गुजरात के महत्वाकांक्षी औद्योगिक और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट धोलेरा में एक अनोखे पर्यावरणीय प्रयोग ने नई मिसाल कायम की है। अत्यधिक खारी, क्षारीय और बंजर भूमि वाले इस क्षेत्र में गुजरात वन विभाग ने ‘ड्रम प्लांटेशन’ तकनीक के माध्यम से हरियाली विकसित करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस तकनीक के जरिए लगाए गए पौधे एक वर्ष से भी कम समय में 12 फीट तक ऊंचे हो गए हैं।
मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में धोलेरा को विश्वस्तरीय टिकाऊ स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र विकास प्राधिकरण (DSIRDA) ने इस अभिनव परियोजना के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है।
खारी और बंजर भूमि में उगाए गए 3200 से अधिक पौधे
अहमदाबाद जिले के समुद्री तट के निकट स्थित धोलेरा क्षेत्र अपनी अर्ध-शुष्क जलवायु, ऊसर भूमि और अत्यधिक खारेपन के लिए जाना जाता है। यहां प्राकृतिक रूप से घास तक उगाना मुश्किल माना जाता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण वातावरण में गुजरात वन विभाग के अहमदाबाद सामाजिक वनीकरण विभाग ने अगस्त 2025 में 15 से अधिक प्रजातियों के 3200 पौधों का रोपण किया।
इस परियोजना में पौधों को प्लास्टिक ड्रमों में विशेष तकनीक से लगाया गया ताकि उनकी जड़ें सीधे खारी मिट्टी के संपर्क में न आएं। ड्रमों में रेती, उपजाऊ मिट्टी, वर्मी कम्पोस्ट, फसल अवशेष और कोकोपीट जैसे पोषक तत्वों से भरपूर मिश्रण भरा गया।
क्या है ड्रम प्लांटेशन तकनीक?
उप वन संरक्षक (DCF) डॉ. मीनल जानी के अनुसार, धोलेरा की मिट्टी में अत्यधिक लवणता, उच्च विद्युत चालकता और कार्बन की बेहद कम मात्रा पौधों की वृद्धि में बड़ी बाधा थी। इसके अलावा क्षेत्र में छह महीने तक पानी भरा रहने की समस्या भी मौजूद है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए पौधों को प्लास्टिक ड्रमों में ऊंचाई पर लगाया गया। ड्रमों में हवा के आवागमन के लिए विशेष छिद्र बनाए गए और उन्हें जमीन में लगभग एक फुट गहराई तक दबाया गया। DSIRDA द्वारा मीठे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई और सभी पौधों के लिए ड्रिप इरिगेशन प्रणाली स्थापित की गई।
इन प्रयासों का परिणाम यह रहा कि लगभग सभी पौधे जीवित हैं और कई पौधों में फल भी आने लगे हैं।
15 से अधिक प्रजातियों का हुआ रोपण
धोलेरा को हरित क्षेत्र में बदलने के लिए कई स्थानीय और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इनमें पीलू (मेसवाक), पलाश, सेमल, पारस पीपल, बरगद, पीपल, पीला गुलमोहर, देसी बबूल, करंज, अर्जुन, जंगल जलेबी, नीम, लिसोड़ा (गूंदा) और इमली प्रमुख हैं।
विकसित हुआ नया इकोसिस्टम
जहां पहले घास का एक तिनका भी नहीं उगता था, वहां अब पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देने लगी है। पौधों के बढ़ने के साथ क्षेत्र में परागण करने वाले जीव-जंतु (पोलिनेटर्स) पहुंचने लगे हैं और प्राकृतिक रूप से घास भी उगने लगी है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि एक नए प्राकृतिक इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है।
50 हजार नए पौधे लगाने की तैयारी
पायलट परियोजना की सफलता के बाद धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र विकास प्राधिकरण (DSIRDA) ने इस अभियान के विस्तार के लिए अतिरिक्त 20 हेक्टेयर भूमि आवंटित की है। अगले चरण में धोलेरा एक्टिवेशन क्षेत्र में इसी ड्रम प्लांटेशन तकनीक के माध्यम से लगभग 50,000 नए पौधे लगाए जाएंगे।
विशेष बात यह है कि पौधारोपण में उपयोग किए गए प्लास्टिक ड्रमों को बाद में हटाकर रिसाइकिल किया जाएगा, जिससे यह परियोजना पर्यावरण की दृष्टि से पूरी तरह टिकाऊ बनी रहेगी।
धोलेरा बनेगा हरित और टिकाऊ स्मार्ट सिटी का वैश्विक मॉडल
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का विजन धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र को विश्वस्तरीय ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी और सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है। औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को संतुलित करने की दिशा में ड्रम प्लांटेशन परियोजना एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरी है।
मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार औद्योगिक विकास के साथ हरित विकास को भी समान प्राथमिकता दे रही है। धोलेरा की खारी और बंजर भूमि में विकसित हुई यह हरियाली भविष्य के टिकाऊ शहरी विकास की नई दिशा दिखा रही है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel