चीन पृथ्वी को भविष्य में किसी खतरनाक क्षुद्रग्रह यानी एस्टेरॉयड की टक्कर से बचाने की तकनीक का परीक्षण करने की तैयारी कर रहा है। चीनी वैज्ञानिकों की प्रस्तावित योजना के तहत एक अंतरिक्ष यान को करीब 9 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से नियर-अर्थ एस्टेरॉयड से टकराया जाएगा। यह गति समुद्र तल पर ध्वनि की रफ्तार से लगभग 26 गुना और NASA के DART अंतरिक्ष यान की टक्कर की गति से करीब 50 प्रतिशत अधिक होगी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन को 2029 या 2030 के आसपास अंजाम देने की योजना पर अध्ययन किया जा रहा है। हालांकि फिलहाल यह योजना एक रिसर्च पेपर में सामने आई है और चीन की ओर से अंतिम लॉन्च तारीख की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
चीन के एस्टेरॉयड मिशन का मकसद क्या है?
इस प्रस्तावित मिशन का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि किसी संभावित खतरनाक एस्टेरॉयड को तेज रफ्तार अंतरिक्ष यान से टक्कर मारकर उसकी दिशा कितनी प्रभावी ढंग से बदली जा सकती है।
चीन नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े वैज्ञानिक ली मिंगताओ के नेतृत्व वाली टीम ऐसी ‘काइनेटिक इम्पैक्टर’ तकनीक पर काम कर रही है, जिसमें अंतरिक्ष यान की टक्कर से एस्टेरॉयड की गति और कक्षा में बदलाव किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिक यह भी अध्ययन करना चाहते हैं कि तेज टक्कर से एस्टेरॉयड की सतह, आंतरिक संरचना और मलबे के फैलाव पर क्या असर पड़ता है।
यह परीक्षण चीन की व्यापक प्लैनेटरी डिफेंस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। चीन अंतरिक्ष और जमीन पर आधारित दूरबीनों की मदद से पृथ्वी के करीब आने वाले एस्टेरॉयड का पता लगाने के लिए एक अर्ली-वॉर्निंग नेटवर्क विकसित करने की योजना भी बना रहा है।
2015 XF261 एस्टेरॉयड हो सकता है निशाने पर
प्रस्तावित मिशन के लिए ‘2015 XF261’ नाम के एक नियर-अर्थ एस्टेरॉयड को संभावित लक्ष्य बताया गया है। उपलब्ध अनुमानों के अनुसार इसका आकार करीब 30 मीटर हो सकता है, हालांकि इसके सटीक आकार, बनावट और घूमने की गति से संबंधित जानकारी अभी सीमित है।
योजना के मुताबिक 2029 या 2030 में जब यह एस्टेरॉयड पृथ्वी के लगभग 70 लाख किलोमीटर के दायरे से गुजरेगा, तब अंतरिक्ष यान को उससे टकराने का अवसर मिल सकता है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि स्पेसक्राफ्ट 9 किलोमीटर प्रति सेकंड से अधिक की गति से लक्ष्य तक पहुंचेगा।
ध्यान देने वाली बात यह है कि उपलब्ध जानकारी में 2015 XF261 को पृथ्वी से निश्चित रूप से टकराने वाला एस्टेरॉयड नहीं बताया गया है। इसका चयन सुरक्षित परिस्थितियों में प्लैनेटरी डिफेंस तकनीक का प्रदर्शन करने के उद्देश्य से किया जा सकता है।
एक लॉन्च में भेजे जाएंगे दो स्पेसक्राफ्ट
चीन की प्रस्तावित योजना की सबसे अहम विशेषता यह है कि इसमें एक ही अभियान के तहत दो अंतरिक्ष यान भेजे जा सकते हैं।
पहला स्पेसक्राफ्ट ‘इम्पैक्टर’ होगा, जिसका काम एस्टेरॉयड से सीधी टक्कर करना होगा। दूसरा स्पेसक्राफ्ट ‘ऑब्जर्वर’ की भूमिका निभाएगा और टक्कर से पहले तथा बाद में एस्टेरॉयड का अध्ययन करेगा।
ऑब्जर्वर स्पेसक्राफ्ट एस्टेरॉयड की सतह, कक्षा, गति, निकले हुए मलबे और संभावित संरचनात्मक बदलावों की तस्वीरें तथा वैज्ञानिक आंकड़े पृथ्वी पर भेजेगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि टक्कर के कारण एस्टेरॉयड की दिशा में कितना बदलाव आया।
चीन की पहले सामने आई प्लैनेटरी डिफेंस अवधारणा में भी एक ही लॉन्च के माध्यम से एस्टेरॉयड का निरीक्षण और उस पर काइनेटिक इम्पैक्ट करने की योजना का उल्लेख किया गया था।
NASA के DART मिशन से कितना अलग है चीन का प्लान?
NASA ने 26 सितंबर 2022 को DART यानी Double Asteroid Redirection Test मिशन के तहत अपने अंतरिक्ष यान को डिमॉर्फस नाम के छोटे एस्टेरॉयड से सफलतापूर्वक टकराया था। डिमॉर्फस बड़े एस्टेरॉयड डिडिमोस की परिक्रमा करने वाला एक छोटा ‘मूनलेट’ है।
DART अंतरिक्ष यान लगभग 6.145 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से डिमॉर्फस से टकराया था। इस टक्कर के बाद डिमॉर्फस की डिडिमोस के चारों ओर परिक्रमा की अवधि लगभग 32 मिनट कम हो गई थी। इससे साबित हुआ कि काइनेटिक इम्पैक्टर तकनीक से किसी एस्टेरॉयड की गति बदली जा सकती है।
चीन के प्रस्तावित अभियान और DART में प्रमुख अंतर इस प्रकार हैं:
ज्यादा टक्कर गति: चीन का स्पेसक्राफ्ट लगभग 9 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से टकरा सकता है, जबकि DART की गति करीब 6.1 किलोमीटर प्रति सेकंड थी।
स्वतंत्र एस्टेरॉयड लक्ष्य: DART ने एक बाइनरी एस्टेरॉयड सिस्टम के छोटे मूनलेट को निशाना बनाया था। चीन की योजना सूर्य की परिक्रमा करने वाले एक स्वतंत्र नियर-अर्थ एस्टेरॉयड पर परीक्षण करने की है।
इम्पैक्टर और ऑब्जर्वर एक साथ: चीन एक ही लॉन्च में टक्कर मारने वाला और निरीक्षण करने वाला यान भेज सकता है। DART के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन करने के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने अलग Hera मिशन तैयार किया है। Hera डिमॉर्फस की टक्कर के बाद की संरचना और प्रभावों का विस्तृत सर्वेक्षण करेगा।
क्या एस्टेरॉयड को तोड़ना सुरक्षित होगा?
किसी एस्टेरॉयड को पूरी तरह तोड़ना हमेशा सबसे सुरक्षित समाधान नहीं माना जाता। यदि किसी बड़े एस्टेरॉयड को पृथ्वी के बहुत करीब तोड़ा जाए तो उसके कई टुकड़े पृथ्वी के लिए अलग-अलग खतरे पैदा कर सकते हैं।
इसीलिए प्लैनेटरी डिफेंस मिशनों का प्राथमिक लक्ष्य आमतौर पर एस्टेरॉयड को नष्ट करना नहीं, बल्कि काफी पहले उसकी गति या कक्षा में मामूली बदलाव करना होता है। समय रहते किया गया छोटा-सा बदलाव भी वर्षों बाद एस्टेरॉयड को पृथ्वी से हजारों किलोमीटर दूर ले जा सकता है। DART मिशन ने काइनेटिक इम्पैक्टर तकनीक की इसी क्षमता का सफल प्रदर्शन किया था।
चीन का पहला ‘एंड-टू-एंड’ प्लैनेटरी डिफेंस टेस्ट
सफल होने पर यह चीन का पहला ऐसा पूर्ण प्लैनेटरी डिफेंस प्रदर्शन हो सकता है, जिसमें लक्ष्य की पहचान, उसका निरीक्षण, अंतरिक्ष यान की टक्कर और टक्कर के बाद परिणामों की पुष्टि एक ही अभियान में की जाएगी।
वैज्ञानिकों के सामने सबसे कठिन काम टक्कर के बाद एस्टेरॉयड की कक्षा में आए बेहद छोटे बदलाव को सटीक रूप से मापना होगा। टक्कर से निकलने वाला मलबा कुछ समय के लिए ऑब्जर्वेशन को मुश्किल बना सकता है। इसलिए ऑब्जर्वर यान को लंबे समय तक एस्टेरॉयड की निगरानी करनी पड़ सकती है।
चीन की यह योजना अभी अध्ययन और मिशन-डिजाइन के स्तर पर है, लेकिन यह स्पष्ट संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में अमेरिका, यूरोप और चीन के बीच प्लैनेटरी डिफेंस तकनीक विकसित करने की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
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