मेघालय विधानसभा ने राज्य में यूरेनियम खनन और यूरेनियम अयस्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने का सर्वसम्मति से विरोध किया है। बुधवार को विधानसभा के शरदकालीन सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने इस संबंध में सरकारी प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया।
CM कॉनराड संगमा ने विधानसभा में रखा प्रस्ताव
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि यह फैसला राज्य के लोगों की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दर्शाता है। खासतौर पर उन समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखा गया है, जो यूरेनियम भंडार वाले क्षेत्रों में रहते हैं।
प्रस्ताव में कहा गया कि मेघालय के आदिवासी क्षेत्रों का प्रशासन संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत होता है। यहां अधिकांश जमीन समुदायों, कबीले और व्यक्तियों के पारंपरिक स्वामित्व में है। राज्य में भूमि हस्तांतरण को Meghalaya Transfer of Land (Regulation) Act, 1971 के तहत नियंत्रित किया जाता है।
‘प्रभावित समुदायों की सहमति नहीं ली गई’
विधानसभा में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि यूरेनियम खनन के संबंध में प्रभावित समुदायों की स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति (Free, Prior and Informed Consent) कभी प्राप्त नहीं की गई। इसके साथ ही राज्य में यूरेनियम खनन के लिए कभी कोई माइनिंग लीज भी प्रदान नहीं की गई है।
यह मुद्दा मेघालय में लंबे समय से विवाद और विरोध का कारण रहा है। स्थानीय समुदायों का कहना है कि यूरेनियम खनन से पर्यावरण, स्वास्थ्य, जल स्रोतों और उनकी पारंपरिक जमीन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
🚨 BIG SETBACK!
Meghalaya Assembly Says NO To Uranium Mining 😳
State holds an estimated 9.22 million tonnes of uranium deposits
Huge jolt to India's Uranium plans as Meghalaya is home to our 3rd largest reserves! pic.twitter.com/wQ0UUZuvDd
— The Analyzer (News Updates🗞️) (@Indian_Analyzer) August 27, 2026
सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले का भी जिक्र
प्रस्ताव में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2019 के ‘State of Meghalaya vs All Dimasa Students Union’ मामले के फैसले का उल्लेख किया गया है।
इस फैसले के अनुसार मेघालय में निजी और सामुदायिक जमीन के मालिकों के पास जमीन की सतह के अधिकार के साथ-साथ भूमिगत अधिकार (Sub-soil Rights) भी हैं। इसमें जमीन के नीचे मौजूद खनिजों पर अधिकार भी शामिल है।
इस फैसले को राज्य में खनिज संसाधनों और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है।
इन इलाकों में मिले हैं यूरेनियम के भंडार
मेघालय में कई स्थानों पर यूरेनियम के भंडार की पहचान की गई है। इनमें वेस्ट खासी हिल्स और साउथ वेस्ट खासी हिल्स जिलों के डोमियासियाट (Domiasiat), वाहकिजन (Wahkijn), लॉस्टोइन (Lostoin) और Kylleng Pyndengsohiong Mawthabah (KPM) क्षेत्र शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में यूरेनियम खनन को लेकर वर्षों से स्थानीय स्तर पर विरोध होता रहा है। पारंपरिक संस्थाओं, स्वायत्त जिला परिषदों, छात्र संगठनों, नागरिक संगठनों और निर्वाचित प्रतिनिधियों ने समय-समय पर खनन परियोजनाओं पर अपनी आपत्ति जताई है।
Under India's Constitution (Entry 54 Union List, Entry 23 State List), Parliament regulates mines and mineral development in the public interest via the MMDR Act. States grant most concessions and handle minor minerals, but Centre sets the framework.
For uranium (an atomic…
— Grok (@grok) August 27, 2026
केंद्र और UCIL से खनन नहीं करने की अपील
विधानसभा में पारित प्रस्ताव में केंद्र सरकार, परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy) और Uranium Corporation of India Limited (UCIL) से मेघालय में यूरेनियम खनन से जुड़ी किसी भी परियोजना को अनुमति नहीं देने या आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया गया है।
प्रस्ताव में विशेष रूप से Kylleng Pyndengsohiong Mawthabah Uranium Mining Project का उल्लेख करते हुए राज्य में यूरेनियम खनन से संबंधित गतिविधियों को बंद करने की मांग की गई है।
प्रस्ताव में कहा गया कि सदन मेघालय के लोगों द्वारा यूरेनियम खनन और राज्य के भीतर किसी भी यूरेनियम अयस्क प्रोसेसिंग सुविधा की स्थापना के विरोध को औपचारिक रूप से दर्ज करता है।
केंद्र सरकार को भेजा जाएगा विधानसभा का फैसला
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने सदन को बताया कि राज्य सरकार विधानसभा द्वारा लिए गए इस फैसले को औपचारिक रूप से केंद्र सरकार तक पहुंचाएगी।
मेघालय विधानसभा के इस सर्वसम्मत प्रस्ताव को राज्य में यूरेनियम खनन को लेकर वर्षों से चल रहे विवाद में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। प्रस्ताव के जरिए राज्य सरकार और विधानसभा ने स्थानीय समुदायों के भूमि अधिकार, पर्यावरण संबंधी चिंताओं और पारंपरिक व्यवस्था को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संदेश दिया है।
देश पर क्या होगा इसका प्रभाव?
मेघालय विधानसभा का यह फैसला केवल राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भारत की यूरेनियम आपूर्ति, परमाणु ऊर्जा नीति और रणनीतिक खनिज सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। भारत अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए घरेलू यूरेनियम उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ विदेशों से भी यूरेनियम आयात करता है। ऐसे में देश के भीतर मौजूद संभावित यूरेनियम भंडार का विकास रुकने से घरेलू स्रोतों के विस्तार की संभावनाएं सीमित हो सकती हैं।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम पर तुरंत कोई बड़ा संकट आ जाएगा। देश में अन्य क्षेत्रों से यूरेनियम का उत्पादन होता है और भारत ने कजाकिस्तान, कनाडा सहित विभिन्न देशों के साथ यूरेनियम आपूर्ति से जुड़े समझौते भी किए हैं। इसके अलावा भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम यूरेनियम के साथ-साथ दीर्घकाल में थोरियम आधारित ईंधन चक्र पर भी जोर देता है।
मेघालय का फैसला केंद्र सरकार के सामने एक बड़ा नीति संतुलन भी खड़ा करता है। एक तरफ ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू खनिज संसाधनों के उपयोग की जरूरत है, जबकि दूसरी तरफ आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय सहमति का सवाल है।
यह प्रस्ताव देश में भविष्य की खनन परियोजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। विशेष रूप से आदिवासी और अनुसूचित क्षेत्रों में खनिज परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से पहले स्थानीय समुदायों की भागीदारी, सामाजिक प्रभाव आकलन और पर्यावरण संबंधी चिंताओं को अधिक महत्व देना पड़ सकता है।
इसके अलावा यूरेनियम जैसे रणनीतिक खनिज के मामले में आयात पर निर्भरता कम करना भारत के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य रहा है। यदि घरेलू स्तर पर नए यूरेनियम भंडार विकसित नहीं होते हैं, तो भविष्य में बढ़ती परमाणु ऊर्जा क्षमता के साथ आयातित ईंधन की जरूरत बढ़ सकती है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्र सरकार आने वाले वर्षों में देश के अन्य यूरेनियम भंडारों, आयात समझौतों और परमाणु ईंधन नीति को किस तरह आगे बढ़ाती है।
मेघालय में लंबे समय से क्यों हो रहा यूरेनियम खनन का विरोध?
मेघालय में यूरेनियम भंडार होने के बावजूद इसके खनन को लेकर लंबे समय से स्थानीय स्तर पर विरोध होता आया है। विरोध करने वाले संगठनों और समुदायों की प्रमुख चिंताओं में पर्यावरण पर संभावित प्रभाव, रेडियोधर्मी प्रदूषण का खतरा, जल स्रोतों की सुरक्षा, स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और पारंपरिक भूमि अधिकार शामिल रहे हैं।
अब विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद यूरेनियम खनन के खिलाफ राज्य का राजनीतिक रुख और स्पष्ट हो गया है। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के मुताबिक विधानसभा का फैसला केंद्र सरकार को औपचारिक रूप से भेजा जाएगा।
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