जयपुर पुलिस ने एक कथित सड़क हादसे की जांच करते हुए हत्या की ऐसी साजिश का खुलासा करने का दावा किया है, जिसने पूरे शहर को चौंका दिया। पुलिस के अनुसार, 45 वर्षीय नीरज शर्मा की मौत कोई सामान्य दुर्घटना नहीं थी, बल्कि उन्हें योजनाबद्ध तरीके से तेज रफ्तार स्कॉर्पियो से कुचलवाया गया था।
पुलिस जांच में आरोप सामने आया है कि इस कथित हत्या की साजिश नीरज की 24 वर्षीय बेटी आयुषी ने अपने कुछ रिश्तेदारों और सुपारी किलर्स के साथ मिलकर रची थी। पुलिस का दावा है कि हत्या के लिए लगभग 7 लाख रुपए की सुपारी तय की गई थी।
मामले की जांच CCTV फुटेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, संदिग्धों की गतिविधियों और पारिवारिक विवादों के आधार पर आगे बढ़ी। शुरुआत में घटना को सड़क हादसा मानने की कोशिश हुई, लेकिन पुलिस को मिले तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने जांच की दिशा बदल दी।
3 जुलाई को हुई थी नीरज शर्मा की मौत
घटना 3 जुलाई की बताई जा रही है। प्रताप नगर इलाके में रहने वाली नीरज शर्मा अपने बेटे को डॉक्टर के पास लेकर गई थीं। लौटते समय एक तेज रफ्तार सफेद स्कॉर्पियो ने उन्हें टक्कर मार दी। पुलिस के अनुसार, नीरज सड़क के किनारे चल रही थीं और सड़क काफी चौड़ी तथा अपेक्षाकृत खाली थी। इसके बावजूद वाहन ने सीधे उनकी ओर बढ़कर टक्कर मारी।
टक्कर इतनी तेज थी कि नीरज गंभीर रूप से घायल हो गईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
CCTV फुटेज ने बदल दी जांच की दिशा
शुरुआत में घटना को सामान्य एक्सीडेंट बताया गया, लेकिन नीरज के भाई ने पुलिस के सामने संदेह जताया।
इसके बाद पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच अधिकारियों के अनुसार, वीडियो में दिखाई दिया कि नीरज सड़क के बिल्कुल किनारे चल रही थीं और वाहन ने सामान्य तरीके से नियंत्रण खोकर नहीं, बल्कि कथित तौर पर जानबूझकर उनकी तरफ मोड़ लेकर टक्कर मारी। यहीं से पुलिस का शक गहराया और दुर्घटना की जांच हत्या की साजिश की दिशा में आगे बढ़ी।
DCP ईस्ट ने बताया- मामला लालच से जुड़ा
DCP ईस्ट रंजीता शर्मा के अनुसार, जांच में संपत्ति और अनुकंपा नौकरी से जुड़ा विवाद महत्वपूर्ण कारण के रूप में सामने आया।
पुलिस के मुताबिक, नीरज शर्मा के पति कोर्ट में LDC के पद पर कार्यरत थे। करीब एक साल पहले उनके निधन के बाद नीरज को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी मिली थी। नीरज का एक 16 वर्षीय बेटा भी है, जिसे परिवार की विशेष देखभाल की जरूरत बताई गई है।
पुलिस का आरोप है कि नीरज की बेटी आयुषी स्वयं अनुकंपा नौकरी पाना चाहती थी और माँ को नौकरी मिलने के बाद वह नाराज हो गई थी।
करोड़ों की संपत्ति भी बनी साजिश की वजह?
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि परिवार के पास जयपुर में दो मकानों के अलावा आगरा रोड और भरतपुर क्षेत्र में करोड़ों रुपए की जमीन है। पुलिस का दावा है कि आयुषी की नजर इस संपत्ति पर भी थी। जांच अधिकारियों के अनुसार, संपत्ति का मूल्य लगभग 10 करोड़ रुपए तक बताया जा रहा है।
इसी कथित लालच और पारिवारिक विवाद ने हत्या की साजिश का रूप लिया, ऐसा पुलिस का दावा है।
ताऊ और चचेरे भाई के साथ योजना बनाने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, आयुषी ने अपने ताऊ मोहन स्वरूप और चचेरे भाई बलराम के साथ मिलकर माँ को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। पुलिस का आरोप है कि आयुषी ने बलराम को कथित तौर पर यह लालच दिया कि यदि वह साजिश में मदद करेगा तो उसे भरतपुर और आगरा रोड की जमीन का हिस्सा दिया जाएगा।
इसके बाद परिवार के सदस्यों ने कथित तौर पर बाहर के बदमाशों से संपर्क साधा।
7 लाख रुपए में हत्या की सुपारी तय होने का दावा
पुलिस के अनुसार, मोहन स्वरूप ने भरतपुर निवासी हेमंत शर्मा नामक व्यक्ति से संपर्क किया। आरोप है कि नीरज शर्मा की हत्या के लिए करीब 7 लाख रुपए की सुपारी तय हुई। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि रकम का भुगतान किस तरह हुआ, किसने किससे संपर्क किया और पूरी साजिश में किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी।
पहली कोशिश में थार से कुचलने का प्रयास
जांच में पुलिस को जानकारी मिली कि नीरज को पहले भी वाहन से कुचलने की कोशिश की गई थी। पुलिस के अनुसार, कथित साजिशकर्ताओं ने इससे पहले एक थार वाहन का इस्तेमाल कर नीरज को टक्कर मारने की कोशिश की, लेकिन योजना सफल नहीं हुई। इस घटना के बाद नीरज को शक होने लगा था और उन्होंने घर से बाहर निकलना कम कर दिया था।
घर के बाहर नींबू-मिर्च और लाल रंग डालने का आरोप
पुलिस जांच में एक और चौंकाने वाला आरोप सामने आया है। आरोप है कि नीरज को मानसिक रूप से परेशान करने और उन्हें घर से बाहर निकलने पर मजबूर करने के लिए घर के बाहर नींबू-मिर्च और लाल रंग जैसी वस्तुएँ डाली जाती थीं।
नीरज कथित तौर पर इससे डर गई थीं और उन्होंने अपने घर में CCTV कैमरे लगवा लिए थे। पुलिस इन घटनाओं को भी हत्या की तैयारी और दबाव बनाने की कथित साजिश से जोड़कर देख रही है।
बेटी ने फोन कर माँ को वापस बुलाया
पुलिस के अनुसार, 3 जुलाई को जब नीरज अपने बेटे को डॉक्टर के पास लेकर गई थीं, तब बेटी आयुषी ने उन्हें फोन किया। आरोप है कि किसी जरूरी काम का बहाना बनाकर नीरज को जल्दी घर वापस आने के लिए कहा गया। पुलिस का दावा है कि इसी दौरान साजिश में शामिल आरोपी पहले से रास्ते की रेकी कर रहे थे।
रेकी करने वालों ने स्कॉर्पियो ड्राइवर को दिया इशारा
पुलिस जांच के मुताबिक, जब नीरज निर्धारित स्थान के पास पहुँचीं, तब वहाँ मौजूद कथित रेकी करने वालों ने स्कॉर्पियो चालक को संकेत दिया। इसके बाद वाहन तेजी से नीरज की तरफ बढ़ा और उन्हें टक्कर मार दी। पुलिस का दावा है कि घटना दुर्घटना नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित हमला था।
130 किलोमीटर की रफ्तार का दावा
जांच अधिकारियों के अनुसार, वाहन बहुत तेज रफ्तार में था। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में स्कॉर्पियो की गति करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटा होने की बात कही है। टक्कर की तीव्रता इतनी अधिक थी कि नीरज काफी दूर जाकर गिरीं।
फॉरेंसिक जांच और वाहन परीक्षण से वास्तविक गति तथा टक्कर के तकनीकी विवरण की पुष्टि की जा रही है।
वारदात के बाद स्कॉर्पियो छोड़कर फरार हुए आरोपी
पुलिस के अनुसार, टक्कर मारने के बाद आरोपी कुछ दूरी पर स्कॉर्पियो छोड़कर बाइक से फरार हो गए। वाहन को बरामद कर लिया गया है और उसकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस वाहन के मालिक, चालक और उसके इस्तेमाल से जुड़े सभी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
माँ की मौत के बाद रोने का नाटक करने का आरोप
पुलिस का दावा है कि नीरज की मौत के बाद बेटी आयुषी ने अपने मामा राकेश को फोन किया और घटना को एक्सीडेंट बताते हुए रोने लगी। हालांकि परिवार के कुछ लोगों को पहले से ही आयुषी और ससुराल पक्ष के व्यवहार पर संदेह था। नीरज ने कथित तौर पर पहले अपने भाई को बताया था कि परिवार के कुछ लोग उन्हें परेशान कर रहे हैं।
मामा की शिकायत से खुली साजिश
नीरज के भाई ने पुलिस को बताया कि उसे घटना सामान्य दुर्घटना नहीं लग रही। इसके बाद पुलिस ने CCTV रिकॉर्डिंग, मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन डेटा और संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों का विश्लेषण शुरू किया। जांच में कथित तौर पर कई ऐसे संपर्क सामने आए जो घटना से पहले और बाद में हुए थे।
इसके बाद एक-एक कर आरोपियों की भूमिका सामने आने का दावा किया गया।
बेटी समेत कई आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में आयुषी, उसके ताऊ और कथित सुपारी किलर्स समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी अब साजिश में शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका, पैसे के लेनदेन, वाहन की व्यवस्था और घटना से पहले की तैयारी का पूरा ब्योरा जुटा रही है।
मामले में कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी और एक आरोपी के फरार होने से संबंधित जानकारी में अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसलिए पुलिस की अंतिम आधिकारिक गिरफ्तारी सूची और प्रेस ब्रीफिंग के आधार पर संख्या को प्रकाशित करना अधिक सुरक्षित रहेगा।
हत्या को एक्सीडेंट दिखाने की साजिश
पुलिस का कहना है कि पूरे अपराध को सड़क हादसा दिखाने के लिए योजना बनाई गई थी। लेकिन CCTV फुटेज में वाहन का कथित रूप से जानबूझकर नीरज की ओर जाना, फोन रिकॉर्ड और परिवार के अंदर चल रहे विवादों ने साजिश को उजागर कर दिया।
इस मामले में पुलिस अब हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई आगे बढ़ा रही है।
अदालत में साक्ष्यों से तय होगा दोष
पुलिस ने भले ही बड़े षड्यंत्र का खुलासा करने का दावा किया हो, लेकिन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होगी। CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, वाहन की फॉरेंसिक रिपोर्ट, पैसों के लेनदेन और आरोपियों के बयान इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आरोपियों की दोषसिद्धि तय होगी।
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