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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, मजिस्ट्रेट को सौंपी जांच की कमान

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी पर SIT ने 8 आरोपियों के खिलाफ 70 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। CCTV में 105 घटनाएं और 79.85 लाख की बरामदगी का दावा।

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, मजिस्ट्रेट को सौंपी जांच की कमान

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की रकम में कथित हेराफेरी का मामला अब निचली अदालत में आगे बढ़ेगा। सोमवार, 2 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी याचिकाओं का निपटारा करते हुए मजिस्ट्रेट को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि विशेष जांच दल (SIT) इस मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुका है। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में दान की नकदी से कथित छेड़छाड़ की 105 घटनाओं की पहचान की गई है। वहीं, सात आरोपियों से कथित हेराफेरी से जुड़ी 79.85 लाख रुपये की रकम बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

राम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी का मामला सुप्रीम कोर्ट से निचली अदालत पहुंचा

अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की रकम में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की।

राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित याचिकाओं का निपटारा करते हुए मामले में आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब संबंधित मजिस्ट्रेट उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपपत्र के आधार पर कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आरोपों की सच्चाई पर कोई राय नहीं दी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। अदालत ने कहा कि उसने इस मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता या मामले के गुण-दोष पर कोई निर्णय नहीं दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाओं का निपटारा किए जाने को किसी आरोपी के दोषी या निर्दोष होने के संबंध में अदालत की राय नहीं माना जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मजिस्ट्रेट को स्वतंत्र रूप से कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इसका अर्थ है कि आरोपपत्र में लगाए गए आरोपों और जांच में जुटाए गए साक्ष्यों का मूल्यांकन संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

CCTV फुटेज में सामने आईं कथित हेराफेरी की 105 घटनाएं

राम मंदिर में दान की रकम से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान SIT ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया।

जांच टीम के अनुसार, मंदिर में चढ़ावे की नकदी की गिनती के दौरान रकम को कथित तौर पर बिना अनुमति निकालने या छिपाने की 105 घटनाओं की पहचान की गई। इन घटनाओं की पहचान मंदिर परिसर में उपलब्ध सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की गई।

जांच में सामने आए इन तथ्यों के आधार पर आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। हालांकि, इन घटनाओं के संबंध में अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण अदालत की सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।

आठ आरोपियों के खिलाफ 70 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल

विशेष जांच दल ने 23 सितंबर 2026 को अयोध्या की स्थानीय अदालत में आठ आरोपियों के खिलाफ लगभग 70 हजार पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया था। इस चार्जशीट में जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

आरोपपत्र में जिन आठ व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  1. अनुकल्प मिश्रा
  2. अविनाश शुक्ला
  3. लवकुश मिश्रा
  4. मनीष कुमार यादव
  5. करुणेश पांडे
  6. रामाशंकर मिश्रा
  7. राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू
  8. सुभाष श्रीवास्तव

इन सभी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है। हालांकि, आरोपपत्र दाखिल होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

सात आरोपियों से 79.85 लाख रुपये बरामद होने का दावा

जांच के दौरान पुलिस ने सात आरोपियों से कथित हेराफेरी से संबंधित लगभग 79.85 लाख रुपये बरामद किए जाने की जानकारी दी है। SIT ने मामले की जांच में विभिन्न साक्ष्यों और दस्तावेजों का परीक्षण किया। इसके अलावा जांच टीम ने 173 गवाहों के बयान भी दर्ज किए।

इन गवाहों के बयानों और डिजिटल साक्ष्यों को आरोपपत्र का हिस्सा बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, बरामद रकम का संबंध मंदिर में दान की नकदी से हुई कथित अनियमितताओं से है। हालांकि, रकम की बरामदगी और उससे संबंधित आरोपों का न्यायिक परीक्षण अभी बाकी है।

चांदी की ईंटों और कीमती भेंटों में नहीं मिली गड़बड़ी

राम मंदिर में चढ़ावे की नकदी के साथ-साथ श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई कीमती वस्तुओं और चांदी की भेंटों की भी जांच की गई। SIT ने मंदिर से संबंधित 803 कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड का भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के लॉकर में रखी वस्तुओं से मिलान किया। जांच में इन वस्तुओं के रिकॉर्ड और वास्तविक उपलब्धता के बीच कोई अंतर नहीं पाया गया।

इसके अतिरिक्त बिना रसीद वाली 86 अन्य वस्तुओं की भी जांच की गई। जांच टीम ने 200 किलोग्राम और 38.288 किलोग्राम वजन की चांदी की ईंटों सहित अन्य भेंटों का भी सत्यापन किया। जांच में इन वस्तुओं में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने नहीं आई। इस प्रकार SIT की जांच में नकदी की गिनती से संबंधित कथित अनियमितताओं की पहचान हुई, जबकि जांची गई चांदी और अन्य कीमती भेंटों के रिकॉर्ड में अंतर नहीं पाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दी कार्यवाही में सहायता की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े जनहित को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ताओं को भी आगे की न्यायिक कार्यवाही में अपनी बात रखने की अनुमति दी है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाही में उसी प्रकार सहायता कर सकेंगे, जिस प्रकार कानून के तहत आपराधिक मामलों में पीड़ित पक्ष को सहायता करने का अवसर दिया जाता है।

राम मंदिर के दान की पारदर्शिता से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला

अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार नकद राशि तथा कीमती वस्तुएं दान करते हैं। ऐसे में मंदिर में चढ़ावे की रकम के संग्रह, गिनती, रिकॉर्ड और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी पारदर्शिता महत्वपूर्ण विषय है।

दान की नकदी में कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसी ने सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और भेंट की गई वस्तुओं के दस्तावेजों का परीक्षण किया। जांच के निष्कर्षों और आरोपपत्र के आधार पर अब संबंधित अदालत आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।

अब मजिस्ट्रेट की अदालत में आगे बढ़ेगी कानूनी प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिकाओं का निपटारा किए जाने के बाद इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया अयोध्या की संबंधित अदालत में चलेगी। मजिस्ट्रेट आरोपपत्र और उपलब्ध साक्ष्यों का कानून के अनुसार परीक्षण करेंगे तथा आवश्यक न्यायिक आदेश पारित करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उसने इस मामले में किसी भी आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला है। ऐसे में SIT की जांच में सामने आई कथित घटनाओं, बरामद रकम और गवाहों के बयानों का महत्व आगे की न्यायिक कार्यवाही में निर्धारित होगा।

 

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Filed under India Uttar Pradesh

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