धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी से एक बेहद रोचक और आस्था से जुड़ी घटना सामने आई है। वाराणसी के सूजाबाद क्षेत्र स्थित शक्ति घाट के पास गंगा नदी से एक विशाल और भारी-भरकम शिवलिंग मिलने के बाद पूरे इलाके में उत्साह और जिज्ञासा का माहौल है। स्थानीय लोगों और नमामि गंगे से जुड़े पदाधिकारियों का दावा है कि यह शिवलिंग करीब 2500 वर्ष पुराना हो सकता है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना 5 जून 2026 की है। नाविक गंगा नदी में नियमित रूप से मछली पकड़ने के लिए जाल डाल रहे थे। इसी दौरान उनके जाल में एक बेहद भारी पत्थरनुमा संरचना फंस गई। जब उसे बाहर निकाला गया तो वह भगवान शिव का शिवलिंग निकला।
10-15 लोगों ने मिलकर निकाला बाहर
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शिवलिंग इतना भारी था कि उसे नदी से बाहर निकालने के लिए 10 से 15 लोगों को एक साथ प्रयास करना पड़ा। अनुमान है कि इसका वजन लगभग 200 किलोग्राम है।
शिवलिंग के बाहर आते ही आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई और इसे भगवान शिव का चमत्कार मानते हुए पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई।
वाराणसी में गंगा नदी से मिला करीब 200 किलो वजनी विशाल शिवलिंग श्रद्धालुओं के बीच आस्था का केंद्र बन गया है।
बताया जा रहा है कि यह शिवलिंग लगभग 2500 साल पुराना हो सकता है।
गंगा से निकले इस अद्भुत शिवलिंग के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
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— One India News (@oneindianewscom) June 9, 2026
2500 साल पुराना होने का दावा
स्थानीय लोगों और नमामि गंगे के प्रतिनिधियों का कहना है कि शिवलिंग काले पत्थर से निर्मित है और इसकी बनावट अत्यंत प्राचीन दिखाई देती है। प्रारंभिक अनुमान के आधार पर इसे मौर्यकालीन (Mauryan Era) बताया जा रहा है।
हालांकि अभी तक इसकी उम्र और ऐतिहासिक महत्व की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरातात्विक जांच के बाद ही इसके वास्तविक इतिहास और कालखंड की जानकारी सामने आ सकेगी।
गंगा मंदिर परिसर में रखा गया सुरक्षित
फिलहाल इस शिवलिंग को सूजाबाद स्थित गंगा मंदिर के चबूतरे पर सुरक्षित रखा गया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन यहां पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन कर रहे हैं और पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा नदी से शिवलिंग का निकलना एक दुर्लभ और आध्यात्मिक घटना है, जिसके कारण क्षेत्र में धार्मिक उत्साह बढ़ गया है।
पुरातत्व विभाग करेगा जांच
शिवलिंग की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए पुरातत्व विभाग को इसकी जानकारी दे दी गई है। विशेषज्ञों की टीम जल्द ही स्थल का निरीक्षण कर सकती है।
यदि जांच में यह शिवलिंग वास्तव में प्राचीन काल का पाया जाता है, तो यह वाराणसी और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के लिए एक महत्वपूर्ण खोज साबित हो सकता है।
आस्था और इतिहास का अनोखा संगम
वाराणसी पहले से ही विश्व के सबसे प्राचीन जीवित शहरों में गिना जाता है। ऐसे में गंगा नदी से मिले इस विशाल शिवलिंग ने न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को और मजबूत किया है, बल्कि इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों की उत्सुकता भी बढ़ा दी है।
अब सभी की निगाहें पुरातत्व विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस रहस्यमयी शिवलिंग की वास्तविक उम्र और ऐतिहासिक महत्व का खुलासा कर सकती है।
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