चित्रकूट में थलसेना प्रमुख (Army Chief) जनरल उपेंद्र द्विवेदी और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बीच हाल में हुई मुलाकात को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं,
मुख्य बातचीत के बिंदु:
- राममंत्र की दीक्षा:
- जनरल उपेंद्र द्विवेदी अपनी पत्नी सुनीता द्विवेदी के साथ चित्रकूट आए।
- उन्हें वही राममंत्र दीक्षा दी गई जो माता सीता ने हनुमान जी को दी थी, जिससे हनुमान ने लंका विजय की थी।
- गुरु दक्षिणा में मांगा POK:
- दीक्षा के बाद जगद्गुरु ने गुरु दक्षिणा में POK (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) की मांग की।
- इस पर जनरल द्विवेदी ने जवाब दिया:
“गुरुजी, दक्षिणा देना शिष्य का कर्तव्य होता है और मैं इसे पूरा करूंगा। यह काम इस कार्यकाल में ही पूरा हो जाएगा।”
- पाकिस्तान पर तीखा संदेश:
- जगद्गुरु ने कहा कि पाकिस्तान अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहा।
- उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को समझना होगा कि इस बार “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत उसे गंभीर चोट दी गई है और यदि फिर हरकत की, तो परिणाम और भी घातक होंगे।
- POK को जल्द भारत में शामिल होने का दावा:
- जगद्गुरु ने दोहराया कि “हमें POK चाहिए और यह जल्द मिलेगा।”
- उनका मानना है कि यह भारत की सैन्य और आध्यात्मिक दोनों शक्तियों का उद्देश्य है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य कौन हैं?
- जन्म: 14 जनवरी 1950, जौनपुर, उत्तर प्रदेश
- दृष्टिहीन होने के बावजूद:
- 22 भाषाओं के ज्ञाता
- 80 से अधिक ग्रंथों की रचना
- संस्थापक: जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट
- विविध भूमिकाएं: कवि, लेखक, संगीतज्ञ, नाटककार, दार्शनिक, कथावाचक
सारांश:
यह मुलाकात सिर्फ धार्मिक या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि आध्यात्मिक प्रेरणा और राष्ट्रवाद से जुड़ी एक प्रतीकात्मक घटना रही। POK को भारत में शामिल करने की बात को दीक्षा और गुरु-शिष्य संवाद के माध्यम से प्रस्तुत करना एक भावनात्मक और राष्ट्रवादी संदेश देने का तरीका भी माना जा सकता है।