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Monday, November 2, 2026

तमिलनाडु में RSS के मार्च में जोहो के श्रीधर वेम्बू ने गणवेश में किया पथसंचलन, एल. मुरुगन भी शामिल

जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू शंकरनकोविल में RSS पथसंचलन में शामिल हुए। कोयंबटूर में एल. मुरुगन ने मार्च किया। सोशल मीडिया विवाद पर वेम्बू ने दिया जवाब।

तमिलनाडु में RSS के मार्च में जोहो के श्रीधर वेम्बू ने गणवेश में किया पथसंचलन, एल. मुरुगन भी शामिल

तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पथसंचलन का दूसरा चरण रविवार, 1 नवंबर 2026 को आयोजित किया गया। इस दौरान कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली (त्रिची), मदुरै और तेनकासी सहित राज्य के कई जिलों में स्वयंसेवकों ने गणवेश में रूट मार्च निकाला। तेनकासी जिले के शंकरनकोविल में आयोजित पथसंचलन में जोहो कॉर्पोरेशन (Zoho Corporation) के सह-संस्थापक और पद्मश्री से सम्मानित श्रीधर वेम्बू ने हिस्सा लिया। वहीं, कोयंबटूर में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन भी आरएसएस के पथसंचलन में शामिल हुए। श्रीधर वेम्बू की भागीदारी को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई, जिसके बाद उन्होंने आलोचकों को जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि यह बीजेपी नहीं, बल्कि आरएसएस का कार्यक्रम था।

तमिलनाडु में RSS पथसंचलन का दूसरा चरण आयोजित

तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से आयोजित पथसंचलन कार्यक्रम का दूसरा चरण 1 नवंबर को संपन्न हुआ। इससे पहले 25 अक्टूबर को राज्य के विभिन्न हिस्सों में पहले चरण के तहत पथसंचलन निकाले गए थे। दूसरे चरण में कोयंबटूर, त्रिची, मदुरै, तेनकासी और अन्य जिलों में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने निर्धारित मार्गों पर मार्च किया। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।

इस दौरान आरएसएस के गणवेश में स्वयंसेवक अनुशासित तरीके से पथसंचलन करते दिखाई दिए। विभिन्न स्थानों पर स्थानीय पदाधिकारी और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग भी कार्यक्रमों में मौजूद रहे।

शंकरनकोविल में RSS की वर्दी पहनकर मार्च में शामिल हुए श्रीधर वेम्बू

तमिलनाडु के तेनकासी जिले के शंकरनकोविल में आयोजित आरएसएस के पथसंचलन में जोहो कॉर्पोरेशन के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू की मौजूदगी विशेष चर्चा का विषय बनी। पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित उद्योगपति श्रीधर वेम्बू ने स्वयंसेवकों के साथ पूरे निर्धारित मार्ग पर पथसंचलन किया। उन्होंने सफेद शर्ट, खाकी रंग की पैंट और काली टोपी पहन रखी थी। उनके माथे पर चंदन और रोली का तिलक भी दिखाई दिया।

श्रीधर वेम्बू ने मार्च की शुरुआत से लेकर समापन तक स्वयंसेवकों के साथ हिस्सा लिया। पथसंचलन पूरा होने के बाद उन्होंने मंच से उपस्थित लोगों को संबोधित भी किया। इस कार्यक्रम में तेनकासी जिले और शहर की भाजपा इकाइयों से जुड़े कुछ पदाधिकारियों की मौजूदगी की भी जानकारी सामने आई।

श्रीधर वेम्बू का RSS से पुराना जुड़ाव

जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव नया नहीं है। वे पहले भी आरएसएस से संबंधित कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी और विचारों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। फरवरी 2020 में चेन्नई में आयोजित ‘रिसर्जेंट भारत’ नामक सॉफ्टवेयर समुदाय से जुड़े कार्यक्रम में श्रीधर वेम्बू मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम का संबंध आरएसएस से बताया गया था।

उस समय भी उनकी भागीदारी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस हुई थी। कुछ आलोचकों ने जोहो के उत्पादों के बहिष्कार की मांग उठाई थी। हालांकि, श्रीधर वेम्बू ने उस दौरान आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा था कि वे अपने फैसले सोशल मीडिया के दबाव में नहीं, बल्कि अपनी अंतरात्मा और व्यक्तिगत विश्वास के आधार पर लेते हैं।

RSS से जुड़े संस्थान में हुई थी श्रीधर वेम्बू की पढ़ाई

श्रीधर वेम्बू के अनुसार, उनका आरएसएस से परिचय बचपन के दिनों से रहा है। उन्होंने बताया था कि कक्षा 10 से 12 तक की पढ़ाई उन्होंने एक ऐसे निःशुल्क विद्यालय में की थी, जिसे आरएसएस से संबंधित संस्था से आर्थिक सहायता मिलती थी। श्रीधर वेम्बू स्वदेशी विचारधारा और भारत में स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने के पक्षधर रहे हैं। उनका नाम आरएसएस से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच के संदर्भ में भी सामने आता रहा है।

वे स्वदेशी विचारक एस. गुरुमूर्ति को अपना मार्गदर्शक मानने की बात भी कह चुके हैं। भारत में तकनीकी विकास, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वदेशी उद्यमिता को लेकर श्रीधर वेम्बू के विचार लंबे समय से चर्चा में रहे हैं।

सोशल मीडिया पर आलोचना, श्रीधर वेम्बू ने दिया जवाब

शंकरनकोविल में आरएसएस के पथसंचलन में श्रीधर वेम्बू के शामिल होने की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनकी भागीदारी को लेकर सवाल उठाए और उन्हें भारतीय जनता पार्टी से जोड़कर देखा।

इन प्रतिक्रियाओं पर श्रीधर वेम्बू ने स्पष्ट किया कि जिस कार्यक्रम में उन्होंने हिस्सा लिया, वह बीजेपी की ओर से आयोजित राजनीतिक रैली नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित पथसंचलन था और इसमें उनकी भागीदारी को लेकर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने आलोचकों से पूछा कि आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने में आखिर गलत क्या है।

उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत विचारों, संगठनात्मक जुड़ाव और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की वैचारिक स्वतंत्रता को लेकर चर्चा तेज हो गई।

कोयंबटूर में एल. मुरुगन भी RSS के मार्च में हुए शामिल

तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित आरएसएस के पथसंचलन में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और भाजपा नेता एल. मुरुगन ने भी हिस्सा लिया। मुरुगन आरएसएस के गणवेश में अन्य स्वयंसेवकों के साथ मार्च में शामिल हुए। उनकी भागीदारी ने कार्यक्रम को राजनीतिक चर्चा का विषय भी बना दिया।

त्रिची में 500 से अधिक स्वयंसेवकों ने किया पथसंचलन

तिरुचिरापल्ली यानी त्रिची में आयोजित आरएसएस के पथसंचलन में 500 से अधिक स्वयंसेवकों के शामिल होने की जानकारी सामने आई। स्वयंसेवकों ने गणवेश में निर्धारित मार्ग पर मार्च किया। इस दौरान स्थानीय आरएसएस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की मौजूदगी रही।

त्रिची के अलावा तमिलनाडु के अन्य जिलों में भी इसी तरह के पथसंचलन आयोजित किए गए।

मदुरै में केसी तिरुमारन ने दिखाई RSS पथसंचलन को हरी झंडी

मदुरै में आयोजित आरएसएस के पथसंचलन की शुरुआत अराप्पलायम क्रॉस रोड से हुई। इस कार्यक्रम को साउथ इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक पार्टी के संस्थापक नेता केसी तिरुमारन ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

मार्च में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने गणवेश पहनकर भाग लिया। इस आयोजन में स्थानीय स्तर पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों की भागीदारी भी देखने को मिली।

तमिलनाडु में RSS के कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक चर्चा

तमिलनाडु में आरएसएस के पथसंचलन के दूसरे चरण के दौरान श्रीधर वेम्बू और एल. मुरुगन जैसी चर्चित हस्तियों की भागीदारी ने इन कार्यक्रमों की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

विशेष रूप से श्रीधर वेम्बू की मौजूदगी को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। जहां कुछ लोगों ने उनकी व्यक्तिगत पसंद और संगठनात्मक कार्यक्रमों में भागीदारी का समर्थन किया, वहीं कुछ ने उनके आरएसएस से जुड़ाव पर सवाल उठाए। श्रीधर वेम्बू ने स्पष्ट किया कि उन्होंने आरएसएस के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, न कि किसी बीजेपी रैली में।

तमिलनाडु के विभिन्न जिलों में दो चरणों में आयोजित पथसंचलन और प्रमुख हस्तियों की भागीदारी के कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक बार फिर राज्य की सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

 

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