मेघालय में हनीमून के दौरान पति राजा रघुवंशी की कथित हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को संकेत दिया कि वह सोनम को मिली जमानत रद्द करने के सवाल पर विचार कर रहा है। अदालत ने सोनम के वकील से पूछा कि क्या वह निचली अदालत में महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज होने तक अंतरिम रूप से आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार है।
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ मेघालय सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मेघालय हाईकोर्ट द्वारा सोनम की जमानत बरकरार रखने के आदेश को चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के सामने रखे दो विकल्प
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के वकील से कहा कि आरोपी के पास दो विकल्प हैं। पहला, अदालत दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनकर जमानत के मामले में मेरिट के आधार पर आदेश पारित करे। दूसरा, सोनम अंतरिम अवधि के लिए आत्मसमर्पण कर दे और निचली अदालत द्वारा प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज किए जाने के बाद उसकी जमानत पर दोबारा विचार किया जाए।
पीठ ने स्पष्ट किया कि वह सोनम को अचानक कोई प्रतिकूल आदेश देकर चौंकाना नहीं चाहती। अदालत ने संकेत दिया कि आत्मसमर्पण वाला विकल्प सोनम के लिए अपेक्षाकृत बेहतर हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के वकील को निर्देश लेने और गुरुवार तक यह बताने को कहा कि आरोपी अंतरिम रूप से आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार है या नहीं।
‘इतनी लंबी बहस की आवश्यकता नहीं’
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मामले में इतनी लंबी बहस की आवश्यकता नहीं है। पीठ ने सोनम के वकील से स्पष्ट रुख अपनाने को कहा। अदालत ने यह भी कहा कि यदि बचाव पक्ष मेरिट पर बहस करना चाहता है, तो उसे पूरा अवसर दिया जाएगा।
सोनम के वकील ने अदालत को बताया कि निचली अदालत ने जमानत देते समय कड़ी शर्तें लगाई हैं। सोनम को शिलांग में रहने और प्रतिदिन अदालती कार्यवाही में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इन परिस्थितियों को भी ध्यान में रखेगा। पीठ ने कहा कि यदि सोनम आत्मसमर्पण का विकल्प चुनती है तो निचली अदालत को महत्वपूर्ण सरकारी गवाहों के बयान शीघ्र दर्ज करने का निर्देश दिया जा सकता है। इसके बाद सोनम की जमानत याचिका पर दोबारा विचार किया जाएगा।
मेघालय सरकार ने क्यों माँगी जमानत रद्द करने की अनुमति?
मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि यह मामला केवल जमानत रद्द करने का नहीं, बल्कि शुरुआत में जमानत दिए जाने की वैधता को चुनौती देने का है।
उन्होंने कहा कि सोनम को यह जानकारी थी कि उसे किस मामले और किन आरोपों में गिरफ्तार किया जा रहा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सोनम पर अपने कथित प्रेमी राज कुशवाहा और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रचने का आरोप है।
पुलिस का आरोप है कि राजा को मेघालय की पहाड़ियों में एक सुनसान स्थान पर ले जाया गया, जहाँ उसकी हत्या की गई और शव को खाई में फेंक दिया गया। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर होना बाकी है।
धारा 103 की जगह 403 लिखने की गलती बनी जमानत का आधार
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण विवाद गिरफ्तारी से संबंधित दस्तावेजों में हुई कथित टाइपिंग अथवा लिपिकीय गलती को लेकर है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस के दस्तावेजों में हत्या के अपराध से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के स्थान पर कथित तौर पर धारा 403(1) लिख दी गई थी। धारा 403 बेईमानी से संपत्ति के दुरुपयोग से संबंधित है, जबकि धारा 103 हत्या की सजा से जुड़ी है।
शिलांग की अदालत ने अप्रैल 2026 में गिरफ्तारी के आधार स्पष्ट रूप से नहीं बताए जाने और दस्तावेजों में मौजूद विसंगतियों को गंभीर प्रक्रियात्मक खामी माना था। अदालत ने सोनम को ₹50,000 के जमानती बॉन्ड और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। जमानत की शर्तों के तहत उसे शिलांग में रहने और सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया।
बाद में मेघालय हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के जमानत आदेश को बरकरार रखा, जिसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची है।
‘सोनम को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी थी’
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि सोनम ने सह-आरोपी राज कुशवाहा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। राज्य का तर्क है कि इससे स्पष्ट होता है कि सोनम को मामले और अपने खिलाफ लगे आरोपों की जानकारी थी।
राज्य सरकार ने यह भी कहा कि सोनम ने मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के समय या शुरुआती जमानत याचिकाओं में गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए जाने की शिकायत नहीं की थी। यह मुद्दा बाद की जमानत याचिका में उठाया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दस्तावेज में धारा 103 के बजाय 403 लिखा जाना केवल एक टाइपिंग की गलती थी और इस आधार पर गंभीर हत्या के मामले में जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी।
दूसरी तरफ, जमानत देने वाली अदालत ने पाया था कि गलत धारा केवल एक दस्तावेज में नहीं, बल्कि गिरफ्तारी से संबंधित कई दस्तावेजों में दर्ज थी। इस कारण अदालत ने इसे सामान्य लिपिकीय भूल मानने से इनकार किया था।
पहले जमानत पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने किया था इनकार
3 जुलाई 2026 को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सोनम की जमानत पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया था, क्योंकि वह पहले ही जेल से रिहा हो चुकी थी। हालांकि, अदालत ने मेघालय हाईकोर्ट के आदेश को लेकर शुरुआती तौर पर आपत्ति जताई थी और राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया था।
अब 21 जुलाई की सुनवाई में अदालत ने जमानत रद्द करने पर विचार करने और सोनम से अंतरिम आत्मसमर्पण का विकल्प चुनने को कहकर मामले को महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुँचा दिया है।
क्या है राजा रघुवंशी हत्याकांड?
इंदौर के रहने वाले राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी शादी के बाद मई 2025 में हनीमून के लिए मेघालय गए थे। दोनों के लापता होने के बाद चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान 2 जून 2025 को राजा का शव सोहरा क्षेत्र की एक गहरी खाई से बरामद किया गया था।
पुलिस ने सोनम, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और तीन अन्य आरोपियों—आकाश राजपूत, आनंद कुर्मी और विशाल सिंह चौहान—के खिलाफ हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया। सितंबर 2025 में मेघालय पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ करीब 790 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी।
सोनम और अन्य आरोपियों ने दोष सिद्ध होने तक स्वयं को निर्दोष मानने के कानूनी अधिकार के तहत मामले का सामना किया है। आरोपों की सत्यता पर अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट द्वारा साक्ष्यों और गवाहों की जाँच के बाद किया जाएगा।
अब आगे क्या होगा?
सोनम रघुवंशी को गुरुवार तक सुप्रीम कोर्ट के सामने यह स्पष्ट करना है कि वह प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज होने तक आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार है या जमानत के मुद्दे पर मेरिट के आधार पर विस्तृत सुनवाई चाहती है।
यदि सोनम आत्मसमर्पण के लिए सहमत होती है तो सुप्रीम कोर्ट ट्रायल कोर्ट को गवाहों के बयान शीघ्र दर्ज करने का निर्देश दे सकता है। इसके बाद उसकी जमानत पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
यदि वह आत्मसमर्पण का विकल्प स्वीकार नहीं करती है तो सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर जमानत बरकरार रखने या उसे रद्द करने पर मेरिट के आधार पर आदेश दे सकता है।
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