तमिलनाडु में देवेंद्रकुला वेल्लालर (Devendra Kula Vellalar-DKV) समुदाय की एक असामान्य मांग इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। अनुसूचित जाति (SC) की सूची में शामिल इस समुदाय के एक वर्ग की मांग है कि उसे SC श्रेणी से बाहर किया जाए। समुदाय से जुड़े नेताओं का कहना है कि उनकी मांग अधिक आरक्षण या आर्थिक लाभ हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा, पहचान और आत्मसम्मान से जुड़ी हुई है।
समुदाय के कुछ नेताओं का प्रस्ताव है कि देवेंद्रकुला वेल्लालर को पहले SC श्रेणी से निकालकर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल किया जाए और इसके बाद सामाजिक परिस्थितियों में बदलाव आने पर भविष्य में सामान्य यानी अनारक्षित श्रेणी में स्थान दिया जाए। इसी बहस के बीच समुदाय के एक नेता की ओर से SC/ST एक्ट के इस्तेमाल को लेकर किए गए दावे ने भी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।
SC/ST एक्ट का इस्तेमाल नहीं करने का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किए जाने के संदर्भ में तमिलनाडु के तेनकासी से भाजपा जिलाध्यक्ष और DKV समुदाय से जुड़े अनंतन अय्यासामी ने प्रतिक्रिया दी।
अय्यासामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय ने स्वेच्छा से ऐसा सिद्धांत अपनाया है, जिसके तहत वह किसी व्यक्ति के खिलाफ SC/ST एक्ट में मामला दर्ज नहीं कराएगा। उनके मुताबिक, समुदाय का मानना है कि कानून के कथित दुरुपयोग से समाज में कटुता और आपसी दुश्मनी बढ़ सकती है।
हालांकि, इसे पूरे समुदाय की कानूनी स्थिति या प्रत्येक सदस्य पर लागू बाध्यकारी फैसला नहीं माना जा सकता। यह समुदाय से जुड़े नेताओं की ओर से व्यक्त किया गया रुख है।
कौन हैं देवेंद्रकुला वेल्लालर?
देवेंद्रकुला वेल्लालर तमिलनाडु का एक प्रमुख सामाजिक समुदाय है, जिसकी जड़ें मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन से जुड़ी बताई जाती हैं। यह समुदाय वर्तमान में अनुसूचित जाति की सूची में शामिल है।
अलग-अलग अनुमानों में इसकी आबादी तमिलनाडु की कुल जनसंख्या का करीब 5 से 9 प्रतिशत बताई जाती है। समुदाय की उल्लेखनीय मौजूदगी दक्षिणी तमिलनाडु और कावेरी डेल्टा क्षेत्र में है। मदुरै, रामनाथपुरम, तिरुनेलवेली और थूथुकुडी समेत कई जिलों में इस समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है।
‘देवेंद्रकुला’ नाम को भगवान इंद्र के वंशज होने की सांस्कृतिक मान्यता से जोड़ा जाता है, जबकि ‘वेल्लालर’ शब्द का संबंध खेती और कृषि परंपरा से माना जाता है। समुदाय अपनी पहचान को कृषि आधारित सामाजिक इतिहास से जोड़कर देखता रहा है।
2021 में सात समुदायों को मिली थी ‘देवेंद्रकुला वेल्लालर’ की साझा पहचान
देवेंद्रकुला वेल्लालर की पहचान से जुड़ी मांग नई नहीं है। लंबे समय से समुदाय के विभिन्न संगठन अलग-अलग उप-जातियों को एक साझा नाम के तहत पहचान देने की मांग कर रहे थे।
मार्च 2021 में संसद ने संबंधित कानून में बदलाव करते हुए पल्लार समेत सात अनुसूचित जाति समुदायों को ‘देवेंद्रकुला वेल्लालर’ की साझा पहचान प्रदान की थी। इस बदलाव के बावजूद इन समुदायों की अनुसूचित जाति की संवैधानिक स्थिति बरकरार रही थी।
उस समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी समुदाय के सामाजिक उत्थान और पहचान से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया था। साझा नाम मिलने के बाद अब समुदाय के एक वर्ग ने अगला कदम SC सूची से पूरी तरह बाहर निकलने को बताया है।
SC आरक्षण छोड़ने की मांग क्यों?
इस मांग के पीछे समुदाय के नेताओं का मुख्य तर्क सामाजिक सम्मान और आत्मसम्मान है। उनका कहना है कि SC पहचान के साथ जुड़े सामाजिक पूर्वाग्रहों के कारण समुदाय के लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट के अनुसार, समुदाय के कुछ नेताओं का दावा है कि विशेष रूप से व्यवसाय और व्यापार के क्षेत्र में SC पहचान सामाजिक बाधा बनती है। उनका तर्क है कि आरक्षण से मिलने वाले लाभ की तुलना में सामाजिक पहचान से जुड़ी चुनौतियां अधिक गंभीर हैं।
इसी वजह से समुदाय के एक वर्ग का कहना है कि वह आरक्षण पर निर्भर पहचान के बजाय अपनी पारंपरिक कृषि और सामाजिक पहचान को प्रमुखता देना चाहता है।
पहले OBC और फिर General Category में जाने की मांग
DKV समुदाय के कुछ नेताओं की मांग सीधे SC से सामान्य श्रेणी में शामिल होने की नहीं है। उनकी ओर से एक चरणबद्ध व्यवस्था का प्रस्ताव सामने आया है।
इसके तहत सबसे पहले देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय को अनुसूचित जाति की सूची से हटाकर OBC श्रेणी में शामिल करने की मांग की जा रही है। इसके बाद करीब 10 से 15 वर्षों तक OBC श्रेणी में रहने और सामाजिक परिस्थितियों में अपेक्षित बदलाव आने के बाद समुदाय को सामान्य या अनारक्षित श्रेणी में शामिल किए जाने की बात कही गई है।
इस प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि अचानक आरक्षण व्यवस्था से पूरी तरह बाहर आने के बजाय चरणबद्ध बदलाव से समुदाय को नई सामाजिक और शैक्षणिक परिस्थितियों के अनुरूप ढलने का अवसर मिलेगा।
तमिलनाडु में पहले से 69 प्रतिशत आरक्षण
देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय की मांग तमिलनाडु की विशिष्ट आरक्षण व्यवस्था के कारण भी महत्वपूर्ण है। राज्य में विभिन्न श्रेणियों को मिलाकर 69 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू है।
समुदाय के कुछ नेताओं का कहना है कि SC श्रेणी में रहने के बावजूद उनके समुदाय को अपेक्षित सामाजिक प्रगति नहीं मिली है। उनका दावा है कि एक ओर आरक्षण से अपेक्षित लाभ सीमित रहा है तो दूसरी ओर जातिगत पहचान से जुड़े सामाजिक पूर्वाग्रह बने हुए हैं।
इसी कारण समुदाय के भीतर एक विचार यह उभरा है कि केवल आरक्षण की उपलब्धता को सामाजिक उत्थान का पैमाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
समुदाय के भीतर भी मांग पर एक राय नहीं
हालांकि, देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय के सभी सदस्य SC सूची से बाहर निकलने की मांग से सहमत हों, ऐसा नहीं है। इस मुद्दे को लेकर समुदाय के भीतर अलग-अलग मत सामने आए हैं।
समुदाय के एक वर्ग में SC सूची से बाहर निकलकर नई सामाजिक पहचान स्थापित करने की मांग को समर्थन मिल रहा है। वहीं, ईसाई धर्म अपनाने वाले समुदाय के कुछ सदस्यों सहित आरक्षण जारी रखने का समर्थन करने वाले वर्ग इस प्रस्ताव से असहमत बताए जाते हैं।
आरक्षण से बाहर होने की स्थिति में शिक्षा, सरकारी नौकरियों और अन्य क्षेत्रों में मिलने वाले संवैधानिक लाभों पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि समुदाय के भीतर इस मुद्दे पर बहस जारी है।
धर्म परिवर्तन और SC आरक्षण का मुद्दा भी चर्चा में
तमिलनाडु में धर्म परिवर्तन करने वाले दलितों को SC आरक्षण देने का सवाल भी पहले से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। वर्ष 2023 में तमिलनाडु विधानसभा ने प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से दलित ईसाइयों को भी अनुसूचित जातियों को मिलने वाले आरक्षण और संबंधित लाभ दिए जाने की दिशा में कदम उठाने की मांग की थी।
ऐसे में देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय के एक वर्ग की SC सूची से बाहर निकलने की मांग आरक्षण, धर्म, जातिगत पहचान और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी व्यापक बहस को भी सामने लाती है।
आरक्षण पाने के बजाय छोड़ने की मांग ने क्यों खींचा ध्यान?
भारत में विभिन्न समुदायों की ओर से आरक्षण का लाभ हासिल करने या किसी विशेष आरक्षित श्रेणी में शामिल होने की मांग अक्सर सामने आती रही है। इसके उलट देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय के एक वर्ग की ओर से SC श्रेणी से बाहर निकलने की मांग ने इस मामले को अलग बना दिया है।
समर्थकों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता आरक्षण से मिलने वाला लाभ नहीं, बल्कि ऐसी सामाजिक पहचान स्थापित करना है जो उनके इतिहास, कृषि परंपरा और आत्मसम्मान को दर्शाए।
हालांकि, किसी समुदाय को अनुसूचित जाति की सूची से हटाने की प्रक्रिया केवल सामाजिक संगठनों या राज्य सरकार के स्तर पर पूरी नहीं हो सकती। इसके लिए संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। ऐसे में DKV समुदाय की मांग आगे किस दिशा में जाती है, यह केंद्र और राज्य की राजनीतिक प्रतिक्रिया तथा समुदाय के भीतर बनने वाली सहमति पर निर्भर करेगा।
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