पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने गुरुवार (11 जून) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के साथ ही राज्यसभा में TMC की संख्या घटकर महज 10 सांसदों तक सिमट गई है। राजनीतिक गलियारों में इसे ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
प्रकाश चिक बराइक पिछले एक सप्ताह के भीतर राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले TMC के तीसरे बड़े नेता बन गए हैं। इससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। लगातार हो रहे इस्तीफों ने पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और नेतृत्व संकट की चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
TMC में बढ़ रहा असंतोष
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी के अंदर लंबे समय से कई नेताओं और सांसदों में नाराजगी बनी हुई थी। संगठनात्मक फैसलों, नेतृत्व शैली और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर मतभेद लगातार सामने आ रहे थे।
इसी असंतोष के चलते अब पार्टी में बड़े पैमाने पर टूट की आशंकाएं जताई जा रही हैं। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में तीन और राज्यसभा सांसद इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे TMC की संसदीय स्थिति और कमजोर हो सकती है।

लोकसभा और विधानसभा में भी संकट
ममता बनर्जी की मुश्किलें केवल राज्यसभा तक सीमित नहीं हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 80 विधायकों में से बड़ी संख्या बागी गुट के संपर्क में बताई जा रही है।
वहीं लोकसभा में भी TMC के करीब 20 सांसदों के रुख को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह असंतोष खुलकर सामने आता है तो बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
बंगाल की राजनीति में नए समीकरण
लगातार इस्तीफों और बगावती सुरों के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलें लगाई जा रही हैं। विपक्षी दल भी TMC में मचे घमासान पर नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पार्टी नेतृत्व समय रहते असंतुष्ट नेताओं को मनाने में सफल नहीं होता, तो आगामी चुनावों से पहले TMC को बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
क्या ममता बनर्जी संभाल पाएंगी हालात?
पिछले कुछ दिनों में सामने आए घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ममता बनर्जी पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को नियंत्रित कर पाएंगी। लगातार इस्तीफों और बगावत की खबरों ने बंगाल की सियासत को गर्मा दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का केंद्र बन सकता है।
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