फिडे शतरंज महिला वर्ल्ड कप 2025 में भारत की युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने एक ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए हमवतन कोनेरू हम्पी को टाईब्रेकर में पराजित कर खिताब अपने नाम किया। इस शानदार जीत के साथ ही दिव्या देशमुख फिडे महिला वर्ल्ड कप का खिताब जीतने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं। टूर्नामेंट की शुरुआत में कोई नहीं सोच सकता था कि दिव्या न केवल खिताब जीतेंगी, बल्कि ग्रैंडमास्टर भी बन जाएंगी, लेकिन उन्होंने यह असंभव-सा लगने वाला कारनामा कर दिखाया।
दोनों क्लासिकल मुकाबले ड्रॉ रहने के बाद विजेता का फैसला टाईब्रेकर में हुआ। टाईब्रेकर की पहली बाजी में दिव्या ने सफेद मोहरों से खेलते हुए हम्पी को ड्रॉ पर रोका, जबकि दूसरी बाजी में काले मोहरों से खेलते हुए दो बार की विश्व रैपिड चैंपियन कोनेरू हम्पी को हराया और 2.5-1.5 की बढ़त से खिताब अपने नाम कर लिया। यह मुकाबला अनुभव और युवा ऊर्जा के बीच था, जिसमें दिव्या ने अपने से दोगुनी उम्र की दिग्गज खिलाड़ी को मात दी।
🇮🇳 Divya Deshmukh defeats Humpy Koneru 🇮🇳 to win the 2025 FIDE Women's World Cup 🏆#FIDEWorldCup @DivyaDeshmukh05 pic.twitter.com/KzO2MlC0FC
— International Chess Federation (@FIDE_chess) July 28, 2025
जीत के बाद भावुक दिव्या ने कहा, “मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि मैं ग्रैंडमास्टर बन गई हूं। टूर्नामेंट की शुरुआत में मेरे पास एक भी ग्रैंडमास्टर नॉर्म नहीं था और अब मैं इस मुकाम पर हूं। यह सब किसी सपने जैसा है।”
इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही दिव्या देशमुख भारत की चौथी महिला ग्रैंडमास्टर बन गई हैं। उनसे पहले कोनेरू हम्पी, डी हरिका और आर वैशाली को यह सम्मान प्राप्त है। दिव्या की इस जीत ने भारतीय महिला शतरंज को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है और एक नई प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।
🇮🇳 Divya Deshmukh wins the 2025 FIDE Women’s World Cup! 🏆
🥇 Divya Deshmukh 🇮🇳
🥈 Humpy Koneru 🇮🇳
🥉 Tan Zhongyi 🇨🇳
Results – Final:
🇮🇳 Divya Deshmukh 2.5-1.5 Humpy Koneru 🇮🇳
🇨🇳 Tan Zhongyi 1.5-0.5 Lei Tingjie 🇨🇳#FIDEWorldCup pic.twitter.com/NDtnO4pPXU
— International Chess Federation (@FIDE_chess) July 28, 2025
इसके साथ ही दिव्या ने अगले वर्ष होने वाले कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए भी क्वालिफाई कर लिया है, जहां यह तय होगा कि कौन महिला विश्व चैंपियन जू वेनजुन (चीन) को चुनौती देगा। हम्पी ने फाइनल में अंत तक संघर्ष किया, लेकिन युवा दिव्या की रणनीति और धैर्य के आगे उन्हें हार स्वीकार करनी पड़ी। इस जीत के बाद दिव्या की आंखों से आंसू छलक पड़े — यह न केवल जीत का भाव था, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और विश्वास की जीत भी थी।
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