आईटी कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) से जुड़े कथित धर्मांतरण और उत्पीड़न मामले में फरार चल रही आरोपित निदा खान को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने करीब 25 दिनों की लगातार तलाश के बाद गुरुवार (7 मई 2026) को उसे छत्रपति संभाजीनगर से पकड़ा।
पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के अनुसार, यह गिरफ्तारी स्थानीय पुलिस के सहयोग से की गई। इस मामले में पहले ही कई प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं और अब तक कुल आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मामला TCS से जुड़े एक BPO यूनिट का बताया जा रहा है, जहां कुछ मुस्लिम कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने संगठित तरीके से हिंदू महिला कर्मचारियों का शोषण किया। पीड़िताओं ने यौन उत्पीड़न, मानसिक दबाव, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित निदा खान कथित तौर पर महिला कर्मचारियों को हिजाब और बुर्का पहनने, इस्लामी तौर-तरीकों को अपनाने और धार्मिक सामग्री देखने के लिए प्रेरित करती थी। इसके अलावा, पीड़िताओं को कुछ मोबाइल एप और धार्मिक कंटेंट भी भेजे गए थे, और यहां तक कि उनका नाम बदलने की योजना भी बनाई जा रही थी।
गिरफ्तारी से पहले निदा खान ने नासिक कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। उसने अदालत में दावा किया था कि वह गर्भवती है और मुंबई में रह रही है, इसलिए उसे राहत दी जाए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में अलग से धर्मांतरण विरोधी कानून लागू नहीं है और आरोप निराधार हैं। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए उसे अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले में डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और कई संवेदनशील जानकारियां सामने आई हैं, जिसके चलते आरोपित से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। SIT ने यह भी खुलासा किया कि जांच का दायरा नासिक से आगे बढ़कर मालेगांव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मलेशिया तक पहुंच गया है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि विदेश में नौकरी के अवसरों का इस्तेमाल कथित तौर पर लालच देने के लिए किया गया हो सकता है।
पुलिस के अनुसार, FIR दर्ज होने के बाद से ही आरोपित फरार थी और लगातार अपने ठिकाने बदल रही थी। उसके मोबाइल फोन और कुछ रिश्तेदारों के फोन भी बंद पाए गए थे। पुलिस ने उसके पति से पूछताछ के बाद कई जगहों पर छापेमारी की, लेकिन हर बार उसे खाली मकान ही मिले।
मामले में आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत यौन उत्पीड़न, मानहानि और धार्मिक भावनाएं आहत करने से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया गया है। साथ ही, शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति समुदाय से होने के कारण उस पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी धाराएं लगाई गई हैं।
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