सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में चल रही वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (Special Intensive Revision – SIR) पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। यह प्रक्रिया बिहार में चुनाव आयोग द्वारा संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। इसमें फर्जी वोटिंग रोकने, डुप्लिकेट नामों को हटाने और असत्यापित प्रविष्टियों को ठीक करने पर जोर दिया जा रहा है।
इस प्रक्रिया को लेकर कुछ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सवाल उठाया था कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कौन-कौन से पहचान पत्र वैध माने जाएंगे? साथ ही यह आशंका भी जताई गई थी कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और कुछ पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटाए जा सकते हैं। इसलिए उन्होंने मांग की कि जब तक पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित न हो, तब तक इस प्रक्रिया को स्थगित किया जाए।
Supreme Court again asks Election Commission to consider including Aadhaar card and electoral photo identity card as admissible documents to prove identity of voters during Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls being undertaken in Bihar.
Supreme Court asks parties…
— ANI (@ANI) July 28, 2025
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है और इसे फिलहाल जारी रहने देना चाहिए। हालांकि, अदालत ने चुनाव आयोग को एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया – कि वह इस प्रक्रिया के दौरान आधार कार्ड और वोटर ID कार्ड को वैध पहचान पत्र के रूप में औपचारिक रूप से स्वीकार करने पर विचार करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि पहचान संबंधी नियमों की स्पष्टता से भ्रम की स्थिति समाप्त होगी और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, याचिकाकर्ताओं और बिहार सरकार से यह भी पूछा कि उन्हें अपनी-अपनी दलीलें रखने में कितना समय लगेगा। इसके बाद मंगलवार को इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। कुल मिलाकर, अदालत ने संतुलित रुख अपनाते हुए SIR प्रक्रिया को नहीं रोका, लेकिन उसमें पहचान के दस्तावेजों को लेकर अधिक पारदर्शिता और स्पष्टता लाने पर बल दिया।