ईरान के दिवंगत पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा सोमवार, 6 जुलाई 2026 को तेहरान में शुरू हो गई। दो दिनों तक चले सार्वजनिक विदाई समारोह के बाद उनका पार्थिव शरीर विशाल जुलूस के साथ राजधानी की सड़कों से ले जाया जा रहा है। अंतिम यात्रा के दौरान भारी भीड़ उमड़ी है और बड़ी संख्या में लोग सड़कों के दोनों ओर खड़े होकर अपने पूर्व सर्वोच्च नेता को अंतिम विदाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, यह विशाल जुलूस करीब 10 से 12 घंटे तक चल सकता है।
इस पूरे आयोजन के बीच सबसे अधिक चर्चा ईरान के मौजूदा सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मुजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी को लेकर हो रही है। अली खामेनेई के उत्तराधिकारी बने मुजतबा अंतिम संस्कार से जुड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों और अंतिम यात्रा में दिखाई नहीं दिए। उनकी अनुपस्थिति के कारण को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें सामने आई हैं, जिनमें सुरक्षा कारणों और पूर्व हमले में लगी गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया है।
अली खामेनेई के तीन बेटे अंतिम विदाई में शामिल
मुजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति के बावजूद दिवंगत नेता के अन्य तीन बेटे मुस्तफा खामेनेई, मसूद खामेनेई और मेसम खामेनेई अंतिम संस्कार समारोह में सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए।
उनके साथ ईरान के कई शीर्ष राजनीतिक और सैन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने भी अंतिम विदाई के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
मुजतबा खामेनेई का सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देना ईरान के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि ईरानी पक्ष की ओर से उनकी गैरमौजूदगी को लेकर सुरक्षा संबंधी कारण बताए जाने की रिपोर्टें हैं, लेकिन उनकी स्थिति को लेकर अटकलें भी जारी हैं।
📹 هماکنون؛ ورود خودروی حامل پیکر مطهر رهبر شهید انقلاب و شهدای خانواده ایشان به مسیر تشییع تهران در میان خیل جمعیت مردم عزادار#انتقام_خون_رهبر_شهید pic.twitter.com/3ieSF7eHi1
— خبرگزاری تسنیم (@Tasnimnews_Fa) July 6, 2026
तेहरान की सड़कों पर भारी भीड़, 10-12 घंटे तक चल सकती है अंतिम यात्रा
अंतिम यात्रा के लिए तेहरान की प्रमुख सड़कों पर लोगों का बड़ा हुजूम उमड़ा। अंतिम यात्रा से पहले अली खामेनेई का पार्थिव शरीर दो दिनों तक तेहरान के विशाल इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था।
इसके बाद 6 जुलाई को विशाल जुलूस शुरू हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, इस अंतिम यात्रा के 10 से 12 घंटे तक चलने का अनुमान लगाया गया है। जुलूस के आगे बढ़ने के साथ सड़कों पर भीड़ लगातार बढ़ती देखी गई।
ईरानी अधिकारियों ने विशाल जनसमूह को देखते हुए व्यापक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के इंतजाम किए। गर्मी से लोगों को राहत देने के लिए रास्ते में पानी की फुहारों का भी इस्तेमाल किया गया।
दमावंद स्ट्रीट से आजादी स्क्वायर तक अंतिम यात्रा
रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान में अंतिम यात्रा का मार्ग राजधानी के कई प्रमुख इलाकों से होकर गुजर रहा है।
जुलूस का निर्धारित मार्ग दमावंद स्ट्रीट से इमाम हुसैन स्क्वायर, एनकेलाब स्ट्रीट, एनकेलाब स्क्वायर और आजादी स्ट्रीट होते हुए आजादी स्क्वायर की ओर बढ़ता है। इसके बाद जुलूस मेहराबाद हवाई अड्डे के आसपास के क्षेत्र की दिशा में आगे बढ़ेगा।
पूरी यात्रा लगभग 10 किलोमीटर लंबी बताई गई है और इसके लिए राजधानी में बड़े पैमाने पर यातायात तथा सुरक्षा व्यवस्था बदली गई है।
‘बदला’ और ‘प्रतिरोध’ के नारे, लाल झंडे भी दिखे
अली खामेनेई की अंतिम यात्रा केवल शोक समारोह तक सीमित नहीं रही। जुलूस के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगाए।
कई शोकाकुल लोगों के हाथों में ऐसे बैनर और पोस्टर दिखाई दिए, जिनमें अमेरिका तथा इजरायल के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया गया। कुछ स्थानों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ धमकीपूर्ण संदेश और नारे भी दिखाई दिए।
जुलूस में कई लोग लाल धार्मिक झंडे और बैनर लिए भी नजर आए। शिया परंपरा और ईरानी राजनीतिक प्रतीकों में लाल रंग को अन्याय के खिलाफ संघर्ष और बदले की मांग से जोड़कर देखा जाता है।
समारोह के दौरान ‘प्रतिरोध’ और ‘खून का बदला’ जैसे भाव वाले नारे सुनाई देने की भी रिपोर्ट है।
ट्रंप के खिलाफ धमकीपूर्ण संदेश बने चर्चा का विषय
अंतिम संस्कार के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों और उपस्थित लोगों द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ दिए गए धमकीपूर्ण संदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में एक प्रस्तोता ने भी ट्रंप की मौत की मांग वाला संदेश दिया था। इसके अलावा कुछ दीवारों, पोस्टरों और बैनरों पर भी धमकीपूर्ण संदेश देखे गए।
हालांकि ये नारे और संदेश कार्यक्रम में मौजूद कुछ लोगों या समूहों की ओर से थे। इन्हें पूरे ईरानी समाज या सभी प्रतिभागियों की आधिकारिक स्थिति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
ताबूत लेकर विशाल भीड़ के बीच आगे बढ़ा वाहन
ईरानी मीडिया के अनुसार, अली खामेनेई और उनके परिवार के उन सदस्यों के ताबूतों को ले जाने वाला वाहन भी अंतिम यात्रा में शामिल हुआ, जिनकी मृत्यु उनके साथ हुई थी।
राष्ट्रीय ध्वज से ढके ताबूतों को एक विशेष वाहन पर रखकर भारी भीड़ के बीच से निकाला गया। जुलूस के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने वाहन के करीब पहुंचकर अंतिम सम्मान देने का प्रयास किया।
भीड़ के आकार को देखते हुए सुरक्षा अधिकारियों को लगातार लोगों से संयम बनाए रखने की अपील करनी पड़ी।
कोम में होगा समारोह, अंतिम दफन मशहद में
अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उनका अंतिम दफन कोम में नहीं, बल्कि मशहद में प्रस्तावित है।
तेहरान की अंतिम यात्रा के बाद उनका पार्थिव शरीर अन्य निर्धारित धार्मिक कार्यक्रमों के लिए ले जाया जाएगा। कोम में भी एक सार्वजनिक और धार्मिक विदाई कार्यक्रम निर्धारित है, लेकिन इसके बाद अंतिम संस्कार यात्रा मशहद पहुंचेगी।
ईरानी अधिकारियों और सरकारी मीडिया के अनुसार, अली खामेनेई को अंततः मशहद स्थित पवित्र इमाम रजा दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने का कार्यक्रम है।
कई दिनों तक चलेगा अंतिम संस्कार कार्यक्रम
अली खामेनेई की अंतिम विदाई को एक दिन के समारोह तक सीमित नहीं रखा गया है। कई दिनों तक अलग-अलग शहरों और धार्मिक केंद्रों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
तेहरान के बाद कोम और फिर मशहद में प्रमुख कार्यक्रम निर्धारित हैं। अंतिम संस्कार से जुड़े कुछ धार्मिक आयोजन इराक के प्रमुख शिया धार्मिक शहरों तक भी विस्तारित किए जाने की रिपोर्ट है। यह लंबा कार्यक्रम ईरान के लिए राजनीतिक, धार्मिक और प्रतीकात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी पर भी नजर
अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी चर्चा में है।
ईरानी अधिकारियों और सरकारी मीडिया के अलग-अलग बयानों में विदेशी भागीदारी की संख्या अलग बताई गई है। कुछ रिपोर्टों में 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी का उल्लेख किया गया, जबकि इससे पहले ईरानी सरकारी प्रसारक के हवाले से 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के आने की उम्मीद जताई गई थी। इसलिए विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की अंतिम संख्या को लेकर विभिन्न रिपोर्टों में अंतर है।
चीन समेत कई देशों ने वरिष्ठ प्रतिनिधियों को भेजा। पश्चिमी देशों की भागीदारी अपेक्षाकृत सीमित रही।
13 देशों के पीछे हटने का दावा, स्वतंत्र पुष्टि सीमित
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि अमेरिकी कूटनीतिक दबाव के बाद कम से कम 13 देशों ने या तो अंतिम संस्कार से दूरी बनाई या अपने प्रतिनिधिमंडल का स्तर कम किया।
हालांकि यह दावा मुख्य रूप से ईरानी मीडिया रिपोर्टों के आधार पर सामने आया है और इसकी स्वतंत्र, विस्तृत पुष्टि सीमित है। इसलिए इसे आधिकारिक रूप से प्रमाणित तथ्य के बजाय मीडिया रिपोर्टों में किया गया दावा माना जाना चाहिए।
मुजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी ने बढ़ाए सवाल
पूरी अंतिम यात्रा में सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल मौजूदा सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति को लेकर बना हुआ है।
अली खामेनेई के तीन अन्य बेटों की सार्वजनिक उपस्थिति और शीर्ष ईरानी नेताओं की मौजूदगी के बावजूद मुजतबा का दिखाई न देना अंतरराष्ट्रीय मीडिया का प्रमुख विषय बना है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उनके गंभीर रूप से घायल होने की खबरें पहले सामने आई थीं। वहीं अन्य रिपोर्टों में कहा गया है कि सुरक्षा कारणों के चलते वह सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर हैं। ईरानी नेतृत्व की ओर से उनकी सार्वजनिक स्थिति के बारे में सीमित जानकारी ने अटकलों को और बढ़ाया है।
शोक के साथ राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी
अली खामेनेई की विशाल अंतिम यात्रा को केवल एक धार्मिक और शोक कार्यक्रम के रूप में ही नहीं देखा जा रहा।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, इतनी बड़ी सार्वजनिक भीड़ और व्यापक आयोजन के जरिए ईरान अपने विरोधियों के सामने राष्ट्रीय एकता और राजनीतिक स्थिरता का संदेश भी देने की कोशिश कर रहा है। यह एक विश्लेषण है, जिसे अंतिम संस्कार के विशाल पैमाने, सरकारी तैयारियों और राजनीतिक नारों से समर्थन मिलता है।
अमेरिका और इजरायल विरोधी नारों, प्रतिरोध के संदेशों और लाल झंडों ने इस अंतिम विदाई को ईरान के मौजूदा भू-राजनीतिक संघर्ष से भी जोड़ दिया है।
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