पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल लाते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी छोड़ने के पीछे की वजहों पर खुलकर बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में बढ़ते कुप्रशासन, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
काकोली घोष ने कहा कि TMC के भीतर लंबे समय से असंतोष पनप रहा था और अब पार्टी के करीब 20 सांसद NDA के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि इन सांसदों ने संयुक्त रूप से लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है।
‘बंगाल के हित में लिया फैसला’
काकोली घोष ने कहा कि उनका निर्णय किसी व्यक्तिगत लाभ या दबाव के कारण नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल और देश के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में शासन व्यवस्था कमजोर हुई है, बेरोजगारी बढ़ी है और आम जनता में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी है। ऐसे में विकास और सुशासन के लिए नए राजनीतिक विकल्प की आवश्यकता महसूस हुई।
NDA के साथ काम करने को तैयार 20 सांसद
बागी सांसद ने दावा किया कि TMC के करीब 20 सांसद पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और वे केंद्र सरकार तथा NDA के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि सांसदों का यह समूह पश्चिम बंगाल के विकास, बेहतर कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए नई राजनीतिक दिशा की ओर बढ़ रहा है।
#WATCH | Delhi: Lok Sabha MP Kakoli Ghosh says, "Mera sar katega lekin jhukega nahi… Maine bohot seh liya… I did not come here after Mamata Banerjee became Chief Minister in 2011; I have been fighting here for 40 years. And as I said, the words of such people have absolutely… pic.twitter.com/KKmfQlpUFl
— ANI (@ANI) June 9, 2026
‘मेरा सिर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं’
काकोली घोष ने अपने लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वह पिछले लगभग 40 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं और ममता बनर्जी के संघर्ष के दिनों से उनके साथ रही हैं।
उन्होंने कहा:
“मेरा सिर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं। मैंने बहुत सह लिया। मैं 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राजनीति में नहीं आई। मैं पिछले 40 वर्षों से संघर्ष कर रही हूं।”
उन्होंने कहा कि अब उनका लक्ष्य केवल बंगाल और देश के हित में काम करना है।
‘मुझे पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया’
काकोली घोष ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन उसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
उन्होंने कहा कि न तो किसी वरिष्ठ नेता ने उनसे संपर्क किया और न ही उनकी बात सुनने की कोशिश की गई।
“मैंने खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी ली, लेकिन उसके बाद किसी ने मुझे फोन तक नहीं किया। मुझे पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया।”
बंगाल की राजनीति में बढ़ा सियासी संकट
काकोली घोष के बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। यदि उनके 20 सांसदों वाले दावे में सच्चाई निकलती है, तो यह TMC के लिए लोकसभा चुनाव से पहले सबसे बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक काकोली घोष के दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद बंगाल की राजनीति की दिशा बदल सकता है।
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