उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में कथित अवैध धर्मांतरण का मामला सामने आया है। मंसूरपुर थाना क्षेत्र के जड़ौदा गांव स्थित एक गोदाम में आयोजित प्रार्थना सभा को लेकर शिकायत मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने वहां से पांच महिलाओं समेत 12 लोगों को पकड़ा, जबकि गोदाम मालिक समेत कुल 14 लोगों के खिलाफ उत्तर प्रदेश के धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
आरोप है कि प्रार्थना सभा की आड़ में ग्रामीणों को पैसे, बीमारी के इलाज, मकान और अन्य सुविधाओं का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। बजरंग दल के जिला संयोजक रवि चौधरी ने दावा किया कि आयोजन में करीब 200 लोग मौजूद थे और कुछ लोगों को ₹50 हजार से ₹60 हजार तक देने की बात कही जा रही थी। हालांकि ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और पुलिस जांच में इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
जड़ौदा गांव के गोदाम में चल रही थी प्रार्थना सभा
मामला मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर थाना क्षेत्र के जड़ौदा गांव का है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रविवार को एक गोदाम में टेंट लगाकर प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी।
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को इसकी जानकारी मिली तो वे मौके पर पहुंचे और कथित धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद मिशन शक्ति और स्थानीय पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची।
पुलिस के पहुंचने के बाद मौके पर मौजूद लोगों को घेरा गया। अमर उजाला के मुताबिक, इस दौरान पुलिस को विरोध का भी सामना करना पड़ा। बाद में पुलिस ने पांच महिलाओं और सात पुरुषों समेत कुल 12 लोगों को पकड़ा।
12 लोग पकड़े गए, 14 के खिलाफ FIR
सीओ खतौली रुपाली राय के मुताबिक, मौके से पांच महिलाओं समेत कुल 12 लोगों को पकड़ा गया। शिकायत के आधार पर राशिद समेत 14 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, मामला उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5 के तहत दर्ज किया गया है। कुछ रिपोर्टों में धारा 5(1) का विशेष उल्लेख किया गया है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रार्थना सभा का वास्तविक उद्देश्य क्या था, कितने लोग वहां मौजूद थे और क्या किसी व्यक्ति को वास्तव में प्रलोभन या अन्य अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया गया था।
मुख्य आरोपी के रूप में राशिद का नाम
शिकायत में सुजडू गांव निवासी राशिद को कथित गतिविधियों का प्रमुख आरोपी बताया गया है।
आरोप है कि जड़ौदा गांव में राशिद के गोदाम में प्रार्थना सभा आयोजित की गई और आसपास के गांवों से लोगों को वहां बुलाया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि राशिद और उसके साथी ग्रामीणों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर धर्म बदलने के लिए प्रेरित कर रहे थे।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर राशिद समेत अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। सभी आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
₹50-60 हजार देने का आरोप
बजरंग दल के जिला संयोजक रवि चौधरी ने आरोप लगाया कि लोगों को धर्म परिवर्तन के बदले किसी को ₹50 हजार और किसी को ₹60 हजार तक देने की बात कही जा रही थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीमारी का इलाज कराने और अन्य आर्थिक सहायता का आश्वासन देकर लोगों को प्रभावित किया जा रहा था।
यह दावा शिकायतकर्ता का है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस को ऐसी नकद रकम, बैंकिंग रिकॉर्ड या अन्य वित्तीय दस्तावेज मिले हैं या नहीं। इसलिए ₹50-60 हजार देने के दावे को जांच पूरी होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मुफ्त इलाज, मकान और शादी के पैसे का भी आरोप
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत में कई तरह के कथित प्रलोभनों का जिक्र किया गया है।
आरोप है कि लोगों को:
बीमारी का मुफ्त इलाज कराने,
मकान बनवाने,
शादी के लिए आर्थिक मदद देने
और अन्य सुविधाएं दिलाने का आश्वासन दिया जाता था।
पुलिस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना होगा कि क्या वास्तव में किसी व्यक्ति को इस तरह की सहायता दी गई, उसका वादा किया गया या केवल धार्मिक सभा आयोजित की जा रही थी।
प्रार्थना सभा में 200 लोग होने का दावा
शिकायतकर्ता रवि चौधरी ने दावा किया कि प्रार्थना सभा में करीब 200 लोग मौजूद थे।
उनका कहना है कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को कथित धर्मांतरण की सूचना मिलने के बाद वे मौके पर पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस को जानकारी दी गई।
हालांकि पुलिस की उपलब्ध रिपोर्ट में मौके पर मौजूद कुल लोगों की आधिकारिक संख्या स्पष्ट नहीं की गई है। इसलिए 200 लोगों की संख्या भी शिकायतकर्ता के दावे के रूप में ही प्रस्तुत की जानी चाहिए।
पुलिस ने क्या कहा?
मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि मंसूरपुर क्षेत्र के जड़ौदा गांव में टेंट लगाकर ऐसी गतिविधि होने की सूचना मिली थी, जो अवैध प्रतीत हो रही थी।
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, एसएसपी ने कहा कि पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद कुछ लोगों को प्रलोभन देकर ईसाई धर्म में परिवर्तित किए जाने की बात सामने आई और जांच में कई नाम प्रकाश में आए हैं। पुलिस ने सख्त कार्रवाई की बात कही है।
वहीं सीओ खतौली रुपाली राय ने 12 लोगों को पकड़े जाने और 14 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने की पुष्टि की।
मौके से क्या-क्या मिला?
अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में बरामद सामान को लेकर कुछ अंतर है।
आजतक की रिपोर्ट में मौके से तीन बाइबल और कुछ पहचान पत्र मिलने की बात कही गई है।
अमर उजाला की विस्तृत रिपोर्ट में पुलिस द्वारा छह मोबाइल फोन, तीन धार्मिक पुस्तकें और तीन डायरियां बरामद करने का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने इन वस्तुओं की जांच शुरू कर दी है।
जांच एजेंसी के लिए मोबाइल फोन और डायरियां महत्वपूर्ण हो सकती हैं, क्योंकि इनके जरिए संपर्कों, आयोजनों और वित्तीय गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलने की संभावना रहती है।
14 आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला
मीडिया रिपोर्टों में 14 नामजद आरोपियों की सूची सामने आई है।
इनमें राशिद, संजीव, संगीता, पूजा, मोनू, आशु, चांदनी, सरिता, अमरीश, कार्तिक, कनक, शीशपाल और प्रवीण के नाम शामिल हैं। एक अन्य आरोपी के नाम को लेकर रिपोर्टों में अंतर है—आजतक ने ‘मनीष’, जबकि अमर उजाला ने ‘मोनिश’ लिखा है।
इसलिए FIR की मूल प्रति उपलब्ध होने तक इस नाम की वर्तनी को अंतिम रूप से तय करना उचित नहीं होगा।
पांच महिलाओं को वन स्टॉप सेंटर भेजा गया
अमर उजाला के अनुसार, मौके से पकड़ी गई पांच महिलाओं को वन स्टॉप सेंटर भेजा गया था। पुलिस ने अन्य पकड़े गए लोगों के खिलाफ भी आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की। रिपोर्ट में कुल 12 आरोपियों की गिरफ्तारी और दो अन्य की तलाश का उल्लेख है।
क्या है ‘क्रिप्टो-क्रिश्चियन’ शब्द?
इस मामले को कुछ मीडिया रिपोर्टों में ‘क्रिप्टो-क्रिश्चियन’ या ‘गुप्त ईसाई’ गतिविधि कहा गया है।
यह पुलिस कानून की कोई अलग अपराध श्रेणी नहीं है। आम तौर पर इस शब्द का इस्तेमाल ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाता है, जो सार्वजनिक रूप से एक धार्मिक पहचान बनाए रखे लेकिन निजी रूप से ईसाई आस्था का पालन करे।
इस मामले में यह शब्द मुख्य रूप से मीडिया रिपोर्टों और शुरुआती जांच के संदर्भ में इस्तेमाल हुआ है। किसी व्यक्ति की निजी धार्मिक आस्था अपने आप में अपराध नहीं है; पुलिस केस का केंद्र कथित तौर पर प्रलोभन, कपट या अन्य अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन कराने के आरोप हैं।
कानून क्या कहता है?
मामले में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, धारा 3 और 5 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस जांच यह तय करेगी कि क्या आरोपियों ने कानून में प्रतिबंधित किसी माध्यम—जैसे कथित प्रलोभन या कपट—का इस्तेमाल किया था।
सिर्फ प्रार्थना सभा आयोजित करना या धार्मिक पुस्तक रखना अपने आप में इस मामले में आरोपों की पुष्टि नहीं करता। पुलिस को यह स्थापित करना होगा कि कथित गैरकानूनी धर्म परिवर्तन के लिए कानून में प्रतिबंधित तरीका इस्तेमाल किया गया था।
चर्च निर्माण की बात का भी दावा
बजरंग दल पदाधिकारी ने दावा किया कि मुख्य आरोपी राशिद की ओर से इलाके में चर्च बनाने की बात भी कही जा रही थी।
यह दावा भी शिकायतकर्ता की ओर से सामने आया है। पुलिस ने अभी तक चर्च निर्माण से जुड़े भूमि रिकॉर्ड, निर्माण अनुमति या फंडिंग के बारे में कोई विस्तृत सार्वजनिक जानकारी जारी नहीं की है।
पुलिस के सामने कई बड़े सवाल
इस पूरे मामले में जांच के सामने कई अहम सवाल हैं:
क्या लोगों को वास्तव में ₹50-60 हजार देने का वादा किया गया था?
क्या मुफ्त इलाज, मकान या शादी के लिए आर्थिक मदद धर्म परिवर्तन की शर्त पर दी जा रही थी?
प्रार्थना सभा में कितने लोग मौजूद थे?
बरामद मोबाइल फोन और डायरियों में क्या जानकारी है?
क्या इस आयोजन के पीछे कोई बड़ा संगठन या फंडिंग नेटवर्क था?
क्या किसी व्यक्ति ने पुलिस के सामने यह बयान दिया है कि उसका अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन कराया गया?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही अधिक स्पष्ट होंगे।
धार्मिक स्वतंत्रता और अवैध धर्मांतरण में फर्क
भारत में किसी व्यक्ति को अपनी इच्छा से धार्मिक आस्था चुनने का अधिकार है। इस मामले में विवाद का केंद्र किसी व्यक्ति का स्वेच्छा से धर्म बदलना नहीं, बल्कि यह आरोप है कि कथित तौर पर आर्थिक लालच और अन्य प्रलोभनों का इस्तेमाल किया गया।
यही कारण है कि न केवल आरोपियों की भूमिका, बल्कि शिकायतकर्ताओं के दावों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है। पुलिस की जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने से पहले सभी नामजद लोग आरोपी हैं, दोषी नहीं।
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