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दिल्ली में INDIA गठबंधन की रैली से व्यापार को ₹11,000 करोड़ तक का नुकसान हुआ

दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली से ₹11,000 करोड़ तक व्यापारिक नुकसान का CTI ने दावा किया। बृजेश गोयल के मुताबिक 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं और 5,000 वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

दिल्ली में INDIA गठबंधन की रैली से व्यापार को ₹11,000 करोड़ तक का नुकसान हुआ

दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन (INDIA Alliance) की रैली को लेकर व्यापारिक संगठनों की ओर से बड़े आर्थिक नुकसान का दावा किया गया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने रविवार को दावा किया कि रैली के कारण पुरानी दिल्ली और मध्य दिल्ली के प्रमुख बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुईं। उनके अनुसार, इस व्यवधान से व्यापार को करीब 10,000 से 11,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है। उन्होंने दावा किया कि रैली स्थल के आसपास के लगभग 20 से 25 प्रमुख बाजारों में करीब 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं, जबकि हजारों मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।

INDIA गठबंधन की रैली से दिल्ली के बाजारों में कारोबार प्रभावित होने का दावा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित INDIA गठबंधन की रैली का असर आसपास के व्यापारिक इलाकों में देखने को मिलने का दावा किया गया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, रैली में बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के पहुंचने की आशंका के कारण कई व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखने का फैसला किया।

गोयल ने बताया कि रैली स्थल के आसपास स्थित लगभग 20 से 25 बड़े बाजारों में सामान्य व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। इन बाजारों में करीब तीन लाख दुकानें हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में दुकानें बंद रहने की जानकारी सामने आई। उन्होंने कहा कि रैली के कारण संभावित भीड़ और यातायात संबंधी परेशानियों को देखते हुए व्यापारियों में आशंका का माहौल था। इसका सीधा असर बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और सामान की आपूर्ति पर पड़ा।

CTI का दावा- दिल्ली के बाजारों में करीब 2.5 लाख दुकानें रहीं बंद

CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने दावा किया कि रामलीला मैदान में आयोजित रैली के कारण दिल्ली के कई प्रमुख व्यापारिक केंद्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

उन्होंने बताया कि रविवार शाम को विभिन्न बाजारों के व्यापारियों से जुड़े व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से व्यापारिक गतिविधियों की जानकारी जुटाई गई थी। इन जानकारियों के आधार पर अनुमान लगाया गया कि प्रभावित बाजारों की करीब तीन लाख दुकानों में से लगभग 80 प्रतिशत दुकानें बंद रहीं।

गोयल के मुताबिक, करीब 2.5 लाख दुकानों के बंद रहने से व्यापारिक गतिविधियों में भारी गिरावट आई। हालांकि, यह आंकड़ा CTI की ओर से व्यापारियों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर किया गया दावा है और इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

5,000 मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने का दावा

रैली का असर केवल दुकानों और खुदरा कारोबार तक सीमित नहीं रहने का दावा किया गया है। CTI के अनुसार, छोटे टेम्पो, ट्रक और बड़े मालवाहक वाहनों सहित करीब 5,000 वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। बृजेश गोयल ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों और ट्रांसपोर्ट हब से पुरानी दिल्ली तथा मध्य दिल्ली के बाजारों तक सामान पहुंचाने की प्रक्रिया में बाधाएं आईं।

उनके मुताबिक, माल की लोडिंग और अनलोडिंग प्रभावित होने से व्यापारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सामान की आपूर्ति बाधित होने का असर थोक व्यापारियों, खुदरा दुकानदारों और परिवहन से जुड़े कारोबारियों पर पड़ा।

दिवाली के पीक सीजन में ₹10,000 से ₹11,000 करोड़ के नुकसान का दावा

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने दावा किया कि रैली के कारण व्यापारियों को करीब 10,000 से 11,000 करोड़ रुपये तक का कारोबारी नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि दिवाली के व्यस्त कारोबारी सीजन में प्रभावित बाजारों में कुल मिलाकर लगभग 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। ऐसे समय में बड़ी संख्या में दुकानों के बंद रहने और ग्राहकों की आवाजाही कम होने से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।

गोयल के अनुसार, जिन दुकानदारों ने अपनी दुकानें खोली भी थीं, उन्हें अपेक्षित ग्राहक नहीं मिले। कई बाजारों में बिक्री बेहद कम रहने की जानकारी सामने आई। हालांकि, CTI की ओर से बताए गए नुकसान के आंकड़े को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करने वाला विस्तृत आर्थिक आकलन उपलब्ध नहीं कराया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि अनुमानित राशि वास्तविक वित्तीय नुकसान है या संभावित कारोबार में आई कमी का आकलन।

धनतेरस से पहले बाजारों में व्यवधान से व्यापारियों की चिंता बढ़ी

बृजेश गोयल ने कहा कि यह व्यवधान ऐसे समय में हुआ, जब बाजार दिवाली के प्रमुख खरीदारी सीजन से गुजर रहे थे। उनके बयान के अनुसार, धनतेरस की खरीदारी में केवल चार दिन का समय बचा था।

दिवाली और धनतेरस के आसपास दिल्ली के थोक और खुदरा बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां तेज रहती हैं। इस दौरान व्यापारी बड़ी मात्रा में सामान की खरीद-बिक्री और आपूर्ति की तैयारी करते हैं।

गोयल के अनुसार, ऐसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय में बाजारों का बंद रहना और मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रभावित होना व्यापारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जिन व्यवसायों का कारोबार ग्राहकों की नियमित आवाजाही और माल की समय पर आपूर्ति पर निर्भर करता है, उन पर इस व्यवधान का अधिक असर पड़ा।

दुकानें खुलीं, लेकिन ग्राहकों की कमी से बिक्री प्रभावित

CTI चेयरमैन के मुताबिक, रैली के दौरान जिन बाजारों में कुछ दुकानें खुली रहीं, वहां भी कारोबार सामान्य नहीं रहा। उन्होंने दावा किया कि ग्राहकों की संख्या बेहद कम होने के कारण कई दुकानदारों को बिक्री में भारी गिरावट का सामना करना पड़ा।

गोयल ने कहा कि व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की एक प्रमुख वजह रैली में बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के आने की आशंका थी। इस वजह से कई व्यापारियों ने पहले ही दुकानें बंद रखने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि यातायात और माल परिवहन में बाधा आने से व्यापारियों की रोजमर्रा की कारोबारी व्यवस्था प्रभावित हुई।

 

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