त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीयों की जड़ें और पीएम मोदी की भावनात्मक श्रद्धांजलि
त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे छोटे द्वीप राष्ट्र में बसे भारतीय समुदाय की कहानी सिर्फ एक प्रवास की नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और संस्कृति के संरक्षण की एक प्रेरणादायक गाथा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दौरे के दौरान गिरमिटिया मजदूरों की विरासत को याद कर उन्हें “एक शाश्वत सभ्यता के संदेशवाहक” कहा। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि कैसे उनके पूर्वजों ने गुलामी जैसी स्थिति, कठिन परिश्रम और अमानवीय हालातों के बावजूद न केवल जीवन जिया, बल्कि जिस भूमि पर बसे, उसे भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध किया।
19वीं सदी में दास प्रथा के खत्म होने के बाद ब्रिटिश साम्राज्य को अपने उपनिवेशों में काम के लिए सस्ते और मेहनती मजदूरों की आवश्यकता थी। ऐसे में भारत से, विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल और दक्षिण भारत से हजारों मजदूरों को ‘गिरमिटिया’ यानी अनुबंध आधारित मजदूरी पर भेजा गया। वर्ष 1845 में फतेल रजाक नामक जहाज से पहली खेप में 217 भारतीय त्रिनिदाद पहुँचे। अनुबंध समाप्त होने पर लौटने का विकल्प लगभग नहीं था, लिहाज़ा अधिकांश वहीं बस गए और त्रिनिदाद की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संरचना का अभिन्न हिस्सा बन गए।
यात्रा की कठिनाइयाँ, काम के दौरान अमानवीय व्यवहार, खराब भोजन और कटु जलवायु इन मजदूरों की नियति बन गई थी। लेकिन समय के साथ इन लोगों ने त्रिनिदाद की राजनीति, व्यापार और प्रशासन में अपने लिए स्थान बनाया। यही कारण है कि आज त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला सुशीला प्रसाद-बिसेसर, जो हिंदू हैं, भारतीय मूल की हैं और बिहार से अपनी जड़ों को जोड़ती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “भारत में लोग प्रधानमंत्री कमला को बिहार की बेटी मानते हैं,” और यह कि “आप गिरमिटिया मजदूरों की संतानें हैं, लेकिन अब अपनी उपलब्धियों और संघर्षों से पहचाने जाते हैं।” उन्होंने इस समुदाय की धार्मिक भावना का भी उल्लेख किया और राम मंदिर निर्माण में उनके योगदान को याद किया — जिसमें श्रद्धा से सरयू जल और शिलाएं भेजी गईं।
आज त्रिनिदाद में नवरात्रि, महाशिवरात्रि, जन्माष्टमी जैसे पर्व उसी श्रद्धा और उल्लास से मनाए जाते हैं जैसे भारत में। वहाँ की सड़कों के नाम बनारस, पटना, दिल्ली जैसे भारतीय शहरों पर रखे गए हैं, जो दर्शाता है कि कैसे गिरमिटिया भारतीयों ने अपनी मिट्टी भले छोड़ी हो, पर संस्कृति और आत्मा को संजोए रखा।
Splendid atmosphere at the community programme in Trinidad & Tobago. https://t.co/qlW5JqaCCl
— Narendra Modi (@narendramodi) July 3, 2025
गिरमिटिया मजदूरों की यह पीढ़ी त्रासदी से ताकत तक का प्रतीक है — जिन्होंने ब्रिटिश उत्पीड़न से उठकर त्रिनिदाद जैसे देशों को सामाजिक समरसता, राजनीतिक चेतना और सांस्कृतिक समृद्धि दी। पीएम मोदी का यह दौरा न केवल भारत-त्रिनिदाद संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि उन लाखों भारतीयों की संघर्षगाथा को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान्यता देता है।