देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल पेश करने जा रही है। इस विधेयक को सदन में चर्चा और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, इस बिल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाना तथा दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना है। सरकार का मानना है कि पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है और भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
प्रस्तावित बिल के तहत देश के प्रत्येक राज्य में पेपर लीक और परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही ऐसे मामलों की जांच अधिकतम तीन महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि दोषियों को शीघ्र सजा मिल सके।
बिल में पेपर लीक के दोषियों के लिए कठोर दंड का भी प्रस्ताव है। यदि कोई व्यक्ति या संगठित गिरोह परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करने, परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ करने या भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने का दोषी पाया जाता है, तो उसे 10 वर्ष तक की कैद और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
वहीं, विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे इस विधेयक पर अपना संयुक्त रुख ‘इंडिया अलायंस’ की बैठक में तय करेंगे। विपक्ष बिल के विभिन्न प्रावधानों और इसके क्रियान्वयन तंत्र पर चर्चा के बाद अपनी रणनीति घोषित कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बिल पारित हो जाता है, तो भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, परीक्षा माफियाओं पर अंकुश लगेगा और छात्रों का भरोसा मजबूत होगा।
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