उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी गरीबों के लिए बड़ी राहत देते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत 2.5 लाख आवासों की निर्माण राशि को मंजूरी दे दी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 735.94 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों का अंश शामिल है। इस फैसले से लाखों परिवारों को पक्का और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक मजबूत कदम उठाया गया है।
निर्माण कार्य में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हर आवास की जियो टैगिंग, फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य कर दी गई है। साथ ही, भवन निर्माण कार्य राष्ट्रीय भवन संहिता और आपदा-रोधी मानकों के तहत ही किया जाएगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि फंड का गलत इस्तेमाल हुआ तो ब्याज सहित पूरी राशि भारत सरकार को लौटानी होगी। इसके लिए राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) और जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) को अन्य स्रोतों से फंड न मिलने की पुष्टि भी करनी होगी।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश को इस योजना के तहत 2,52,605 आवास आवंटित हुए हैं। वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में यूपी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय औसत 299 दिनों की तुलना में राज्य ने केवल 195 दिनों में आवास पूरे कर मिसाल पेश की है। 2016-17 से 2024-25 तक 36.57 लाख आवासों के लक्ष्य में से 36.34 लाख आवास बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि शेष पर तेजी से काम जारी है। मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में भी 3.73 लाख घरों के लक्ष्य के मुकाबले 3.51 लाख पूरे हो चुके हैं और 22 हजार घर निर्माणाधीन हैं।
यूपी ने 99.37% उपलब्धि हासिल कर देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। हालांकि, लक्ष्य कम होने के कारण सिक्किम पहले स्थान पर है। भारत सरकार के परफॉर्मेंस इंडेक्स में उत्तर प्रदेश कई मानकों पर पहले स्थान पर रहा है—जैसे राजमिस्त्री प्रशिक्षण, सोशल ऑडिट, एरिया ऑफिसर ऐप पर निरीक्षण, पात्र लाभार्थियों को भूमि पट्टा देना और आवास पूर्णता।
तैयार घरों को कन्वर्जेन्स के जरिए बुनियादी सुविधाओं से भी जोड़ा गया है। अब तक 99.39% घरों में शौचालय, 93.31% में बिजली, 94.42% में गैस और 80.02% में पेयजल कनेक्शन उपलब्ध करा दिया गया है। इससे प्रधानमंत्री आवास अब केवल छत नहीं बल्कि पूरी सुविधाओं से युक्त घर बन गए हैं। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने हाल की बैठक में निर्देश दिए कि शेष घरों का निर्माण तेजी और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए तथा लाभार्थियों को पेंशन व अन्य योजनाओं से भी जोड़ा जाए।
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