सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन सुरंग के प्रवेश द्वार पर हुए भीषण भूस्खलन के बाद कम से कम सात मजदूरों की मौत हो गई है, जबकि कई मजदूरों के अब भी सुरंग के भीतर फँसे होने की आशंका है। हादसा सोमवार, 20 जुलाई 2026 की दोपहर हुआ। शुरुआती रिपोर्टों में सुरंग के भीतर काम कर रहे करीब 27 मजदूरों के फँसने की जानकारी सामने आई थी।
यह सुरंग NHPC की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना से संबंधित बताई जा रही है। घटना के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF, राज्य आपदा मोचन बल, पुलिस, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं।
भूस्खलन के बाद बंद हुआ सुरंग का प्रवेश द्वार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरंग के भीतर निर्माण कार्य चल रहा था, तभी अचानक भूस्खलन हो गया। भारी मात्रा में मिट्टी और चट्टानें गिरने के कारण सुरंग का प्रवेश द्वार बंद हो गया। इससे अंदर मौजूद मजदूर बाहर नहीं निकल सके।
हादसे के बाद सुरंग के भीतर संदिग्ध गैस रिसाव की भी सूचना मिली। अँधेरा, ऑक्सीजन की कमी और गैस की मौजूदगी के कारण बचावकर्मियों को अंदर प्रवेश करने तथा मलबा हटाने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कितने मजदूर सुरंग में फँसे?
हादसे के तुरंत बाद प्रशासन ने शुरुआती जानकारी के आधार पर करीब 27 मजदूरों के सुरंग में फँसे होने की आशंका जताई थी। अधिकारियों द्वारा मजदूरों की उपस्थिति से जुड़े रिकॉर्ड की जाँच की जा रही है, इसलिए फँसे और सुरक्षित बाहर निकाले गए लोगों की संख्या में बदलाव हो सकता है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फँसे मजदूरों में परियोजना से जुड़ी निर्माण एजेंसी और NHPC के कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। मृत मजदूरों की आधिकारिक पहचान और उनके गृह राज्यों से संबंधित पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
अतिरिक्त रेस्क्यू टीमें और गैस रोधी उपकरण मँगाए गए
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल पर अतिरिक्त बचाव दल तैनात किए गए हैं। सुरंग में गैस की मौजूदगी के कारण विशेष मास्क, गैस डिटेक्टर, वेंटिलेशन उपकरण और ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता पड़ रही है।
बचाव दल का मुख्य उद्देश्य पहले सुरंग के भीतर हवा का सुरक्षित प्रवाह सुनिश्चित करना, गैस के स्तर की जाँच करना और इसके बाद चरणबद्ध तरीके से मलबा हटाकर मजदूरों तक पहुँचना है।
मीथेन गैस से क्यों बढ़ा खतरा?
मीथेन सामान्य परिस्थितियों में रंगहीन और गंधहीन गैस होती है। यह सीधे तौर पर अत्यधिक जहरीली नहीं मानी जाती, लेकिन बंद स्थान में अधिक मात्रा में जमा होने पर ऑक्सीजन को विस्थापित कर सकती है। इससे व्यक्ति को साँस लेने में परेशानी, चक्कर, बेहोशी और दम घुटने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
मीथेन अत्यधिक ज्वलनशील भी होती है। सुरंग जैसे बंद क्षेत्र में गैस का स्तर बढ़ने पर बिजली की चिंगारी, गर्म उपकरण या अन्य ज्वलन स्रोत विस्फोट का कारण बन सकते हैं। इसी वजह से बचावकर्मियों को गैस का स्तर सुरक्षित होने तक अत्यंत सावधानी के साथ अभियान चलाना पड़ता है।
बचाव अभियान में प्रमुख चुनौतियाँ
सुरंग के भीतर राहत अभियान के दौरान बचाव दल को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है—
सुरंग के प्रवेश द्वार पर भारी मलबा जमा है। अंदर पर्याप्त रोशनी और ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है। संदिग्ध मीथेन गैस की मौजूदगी के कारण आग और विस्फोट का खतरा बना हुआ है। लगातार मलबा खिसकने से दोबारा भूस्खलन की आशंका भी बनी हुई है।
प्रशासन ने घटनास्थल के आसपास लोगों की आवाजाही नियंत्रित कर दी है। मेडिकल टीमों और एंबुलेंस को भी तैयार रखा गया है, ताकि किसी मजदूर को बाहर निकालते ही तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
आधिकारिक अपडेट का इंतजार
राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। मृतकों, घायलों और सुरंग के भीतर फँसे मजदूरों की अंतिम संख्या आधिकारिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रशासन ने लोगों से अपुष्ट सूचनाएँ और पुराने वीडियो साझा नहीं करने की अपील की है।
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