नेपाल में बुधवार, 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड में मृतकों की संख्या बढ़कर 177 पहुंच गई है। नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अलग-अलग जिलों से अब तक 177 शव बरामद किए जा चुके हैं। बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों, सुरक्षाकर्मियों और विदेशी पर्यटकों का अभी भी पता नहीं चल सका है। इनमें बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की भी बताई जा रही है।
नेपाल में जारी इस बड़े राहत और बचाव अभियान के बीच भारत ने सहायता तेज कर दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को हालात की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूत भी शामिल हुए। भारत नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों का पता लगाने और राहत कार्यों में सहयोग के लिए नेपाली अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।
जयशंकर ने नेपाल बाढ़ को लेकर की बड़ी समीक्षा बैठक
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिल्ली में विदेश मंत्रालय की टीम के साथ नेपाल में पैदा हुए आपात हालात की समीक्षा की। बैठक का मुख्य फोकस बाढ़ प्रभावित इलाकों में मौजूद भारतीय नागरिकों और पर्यटकों की सुरक्षा तथा राहत एवं बचाव कार्यों के लिए नेपाल को दी जा रही सहायता पर रहा।
विदेश मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और संबंधित परियोजना अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। इसके साथ ही भारतीय दूतावास और नेपाली एजेंसियां लापता भारतीयों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी हैं। काठमांडू के साथ-साथ बीजिंग में भारतीय राजदूत की बैठक में मौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस आपदा की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के ऊपरी हिमालयी क्षेत्र से हुई थी।
EAM Dr S Jaishankar tweets, "Held a review meeting with Foreign Secretary, Team MEA and our Ambassadors in Kathmandu & Beijing on the Nepal flood disaster. Urgent efforts are underway to ascertain the status and well-being of all Indians in the flood-affected areas. MEA is… pic.twitter.com/ZHnvN1xnH9
— ANI (@ANI) August 27, 2026
177 भारतीय पर्यटक भी संपर्क से बाहर
नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी और नेपाल टूरिज्म बोर्ड के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भोटेकोशी फ्लैश फ्लड के बाद 826 लोगों के लापता या संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 590 पर्यटक शामिल हैं, जिनमें 476 विदेशी और 114 नेपाली नागरिक हैं।
विदेशी पर्यटकों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है। नेपाल टूरिज्म बोर्ड के अनुसार 177 भारतीय नागरिकों का संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा अमेरिका, यूक्रेन, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा और कई अन्य देशों के नागरिक भी लापता सूची में हैं। तलाश और रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी होने के कारण ये आंकड़े बदल सकते हैं।
भारत ने पहली खेप में भेजी थी 10 टन राहत सामग्री
नेपाल में तबाही की खबर सामने आने के कुछ ही घंटों के भीतर भारत ने आपात सहायता भेजनी शुरू कर दी थी। बुधवार को भारत की ओर से लगभग 10 टन Humanitarian Assistance and Disaster Relief (HADR) सामग्री नेपाल रवाना की गई।
इसमें अस्थायी शेल्टर, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान शामिल थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के नेतृत्व से बात कर इस कठिन समय में भारत की ओर से हर संभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया था।
दूसरी उड़ान से भेजी गई 37.5 टन सहायता
भारत ने गुरुवार को राहत अभियान को और तेज करते हुए 37.5 टन राहत सामग्री की दूसरी खेप नेपाल के लिए रवाना की। विदेश मंत्री जयशंकर के मुताबिक इस खेप में HADR सामग्री के साथ जरूरी दवाइयां और खाद्य पैकेट शामिल हैं।
पहली 10 टन की खेप को मिलाकर भारत ने दो दिनों में करीब 47.5 टन राहत सामग्री भेजी है। जयशंकर ने कहा कि भारत नेपाली अधिकारियों के साथ लगातार और करीबी संपर्क में है तथा राहत एवं बचाव कार्यों में मजबूती से सहयोग करता रहेगा।
भारत ने कहा- मुश्किल समय में नेपाल के साथ खड़े हैं
भारत ने स्पष्ट किया है कि नेपाल में राहत कार्य पूरा होने तक सहायता जारी रहेगी। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा, करीबी सामाजिक संबंध और बड़ी संख्या में दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही को देखते हुए भारत इस आपदा पर लगातार नजर बनाए हुए है।
भारत की प्राथमिकताओं में नेपाल में फंसे भारतीयों की पहचान करना, उनके परिजनों तक सही जानकारी पहुंचाना, जरूरत पड़ने पर निकासी में सहायता करना और नेपाली प्रशासन के राहत अभियान में जरूरी सामग्री उपलब्ध कराना शामिल है।
कैसे आई भोटेकोशी नदी में इतनी विनाशकारी बाढ़?
प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा के ऊपरी हिस्से में बर्फ और चट्टानों का विशाल हिमस्खलन हुआ। इसके बाद ल्हेंदे नदी का प्रवाह कचरे और मलबे से कुछ समय के लिए बाधित हो गया। माना जा रहा है कि इससे एक अस्थायी डेब्रिस लेक बनी और उसके अचानक टूटने से पानी, बर्फ, चट्टानों और मलबे का विशाल प्रवाह नीचे की ओर दौड़ पड़ा।
सैटेलाइट डेटा के विश्लेषण में भी बड़े ice-rock collapse के संकेत सामने आए हैं। वैज्ञानिक अभी घटना के सटीक कारण की जांच कर रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि बाढ़ सामान्य मानसूनी बारिश की वजह से नहीं आई थी।
सबसे पहले रसुवागढ़ी के तिमुरे में टूटा कहर
ल्हेंदे नदी में अचानक बढ़ा जलप्रवाह सबसे पहले चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी के तिमुरे इलाके में पहुंचा। स्थानीय लोगों को चेतावनी का बहुत कम समय मिला और तेज गति से आए पानी तथा मलबे ने बाजार, मकानों और सार्वजनिक ढांचे को कुछ ही समय में तबाह कर दिया।
इसके बाद बाढ़ भोटेकोशी नदी से होते हुए त्रिशूली और नीचे के अन्य नदी क्षेत्रों की ओर बढ़ी। कई सड़कें, पुल, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और दूसरे महत्वपूर्ण ढांचे इसकी चपेट में आए।
रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी चुनौती
आपदा के बाद कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है, जबकि बिजली और संचार नेटवर्क भी प्रभावित हुए हैं। नदी और आसपास के क्षेत्रों में भारी मात्रा में मिट्टी और मलबा जमा होने के कारण राहत एवं बचाव टीमों को कई स्थानों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
नेपाल की सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के हजारों जवान तलाश और बचाव कार्यों में जुटे हैं। हेलीकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत समेत कई देशों और संस्थाओं ने राहत सामग्री और सहायता उपलब्ध कराई है।
नेपाल की हालिया इतिहास की सबसे गंभीर आपदाओं में शामिल
भोटेकोशी की यह बाढ़ नेपाल में हाल के दशकों की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में शामिल होती जा रही है। आधिकारिक मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है और लापता लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए आशंका है कि आने वाले दिनों में त्रासदी का वास्तविक पैमाना और स्पष्ट होगा।
नेपाल पुलिस के अनुसार 27 अगस्त तक 177 शव बरामद किए जा चुके थे। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आंकड़ों में उसी समय मृतकों की संख्या कुछ कम बताई जा रही थी, जिससे साफ है कि राहत अभियान के दौरान आंकड़े तेजी से अपडेट हो रहे हैं।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष नजर
नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक, धार्मिक यात्री और व्यवसाय से जुड़े लोग मौजूद रहते हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा का यह क्षेत्र कैलाश मानसरोवर और अन्य पर्यटन मार्गों से भी जुड़ा है। ऐसे में इस हादसे के बाद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत सरकार के लिए बड़ी प्राथमिकता बन गई है।
विदेश मंत्रालय भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों के बीच संपर्क स्थापित करने के साथ-साथ नेपाली एजेंसियों से नियमित जानकारी ले रहा है। जिन लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, उनकी तलाश के लिए स्थानीय प्रशासन और टूर ऑपरेटरों की जानकारी को भी मिलाया जा रहा है।
भारत-नेपाल रिश्तों में दिखी ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ भूमिका
नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत की त्वरित राहत सहायता दोनों देशों के आपदा सहयोग को भी रेखांकित करती है। भौगोलिक निकटता के कारण नेपाल में आने वाली बड़ी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भारत कई बार तेजी से राहत सामग्री और बचाव सहायता उपलब्ध कराता रहा है।
इस बार भी पहले ही दिन 10 टन और अगले दिन 37.5 टन सामग्री भेजकर भारत ने शुरुआती चरण में ही राहत अभियान को विस्तार दिया है। आने वाले दिनों में जरूरत के आधार पर अतिरिक्त सहायता भेजे जाने की संभावना बनी हुई है।
अभी भी बदल सकते हैं मौत और लापता लोगों के आंकड़े
नेपाल की भोटेकोशी आपदा में राहत और तलाश अभियान अभी जारी है। नदी के लंबे हिस्से, मलबे में दबे इलाकों और संपर्क टूटे गांवों में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसलिए मृतकों, घायलों और लापता लोगों के आंकड़ों में आगे बदलाव हो सकता है।
फिलहाल नेपाल पुलिस द्वारा जारी जानकारी में मृतकों की संख्या 177 बताई गई है, जबकि नेपाल टूरिज्म बोर्ड के अनुसार 177 भारतीय पर्यटक समेत सैकड़ों लोग अभी संपर्क से बाहर हैं। भारत ने इस बीच अपनी मानवीय सहायता बढ़ाकर लगभग 47.5 टन कर दी है और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के स्तर पर स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है।
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