जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद एक बार फिर चरम पर है। पहले पहलगाम में पर्यटकों पर टीआरएफ (द रजिस्टेंस फ्रंट) द्वारा हमला और अब पुंछ जिले में एलओसी के पास बारूदी सुरंग विस्फोट ने देश की सुरक्षा को फिर चुनौती दी है। शुक्रवार को हुए इस ब्लास्ट में एक भारतीय सैनिक की जान गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन टीआरएफ ने ली है, जो लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन माना जाता है और जिसे अमेरिका ने हाल ही में विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया है। इसके बावजूद पाकिस्तान इस संगठन का खुलकर बचाव कर रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में टीआरएफ के उल्लेख का विरोध किया और कहा कि उनके पास कोई सबूत नहीं है कि पहलगाम हमला टीआरएफ ने किया।
भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि टीआरएफ, लश्कर और जैश जैसे संगठनों की गतिविधियां सीमा पार से संचालित होती हैं और ऐसे किसी भी हमले को ‘एक्ट ऑफ वार’ (युद्ध की कार्रवाई) माना जाएगा। पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, जिससे घबराकर पाकिस्तान ने सीजफायर की मांग की थी। अब पुंछ में हुए लैंड माइन ब्लास्ट को लेकर सवाल उठ रहा है कि क्या भारत इसे भी ‘एक्ट ऑफ वार’ मानेगा और फिर से सैन्य प्रतिक्रिया देगा। टीआरएफ की बढ़ती नापाक हरकतें और पाकिस्तान का खुला समर्थन इस बात का संकेत हैं कि भारत को अपनी सुरक्षा रणनीति को और आक्रामक बनाना पड़ सकता है। फिलहाल, भारतीय सेना सतर्क है और सरकार इस घटना पर गंभीरता से विचार कर रही है।