देश के कई राज्यों में मानसून अब जानलेवा साबित हो रहा है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और असम में भारी बारिश, अचानक आई बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं से व्यापक तबाही मची हुई है। अलग-अलग राज्यों में अब तक कम से कम 28 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लाखों लोग बाढ़ और बारिश से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
भारतीय मौसम विभाग ने उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कई जिलों में रेड अलर्ट लागू करते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों, पहाड़ी ढलानों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।
जम्मू-कश्मीर में सबसे ज्यादा तबाही, 23 लोगों की मौत
मानसूनी आपदा का सबसे अधिक असर जम्मू-कश्मीर में देखने को मिला है। पिछले दो दिनों के दौरान भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन की अलग-अलग घटनाओं में 23 लोगों की मौत हो चुकी है।
जम्मू संभाग के पुंछ और राजौरी जिले सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं। लगातार बारिश के कारण राहत और बचाव अभियान में भी परेशानी आ रही है। कई सड़कें क्षतिग्रस्त होने और पहाड़ी क्षेत्रों का संपर्क टूटने से बचाव दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है।
सात लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन, पुलिस और आपदा राहत टीमें उनकी तलाश में अभियान चला रही हैं।
असम के 15 जिलों में बाढ़, 3.63 लाख लोग प्रभावित
असम में बाढ़ के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, राज्य के 15 जिलों में 3.63 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
राज्य में इस वर्ष अब तक बाढ़ से पांच लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 580 गांव जलमग्न हैं और 10,362 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि तथा फसलें बर्बाद हो गई हैं।
कई क्षेत्रों में सड़कें, पुल, तटबंध और सार्वजनिक ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं। ब्रह्मपुत्र सहित कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन की ओर से राहत शिविर स्थापित किए गए हैं और प्रभावित लोगों को भोजन, पीने का पानी तथा आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा रोकी गई, करीब 150 सड़कें बंद
उत्तराखंड में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं। चार राष्ट्रीय राजमार्गों सहित करीब 150 सड़कें बंद हो गई हैं। कई स्थानों पर मलबा आने और पहाड़ों से पत्थर गिरने के कारण यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। राज्यभर में कक्षा 1 से 12 तक के स्कूलों को भी बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बागेश्वर जिले में सरयू नदी में बहने से आठ वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से उफनती नदियों और बरसाती नालों के पास न जाने की अपील की है।
गंगा में पांच किलोमीटर बहा भेलपुरी विक्रेता, सुरक्षित बचाया गया
ऋषिकेश में गंगा नदी उफान पर है। रामझूला क्षेत्र के पास एक भेलपुरी विक्रेता अचानक गंगा की तेज धारा में बह गया। वह करीब पांच किलोमीटर तक बहने के बाद राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के पास एक टापू पर फंस गया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद एसडीआरएफ, जल पुलिस और आपदा राहत दल ने संयुक्त अभियान चलाया। कई घंटों की मशक्कत के बाद व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
हिमाचल प्रदेश में बादल फटा, सेना और ITBP चौकियों का संपर्क टूटा
हिमाचल प्रदेश में भी मानसूनी बारिश का कहर जारी है। किन्नौर जिले में अचानक आई बाढ़ से सांगला-चितकुल मार्ग और एक महत्वपूर्ण पुल क्षतिग्रस्त हो गया। इससे सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की कई चौकियों का सड़क संपर्क टूट गया है।
चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में बादल फटने से कलाह नाले का जलस्तर अचानक बढ़ गया। इस दौरान नाले के बीच फंसे तीन मजदूरों को राहत दलों ने सुरक्षित बचा लिया।
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद कांगड़ा, मंडी और सिरमौर सहित कई जिलों में स्कूल, कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थान बंद कर दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश के 12 जिलों में रेड अलर्ट
उत्तर प्रदेश में भी मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए 12 जिलों में अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है।
बरेली, बिजनौर, रामपुर और शाहजहांपुर में पिछले 24 घंटों के दौरान 150 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई है। कई जिलों में बिजली गिरने, तेज आंधी और जलभराव की चेतावनी भी जारी की गई है।
20 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य से करीब 33 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। हालांकि अब मानसूनी गतिविधियों के तेज होने से कई इलाकों में भारी बारिश की स्थिति बन गई है।
राजस्थान में भी बढ़ेगी बारिश
राजस्थान में इस सप्ताह बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। मौसम विभाग ने पूर्वी राजस्थान के कोटा, जयपुर, भरतपुर और अजमेर संभाग में भारी बारिश का अनुमान जताया है।
पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी 22 से 28 जुलाई के बीच अच्छी बारिश होने की संभावना है। निचले इलाकों में जलभराव और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
अगले पांच दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आने और मानसूनी हवाओं के मजबूत होने के कारण अगले चार से पांच दिनों तक उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखें, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास न जाएं और केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही यात्रा करें।
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