गुजरात के साबरकांठा जिले में कांग्रेस के नए कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मंगलवार, 18 अगस्त को हिम्मतनगर के मोतीपुरा में जिला कांग्रेस कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित सत्यनारायण भगवान की कथा को लेकर कुछ मुस्लिम नेताओं और कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं ने नाराज़गी जाहिर की है। विरोध करने वाले नेताओं ने कार्यक्रम को कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष छवि के खिलाफ बताते हुए जिला नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।
कार्यक्रम के विरोध में कुछ पर्चे भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें कांग्रेस के जिला अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग के साथ मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों से ऐसे कार्यक्रमों का बहिष्कार करने की अपील की गई। इस विवाद के बाद साबरकांठा कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और पार्टी की धर्मनिरपेक्षता को लेकर बहस तेज हो गई है।
कांग्रेस कार्यालय के उद्घाटन के दौरान सत्यनारायण भगवान की कथा और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में गुजरात कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा, विपक्ष के नेता तुषार चौधरी, पूर्व सांसद मधुसूदन मिस्त्री, नईम बेग मिर्जा और पूर्व अध्यक्ष अशोक पटेल समेत कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
‘कांग्रेस सेक्युलर पार्टी है’ कहकर कार्यक्रम पर आपत्ति
मामले में खादिम लालपुरी ने सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस स्वयं को धर्मनिरपेक्ष पार्टी मानती है, ऐसे में पार्टी कार्यालय के उद्घाटन के दौरान किसी एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन करना उचित नहीं है। उन्होंने इसे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं और आस्था से जुड़ा मुद्दा बताया।
इसके बाद मुस्लिम समुदाय से जुड़े तालुका प्रतिनिधियों, कॉर्पोरेटर्स, सरपंचों और अन्य पदाधिकारियों से कार्यक्रम का बहिष्कार करने की अपील वाला एक पैम्फलेट भी सामने आया। इसमें जिला कांग्रेस नेतृत्व को बदलने की मांग की गई।
बताया जा रहा है कि पुराने कांग्रेस कार्यकर्ता अशरफ दत्रोलिया और निसार शेख सहित कुछ अन्य नेताओं ने भी अलग-अलग पर्चों के जरिए विरोध का समर्थन किया। इसके बाद मामला स्थानीय स्तर से निकलकर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
अमित चावड़ा ने क्या कहा?
विवाद पर गुजरात कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या समुदाय को किसी बात को लेकर गलतफहमी हुई है तो उसे बातचीत के जरिए दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र का भेद किए बिना सभी समुदायों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है।
चावड़ा के मुताबिक पार्टी के भीतर इस विषय पर चर्चा और मेल-मिलाप की कोशिश भी की गई है। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से मामले को आपसी संवाद के माध्यम से शांत करने का प्रयास किया जा रहा है।
धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक आयोजनों पर फिर बहस
सत्यनारायण कथा को लेकर पैदा हुआ विवाद अब केवल एक स्थानीय कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा है। इसके जरिए राजनीतिक दलों के कार्यालयों में धार्मिक आयोजनों, कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष राजनीति और अलग-अलग समुदायों की अपेक्षाओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक वर्ग धार्मिक कार्यक्रम के आयोजन को सामान्य सामाजिक परंपरा के तौर पर देख रहा है, जबकि विरोध करने वाले नेता इसे पार्टी की घोषित धर्मनिरपेक्ष विचारधारा से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व बातचीत के जरिए विवाद समाप्त करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जिला अध्यक्ष के इस्तीफे और कांग्रेस के बहिष्कार की मांग वाले पर्चों ने साबरकांठा की स्थानीय राजनीति में नया विवाद जरूर खड़ा कर दिया है।
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