चंडीगढ़ स्थित पंजाब भारतीय जनता पार्टी कार्यालय पर 1 अप्रैल 2026 को हुए ग्रेनेड हमले के मामले में पुलिस ने जिला अदालत में 1465 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस के अनुसार, यह हमला अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि विदेशों में बैठे कथित हैंडलरों और पंजाब के अलग-अलग गाँवों में सक्रिय स्थानीय सहयोगियों द्वारा कई सप्ताह पहले तैयार की गई एक संगठित साजिश का हिस्सा था।
चार्जशीट में दावा किया गया है कि हमले में इस्तेमाल हथियारों और विस्फोटकों को कोडेड संदेशों, एन्क्रिप्टेड ऐप, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, बैंक खातों और गाँव-दर-गाँव काम करने वाले कूरियर नेटवर्क की मदद से आरोपितों तक पहुँचाया गया था।
हमले से 17 दिन पहले आया था व्हाट्सऐप कॉल
चार्जशीट के अनुसार, साजिश की शुरुआत 16 मार्च 2026 को हुई थी। हमले के आरोपित चरणजीत सिंह उर्फ चन्नी को कथित तौर पर पुर्तगाल में बैठे बलजोत सिंह उर्फ जोता का व्हाट्सऐप कॉल आया था।
जोता ने चन्नी को मजारी गाँव स्थित ‘अमेजिंग हेयर सैलून’ से एक पार्सल लेने के निर्देश दिए। इस पार्सल के लिए कथित तौर पर कोडवर्ड ‘दो प्याज और 30 दाने’ का इस्तेमाल किया गया था।
पुलिस का दावा है कि सैलून से पार्सल लेने के बाद चन्नी नवांशहर जिले के भारापुर गाँव पहुँचा और उसने इसे जसवीर सिंह उर्फ जस्सी को सौंप दिया। इसके बाद यह पैकेट कई लोगों के हाथों से होते हुए कथित हमलावरों तक पहुँचा।
पार्सल में मिले दो ग्रेनेड, पिस्तौल और कारतूस
चार्जशीट में दर्ज बयान के अनुसार, गुरतेज सिंह उर्फ तेजी से ‘एंजेला’ नाम के व्यक्ति ने संपर्क किया था। कथित तौर पर इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन ऐप Zangi के माध्यम से उसे पैसों के बदले पार्सल इकट्ठा करने का काम दिया गया।
जब पार्सल खोला गया, तो उसमें कथित तौर पर:
- दो हैंड ग्रेनेड
- एक पिस्तौल
- गोला-बारूद और कारतूस
मिले थे।
इसके बावजूद निर्देश के अनुसार हथियारों की खेप को अगले व्यक्ति तक पहुँचा दिया गया। पुलिस का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय आरोपितों को विदेश भेजने, पैसे देने और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने का लालच दिया गया था।
विदेश में बसाने का दिया गया था लालच
जसवीर सिंह उर्फ जस्सी ने पुलिस को दिए बयान में कथित तौर पर कहा कि पुर्तगाल में बैठे जोता ने उसे विदेश में बसाने का आश्वासन दिया था। बाद में उसे पार्सल को कुछ समय तक अपने पास रखने और फिर दूसरे व्यक्ति को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई।
चार्जशीट के अनुसार, जस्सी को बाद में पता चला कि पार्सल में ग्रेनेड, पिस्तौल और गोला-बारूद था। पुलिस का दावा है कि तब तक वह कथित नेटवर्क के जाल में फँस चुका था।
पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स भेजने का आरोप
पुलिस जाँच में यह भी दावा किया गया है कि हथियारों की यह खेप कोई अकेली घटना नहीं थी। कथित नेटवर्क के कुछ सदस्य इससे पहले पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के माध्यम से भेजी गई हेरोइन, हथियार और गोला-बारूद की खेप भी प्राप्त कर चुके थे।
चार्जशीट में बार-बार सामने आने वाले कथित पैटर्न में शामिल था:
- पाकिस्तान से ड्रोन द्वारा हेरोइन और हथियारों की डिलीवरी
- स्थानीय लोगों द्वारा खेप को सुरक्षित स्थानों पर छिपाना
- विदेशी हैंडलरों से लाइव लोकेशन प्राप्त करना
- रिसीवर की तस्वीर और पहचान साझा करना
- अलग-अलग बैंक खातों में भुगतान भेजना
- काम पूरा होते ही पैसे निकाल लेना
पुलिस का कहना है कि एन्क्रिप्टेड ऐप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल निर्देश देने तथा पहचान छिपाने के लिए किया जाता था।
पहली कोशिश में भीड़ देखकर टाला गया हमला
चार्जशीट के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 को अमनप्रीत सिंह उर्फ अमन और गुरतेज सिंह पहले चंडीगढ़ के सेक्टर-33 स्थित एक कार्यालय के पास पहुँचे थे। वहाँ लोगों की अधिक आवाजाही देखकर उन्होंने कथित तौर पर हमला टाल दिया।
इसके बाद दोनों ने गूगल मैप्स पर पंजाब BJP कार्यालय की लोकेशन खोजी और ऑटो-रिक्शा से सेक्टर 37-A स्थित कार्यालय पहुँचे। आरोप है कि दोनों ने वहाँ लगभग 15 से 20 मिनट तक इंतजार किया।
इसके बाद अमनप्रीत ने कथित तौर पर कार्यालय की बाउंड्री वॉल की ओर ग्रेनेड फेंका, जबकि गुरतेज ने पूरी घटना का मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड किया।
हमले का वीडियो तुरंत विदेशी हैंडलर को भेजा गया
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, ग्रेनेड फेंके जाने के बाद घटना का वीडियो Zangi ऐप के माध्यम से कथित विदेशी हैंडलर को भेज दिया गया।
इसके बाद दोनों आरोपित चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग यानी CTU की बस पकड़कर घटनास्थल से फरार हो गए।
पुलिस का दावा है कि वीडियो भेजना हमले को अंजाम दिए जाने का प्रमाण देने और भुगतान प्राप्त करने की प्रक्रिया का हिस्सा था।
चार्जशीट में किन लोगों के नाम शामिल?
पुलिस की चार्जशीट में चरणजीत सिंह के अलावा कथित साजिश के अलग-अलग चरणों में शामिल निम्न लोगों के नाम बताए गए हैं:
- जसवीर सिंह
- बलविंदर सिंह
- हजनबीर सिंह उर्फ हाजी
- रूबल चौहान
- मनदीप शर्मा
- नवदीप
- इकबाल सिंह
- अमनप्रीत सिंह
- गुरतेज सिंह
इन सभी पर लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
फ्रांस और जर्मनी से भेजे गए डेढ़ लाख रुपये
चार्जशीट में दावा किया गया है कि हमले को अंजाम देने के लिए फ्रांस और जर्मनी में बैठे कथित हैंडलरों ने लगभग डेढ़ लाख रुपये अलग-अलग किस्तों में भेजे थे।
पुलिस के अनुसार, फ्रांस में मौजूद सुरजीत उर्फ सरपंच और जर्मनी में बैठे औजला ने पुर्तगाल में बैठे जोता के साथ मिलकर कथित साजिश को आगे बढ़ाया।
पैसों को अलग-अलग बैंक खातों में भेजा गया और बाद में जल्दी निकाल लिया गया, ताकि वित्तीय लेन-देन की कड़ी को छिपाया जा सके।
CCTV, फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक सबूत चार्जशीट में शामिल
पुलिस ने चार्जशीट में आरोपितों के कथित बयानों के अलावा कई तकनीकी और भौतिक साक्ष्य भी शामिल किए हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- CCTV फुटेज
- मोबाइल फोन से प्राप्त वीडियो
- फोरेंसिक रिपोर्ट
- बैंक ट्रांजैक्शन का विवरण
- कॉल और सोशल मीडिया रिकॉर्ड
- घटनास्थल की वीडियोग्राफी
- क्राइम सीन रीक्रिएशन
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त डेटा
पुलिस ने मामले में गैर-कानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम यानी UAPA, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराएँ लगाई हैं।
क्या हुआ था 1 अप्रैल 2026 को?
1 अप्रैल 2026 की शाम करीब 5 बजे चंडीगढ़ के सेक्टर 37-A स्थित पंजाब BJP कार्यालय के बाहर तेज धमाका हुआ था। घटनास्थल से नीले रंग का एक ग्रेनेड बरामद किया गया था।
हमले के दौरान कार्यालय के बाहर खड़ी कुछ गाड़ियों के शीशे टूट गए थे। हालाँकि इस हमले में किसी बड़ी जनहानि की सूचना सामने नहीं आई थी।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। शुरुआत में खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े सुखजिंदर सिंह बब्बर ने कथित सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हमले की जिम्मेदारी ली थी।
तीन दिन बाद हुई थी पहली गिरफ्तारी
हमले के तीन दिन बाद 4 अप्रैल 2026 को जाँच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली थी। पंजाब पुलिस की क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने रूपनगर के मोरिंडा क्षेत्र से दो मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया था।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों की पहचान अमन सिंह उर्फ भोलू और गुरतेज सिंह के रूप में हुई थी। दोनों कथित तौर पर रत्तनगढ़ गाँव के रहने वाले थे।
उनसे पूछताछ और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर पुलिस ने कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की।
चीन या पाकिस्तान निर्मित ग्रेनेड होने का संदेह
शुरुआती जाँच में सुरक्षा एजेंसियों ने आशंका जताई थी कि हमले में इस्तेमाल ग्रेनेड चीन निर्मित P-86 मॉडल या पाकिस्तान निर्मित GHD2P हैंड ग्रेनेड हो सकता है।
इस श्रेणी के ग्रेनेड को अत्यधिक खतरनाक माना जाता है। बताया गया कि यह 5 से 10 मीटर के दायरे में जानलेवा हो सकता है, जबकि इसके छर्रे लगभग 25 मीटर तक नुकसान पहुँचा सकते हैं।
एजेंसियों को संदेह था कि ग्रेनेड को पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से भारतीय सीमा में पहुँचाया गया था।
संगठित सीमा-पार आतंकी नेटवर्क की जाँच
पुलिस का कहना है कि चार्जशीट में सामने आए तथ्यों से एक संगठित और सीमा-पार नेटवर्क का संकेत मिलता है। इसमें विदेशों में बैठे हैंडलर, स्थानीय कूरियर, ड्रोन से भेजी गई खेप, कोडवर्ड, एन्क्रिप्टेड ऐप और बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया।
हालाँकि चार्जशीट में दर्ज दावे अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। मामले में नामजद व्यक्तियों के विरुद्ध आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं।
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