मिल चुकी है। इसी वर्ष की शुरुआत में धोलेरा क्षेत्र में एक स्टार्टअप द्वारा साउंडिंग रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया गया था।
इस उपलब्धि को गुजरात में निजी अंतरिक्ष उद्योग के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत के रूप में देखा गया। अब कोडिनार के पास प्रस्तावित स्पेसपोर्ट की घोषणा से राज्य की अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं को नया आयाम मिल सकता है।
अहमदाबाद के पास Space Technology के लिए विशेष क्षेत्र
अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए गुजरात में संस्थागत स्तर पर भी प्रयास किए जा रहे हैं। IN-SPACe ने इस वर्ष अहमदाबाद के पास खोराज में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लिए एक विशेष क्षेत्र की घोषणा की है।
IN-SPACe भारत में निजी कंपनियों और गैर-सरकारी संस्थाओं की अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने और सुविधा उपलब्ध कराने वाली प्रमुख संस्था है। खोराज में विकसित होने वाला स्पेस टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम और कोडिनार का संभावित स्पेसपोर्ट भविष्य में एक-दूसरे के पूरक साबित हो सकते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है कोडिनार का तटीय इलाका?
रॉकेट लॉन्चिंग के लिए स्थान का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है। लॉन्चिंग के दौरान सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र की उपलब्धता, रॉकेट के संभावित उड़ान मार्ग, आबादी की स्थिति, परिवहन और लॉजिस्टिक्स सहित कई तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।
यही कारण है कि ISRO के सहयोग से प्रस्तावित स्थल का विस्तृत तकनीकी मूल्यांकन किया जा रहा है। अंतिम निर्णय तकनीकी व्यवहार्यता और सुरक्षा संबंधी सभी मानकों की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा।
23 अगस्त को मनाया जाता है National Space Day
भारत प्रत्येक वर्ष 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (National Space Day) मनाता है। यह दिवस 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर की चंद्रमा पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में मनाया जाता है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस से ठीक पहले गुजरात में स्पेसपोर्ट की योजना सामने आने से राज्य की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यदि परियोजना को मंजूरी मिलती है तो कोडिनार आने वाले वर्षों में गुजरात के साथ-साथ भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल हो सकता है।
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