Kashi Vishwanath Temple में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav द्वारा भेंट की गई विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की लोकप्रियता के बाद अब केंद्र और राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।
सरकार अब देश के प्रमुख मंदिरों और महत्वपूर्ण सरकारी भवनों में ऐसी वैदिक घड़ियां लगाने जा रही है, जो पारंपरिक भारतीय समय गणना प्रणाली के अनुसार समय बताएंगी।
अयोध्या से संसद और PMO तक लगेगी वैदिक घड़ी
मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी के अनुसार योजना का प्रारूप तैयार हो चुका है।
पहले चरण में देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में ये विशेष घड़ियां स्थापित की जाएंगी। इसके बाद:
- Somnath Temple
- Mahakaleshwar Jyotirlinga
- Ram Mandir
- संसद भवन
- राष्ट्रपति भवन
- प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
जैसे प्रमुख स्थानों पर भी वैदिक घड़ियां लगाई जाएंगी।
क्या है वैदिक घड़ी की खासियत?
यह घड़ी आधुनिक 24 घंटे वाली समय प्रणाली से अलग काम करती है और प्राचीन भारतीय समय गणना पद्धति पर आधारित है।
1. सूर्योदय से शुरू होता है दिन
इस घड़ी में दिन की शुरुआत रात 12 बजे नहीं बल्कि सूर्योदय से मानी जाती है।
2. 30 मुहूर्त में बंटा पूरा दिन
पूरे दिन को 24 घंटों की जगह 30 मुहूर्तों में विभाजित किया गया है।
हर मुहूर्त लगभग 48 मिनट का होता है।
3. लोकल मीन टाइम (LMT)
यह घड़ी सूर्य की वास्तविक स्थिति के आधार पर स्थानीय समय बताती है।
4. डिजिटल पंचांग
घड़ी में:
- तिथि
- नक्षत्र
- त्योहार
- ग्रहण
- चंद्रमा की स्थिति
जैसी जानकारियां भी दिखाई जाती हैं।5. IST और GMT भी उपलब्ध
वैदिक समय के साथ-साथ भारतीय मानक समय (IST) और ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) भी डिस्प्ले होता है।
सोशल मीडिया पर छाया #Vikramotsav_Varanasi
माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X पर #Vikramotsav_Varanasi ट्रेंड करने लगा था। अधिकारियों के अनुसार वैदिक घड़ी से जुड़े हैशटैग्स को करोड़ों व्यूज मिले।
मध्य प्रदेश में विकसित हुई अनोखी तकनीकप्रधानमंत्री Narendra Modi की 29 अप्रैल 2026 की काशी यात्रा के दौरान इस वैदिक घड़ी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थीं।
इस वैदिक घड़ी का डिजाइन और विकास पूरी तरह Madhya Pradesh में किया गया है।
फिलहाल यह घड़ियां:
- उज्जैन शहर
- भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास
- वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर
में स्थापित हैं।
भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने की तैयारी
सरकार का उद्देश्य “भारत का समय – धरती का समय” थीम के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा और वैदिक विज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय संस्कृति, ज्योतिष और पारंपरिक समय विज्ञान को वैश्विक पहचान दिला सकती है।
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