अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लेफ्टिनेंट गवर्नर एडमिरल डीके जोशी ने ₹92,000 करोड़ की महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार डेवलपमेंट परियोजना का जोरदार बचाव करते हुए कहा है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर फैलाए जा रहे कई दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परियोजना के कारण किसी भी आदिवासी समुदाय को विस्थापित नहीं किया जाएगा और सभी पर्यावरणीय एवं कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया है।
पूर्व नौसेना प्रमुख और अंडमान एवं निकोबार कमांड के पूर्व कमांडर-इन-चीफ रहे एडमिरल डीके जोशी ने एक इंटरव्यू में परियोजना से जुड़े विवादों और विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी।
‘किसी भी आदिवासी समुदाय को नहीं होगा नुकसान’
एलजी डीके जोशी ने कहा कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के खिलाफ उठ रही आशंकाएं मुख्य रूप से अधूरी जानकारी और गलत धारणाओं पर आधारित हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि परियोजना के चलते किसी भी आदिवासी समुदाय को अपने पारंपरिक निवास स्थान से हटना नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले सभी आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियां और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की हैं। साथ ही स्थानीय समुदायों के हितों और पारिस्थितिकी संतुलन को ध्यान में रखा गया है।
क्या है ग्रेट निकोबार डेवलपमेंट प्रोजेक्ट?
ग्रेट निकोबार डेवलपमेंट प्रोजेक्ट भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। इस परियोजना के तहत:
- अंतरराष्ट्रीय स्तर का कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट
- ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट
- आधुनिक ऊर्जा एवं बिजली अवसंरचना
- पर्यटन आधारित स्मार्ट टाउनशिप
- लॉजिस्टिक और समुद्री व्यापार सुविधाओं का विकास
किया जाना प्रस्तावित है।
सरकार का मानना है कि यह परियोजना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति को और मजबूत करेगी तथा वैश्विक समुद्री व्यापार में देश की भूमिका को नई ऊंचाई देगी।
‘भारत को मिलेगा अनोखा रणनीतिक लाभ’
एलजी जोशी के अनुसार ग्रेट निकोबार की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यह इलाका प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों के बेहद करीब स्थित है।
उन्होंने कहा कि परियोजना केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह भारत की समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव को मजबूत करने का भी माध्यम बनेगी।
उन्होंने कहा, “यह केवल सुरक्षा या अर्थव्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति के व्यापक प्रदर्शन का हिस्सा है।”
पर्यावरणीय नुकसान के आरोपों पर क्या बोले LG?
परियोजना को लेकर पर्यावरणीय संगठनों और विपक्षी दलों ने बड़े पैमाने पर वन कटाई और जैव विविधता को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डीके जोशी ने कहा कि वास्तविकता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
उनके अनुसार अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का लगभग 94 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जबकि परियोजना के लिए कुल वन क्षेत्र का केवल लगभग 1.8 प्रतिशत हिस्सा ही उपयोग में लाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जहां वन क्षेत्र प्रभावित होगा, वहां व्यापक स्तर पर पुनर्वनीकरण (Reforestation) और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के उपाय किए जाएंगे।
राहुल गांधी के आरोपों पर अप्रत्यक्ष जवाब
एलजी का बयान ऐसे समय आया है जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस परियोजना को देश की प्रकृति और आदिवासी विरासत के खिलाफ बड़ा खतरा बताया था।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि परियोजना से वर्षावनों, प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) और विशेष रूप से शोंपेन जनजाति जैसे संवेदनशील आदिवासी समुदायों को नुकसान पहुंच सकता है।
हालांकि डीके जोशी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि परियोजना के सभी पहलुओं का वैज्ञानिक अध्ययन और मूल्यांकन किया गया है।
उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के आरोप भी खारिज
एलजी डीके जोशी ने इस आरोप को भी निराधार बताया कि परियोजना किसी विशेष उद्योगपति या कॉरपोरेट समूह को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि जब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, तब तक किसी विशेष कंपनी को लाभ मिलने का दावा करना पूरी तरह से गलत और भ्रामक है।
‘यही सही समय है’
डीके जोशी ने कहा कि भारत को वैश्विक समुद्री और आर्थिक शक्ति बनाने के लिए इस प्रकार की दीर्घकालिक परियोजनाएं आवश्यक हैं। उन्होंने सरदार सरोवर बांध जैसी बड़ी परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि विकास कार्यों का विरोध अक्सर होता है, लेकिन राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए।
उन्होंने विश्वास जताया कि ग्रेट निकोबार परियोजना भारत की सामरिक, आर्थिक और समुद्री क्षमता को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी।
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