उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार, 6 जुलाई 2026 को लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक में निवेश, रोजगार, स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा, पशुपालन और ग्रामीण विकास से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए। रिपोर्टों के मुताबिक बैठक में कुल 29 प्रस्ताव रखे गए, जिनमें से 28 को मंजूरी मिली, जबकि मदरसा नीति से जुड़ा एक प्रस्ताव फिलहाल टाल दिया गया।
कैबिनेट के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026, उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026, यूपी स्टार्टअप मिशन, मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना, तीन निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, तीन स्तरीय पंचायतों के लिए ₹14,988.50 करोड़ की वित्तीय व्यवस्था और शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करना शामिल है।
योगी सरकार का दावा है कि नई नीतियां उत्तर प्रदेश को डिजिटल अर्थव्यवस्था, AI इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप और निवेश के क्षेत्र में देश के प्रमुख राज्यों में शामिल करने में मदद करेंगी।
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— Government of UP (@UPGovt) July 6, 2026
यूपी डेटा सेंटर नीति-2026 को हरी झंडी
योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी दे दी है। नई नीति का लक्ष्य प्रदेश को ग्रीन, AI-रेडी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना है।
सरकार ने नई नीति के तहत राज्य में 2 गीगावाट से अधिक अतिरिक्त डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने और ₹2 लाख करोड़ से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है।
नई नीति में केवल पारंपरिक डेटा स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही ध्यान नहीं होगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए जरूरी उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग सिस्टम, GPU आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल डेटा सेंटरों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
यूपी को AI-रेडी डेटा सेंटर हब बनाने की तैयारी
नई डेटा सेंटर नीति का सबसे बड़ा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है। सरकार प्रदेश में ऐसे डेटा सेंटर विकसित करना चाहती है, जो बड़े AI मॉडल, GPU आधारित कंप्यूटिंग और भविष्य की डिजिटल सेवाओं के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करा सकें।
नीति में AI Compute Booster Incentives, ग्रीन और सस्टेनेबल ऑपरेशन से जुड़े प्रोत्साहन तथा Tier-3 और Tier-4 श्रेणी के डेटा सेंटरों के लिए विशेष सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। बुंदेलखंड और पूर्वांचल में निवेश करने वाले प्रोजेक्ट्स को भी अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की योजना है।
इसके अलावा 500 मेगावाट से अधिक क्षमता वाले बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स के लिए सरकार उनकी रणनीतिक अहमियत, निवेश और रोजगार क्षमता के आधार पर विशेष कस्टमाइज्ड पैकेज भी दे सकेगी।
₹2 लाख करोड़ का निवेश, हजारों रोजगार की उम्मीद
नई डेटा सेंटर नीति से उत्तर प्रदेश सरकार ने ₹2 लाख करोड़ से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य तय किया है।
सरकारी अनुमानों के मुताबिक नीति के लागू होने से करीब 7,500 लोगों को दीर्घकालिक प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है। वहीं डेटा सेंटरों के निर्माण के दौरान लगभग 50,000 लोगों को अल्पकालिक प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।
डेटा सेंटरों के आसपास IT, इंजीनियरिंग, नेटवर्किंग, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग, बिजली प्रबंधन और दूसरी तकनीकी सेवाओं से जुड़ी इकाइयां विकसित होने की उम्मीद है। इससे अप्रत्यक्ष रोजगार के अतिरिक्त अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
पुरानी डेटा सेंटर नीति के सात प्रोजेक्ट हो चुके हैं चालू
उत्तर प्रदेश सरकार ने पहली डेटा सेंटर नीति जनवरी 2021 में लागू की थी, जिसमें नवंबर 2022 में संशोधन किया गया था। सरकार के मुताबिक पुरानी नीति के तहत छह डेटा सेंटर पार्क और दो अलग डेटा सेंटर इकाइयों से जुड़े लगभग ₹21,343 करोड़ के प्रोजेक्ट्स मंजूर हुए थे। इनमें से सात प्रोजेक्ट चालू हो चुके हैं।
नई नीति के जरिए सरकार अब डेटा सेंटर क्षेत्र में और बड़े निवेश, नई तकनीक और AI आधारित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आकर्षित करना चाहती है।
स्टार्टअप्स के लिए ₹1000 करोड़ का बड़ा फंड
योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 को भी मंजूरी दी है। नई नीति के तहत राज्य में स्टार्टअप्स को पूंजी उपलब्ध कराने के लिए ₹1,000 करोड़ का स्टार्टअप फंड बनाने का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी यानी AKTU के इनोवेशन हब के लिए ₹400 करोड़ का कॉर्पस प्रस्तावित किया गया है। नई स्टार्टअप नीति का उद्देश्य शुरुआती चरण से लेकर बड़े स्तर पर विस्तार करने तक स्टार्टअप्स को वित्तीय, तकनीकी और संस्थागत सहायता उपलब्ध कराना है।
यूपी स्टार्टअप मिशन का गठन
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन के गठन को मंजूरी दी है। यह मिशन एक स्वायत्त सोसायटी के रूप में राज्य में स्टार्टअप और इनोवेशन से जुड़ी योजनाओं की नोडल एजेंसी का काम करेगा।
मिशन के गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव होंगे। इसके तहत स्टार्टअप्स, इनक्यूबेटर्स, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, निवेशकों, उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाएगा।
अब तक स्टार्टअप से जुड़ी गतिविधियां यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन के माध्यम से संचालित होती थीं। नई व्यवस्था में स्टार्टअप मिशन के पास अपना संस्थागत ढांचा, अधिकारी और कर्मचारी होंगे।
स्टार्टअप्स को ₹50 लाख तक सहायता का रास्ता
नई स्टार्टअप नीति में वित्तीय सहायता की सीमा बढ़ाई गई है। स्टार्टअप्स को सामान्य परिस्थितियों में ₹15 लाख तक सीड कैपिटल सहायता मिल सकेगी, जबकि विशेष मामलों में यह सहायता ₹50 लाख तक हो सकती है।
प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए अधिकतम ₹10 लाख तक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। क्लाउड सेवाओं के खर्च की भरपाई के लिए सालाना ₹2 लाख तक की सहायता भी प्रस्तावित है।
दीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए प्रोटोटाइप सहायता ₹20 लाख, सीड फंडिंग ₹30 लाख और कुछ स्थितियों में बड़े स्तर पर पेशेंट कैपिटल सहायता के प्रावधान भी नई नीति में शामिल हैं। महिलाओं, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और ट्रांसजेंडर उद्यमियों द्वारा स्थापित पात्र स्टार्टअप्स को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की व्यवस्था भी की गई है।
इनक्यूबेटर्स और रिसर्च पर भी जोर
सरकार का फोकस केवल फंड उपलब्ध कराने पर नहीं है। नई नीति में विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और निजी क्षेत्र के साथ मिलकर स्टार्टअप इनक्यूबेशन नेटवर्क को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से वित्तीय सहायता पाने वाले पात्र स्टार्टअप्स को अधिकतम ₹5 करोड़ तक मैचिंग ग्रांट मिलने का प्रावधान है। नई नीति में R&D, पेटेंट, क्वालिटी सर्टिफिकेशन और नई तकनीक विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहन शामिल हैं।
सरकार का लक्ष्य स्टार्टअप्स को राज्य के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट यानी ODOP कार्यक्रम से जोड़ने और निवेशकों का बड़ा नेटवर्क तैयार करने का भी है।
पशुपालकों के लिए मुख्यमंत्री जोखिम पशुधन बीमा योजना
योगी कैबिनेट ने किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों के लिए मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को मंजूरी दी है।
योजना को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू किया जाएगा। इसके तहत पशु की बीमारी, महामारी, प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना में मौत होने पर पात्र पशुपालक बीमा का दावा कर सकेंगे। स्थायी रूप से काम करने में अक्षम हुए पशु के मामले में भी बीमा सहायता का प्रावधान है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए योजना में ₹60 करोड़ का बजट प्रावधान मंजूर किया गया है। इसके जरिए राज्य में लगभग 2,28,350 पशुओं का बीमा करने का लक्ष्य है।
किसान देगा केवल 15 प्रतिशत प्रीमियम
पशुधन बीमा योजना में किसान या पशुपालक को बीमा प्रीमियम का केवल 15 प्रतिशत हिस्सा देना होगा। शेष 85 प्रतिशत प्रीमियम सरकारी हिस्सेदारी से वहन किया जाएगा। उपलब्ध विवरणों के मुताबिक केंद्र सरकार प्रीमियम का 51 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश सरकार 34 प्रतिशत हिस्सा देगी। शेष 15 प्रतिशत पशुपालक देगा।
योजना से छोटे और सीमांत किसान, भूमिहीन पशुपालक तथा डेयरी व्यवसाय से जुड़े पात्र लोगों को आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
पशु की मौत पर सीधे खाते में मिलेगी बीमा राशि
योजना के अनुसार पात्र बीमा दावा मंजूर होने के बाद राशि सीधे पशुपालक के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
पशु की मृत्यु, महामारी, प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना जैसी परिस्थितियों में बीमा दावा किया जा सकेगा। स्थायी दिव्यांगता या काम करने में असमर्थता के मामले में बीमा राशि का 75 प्रतिशत तक दावा किया जा सकेगा।
सरकार का कहना है कि इससे पशु की अचानक मौत के कारण छोटे किसानों और डेयरी संचालकों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा।
उत्तर प्रदेश में खुलेंगे तीन नए निजी विश्वविद्यालय
योगी कैबिनेट ने राज्य में तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को भी मंजूरी दी है।
इनमें कानपुर के बिल्हौर में महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, गाजियाबाद में अजय कुमार गर्ग यूनिवर्सिटी और फतेहपुर में ठाकुर युगराज सिंह यूनिवर्सिटी शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि इन विश्वविद्यालयों से कृषि, तकनीकी शिक्षा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे।
रायबरेली में खुलेगा नया हॉर्टिकल्चर कॉलेज
कैबिनेट ने रायबरेली में एक नए हॉर्टिकल्चर कॉलेज और रिसर्च सेंटर की स्थापना का रास्ता भी साफ किया है।
यह कॉलेज चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा। परियोजना के लिए भूमि हस्तांतरण और करीब ₹50 करोड़ की अनुमानित लागत का प्रावधान सामने आया है। इस फैसले से बागवानी शिक्षा, रिसर्च और आधुनिक कृषि तकनीकों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जलालाबाद का नया नाम ‘परशुरामपुरी’
योगी कैबिनेट ने शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
जलालाबाद नगर पालिका परिषद का नाम भी बदलकर परशुरामपुरी नगर पालिका परिषद किया जाएगा।
सरकार के मुताबिक स्थानीय स्तर पर लंबे समय से नाम बदलने की मांग की जा रही थी। जलालाबाद क्षेत्र को भगवान परशुराम की जन्मभूमि मानने की मान्यता के आधार पर नया नाम परशुरामपुरी रखा गया है। नाम बदलने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार को 24 अप्रैल 2025 को मिला था। इसके बाद केंद्र सरकार से अनुमति मांगी गई और अगस्त 2025 में केंद्र से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी।
तीन स्तरीय पंचायतों के लिए ₹14,988.50 करोड़ मंजूर
कैबिनेट ने वित्त वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश की तीन स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के लिए ₹14,988.50 करोड़ की वित्तीय व्यवस्था को भी मंजूरी दी है। यह राशि राज्य वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर की जरूरतों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।
कुल राशि का करीब 10 प्रतिशत यानी लगभग ₹1,498 करोड़ प्रशासनिक, संचालन और रखरखाव से जुड़े खर्चों पर इस्तेमाल किया जाएगा। पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय और बैठक भत्तों के लिए लगभग ₹495.89 करोड़ खर्च किए जाने का प्रावधान भी है।
इस वित्तीय व्यवस्था का उद्देश्य पंचायत स्तर पर विकास कार्यों, प्रशासनिक आवश्यकताओं और ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है।
होमगार्ड्स को भी बड़ी राहत
कैबिनेट के अन्य फैसलों में उत्तर प्रदेश के लगभग 69,000 होमगार्ड स्वयंसेवकों और उनके आश्रितों को ₹5 लाख तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है।
इसके अलावा गोरखपुर और मुरादाबाद में अस्पतालों तथा वाराणसी में ESIC मेडिकल कॉलेज की स्थापना से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है।
मदरसा से जुड़ा प्रस्ताव फिलहाल टला
रिपोर्टों के अनुसार कैबिनेट बैठक में कुल 29 प्रस्ताव रखे गए थे। इनमें 28 को मंजूरी मिली, जबकि मदरसा नीति से जुड़ा एक प्रस्ताव फिलहाल स्थगित कर दिया गया। इस प्रस्ताव पर सरकार की ओर से आगे क्या निर्णय लिया जाएगा, इस बारे में विस्तृत जानकारी का इंतजार है।
निवेश से गांव तक, योगी कैबिनेट के बड़े फैसले
6 जुलाई 2026 की कैबिनेट बैठक के फैसलों में एक ओर ₹2 लाख करोड़ से अधिक के संभावित निवेश वाली डेटा सेंटर नीति और ₹1,000 करोड़ का स्टार्टअप फंड है, तो दूसरी ओर पशुपालकों के लिए बीमा योजना और पंचायतों के लिए ₹14,988.50 करोड़ का प्रावधान है।
नई नीतियां उत्तर प्रदेश को AI, डेटा सेंटर, इनोवेशन और स्टार्टअप के क्षेत्र में बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में सरकार की रणनीति को दर्शाती हैं। साथ ही विश्वविद्यालयों, पंचायतों, पशुपालकों और होमगार्ड्स से जुड़े फैसलों के जरिए अलग-अलग वर्गों को साधने की कोशिश भी नजर आती है।
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