नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने शनिवार 14 सितंबर 2025 को पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के बिहार राज्य अध्यक्ष महबूब आलम, जिन्हें महबूब आलम नदवी भी कहा जाता है, को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी 2022 के फुलवारीशरीफ़ आपराधिक साजिश मामले से जुड़ी जांच के सिलसिले में की गई है।
महबूब आलम कटिहार जिले के हसनगंज इलाके के रहने वाले बताए गए हैं और उन्हें किशनगंज से गिरफ्तार किया गया। NIA के अनुसार वह उन 26 आरोपितों में से 19वें व्यक्ति हैं जिनके खिलाफ इस मामले में गिरफ्तारी और चार्जशीट दायर की गई थी। यह केस PFI की उन गतिविधियों से जुड़ा है जिनका लक्ष्य धार्मिक नफ़रत फैलाकर समाज में भय पैदा करना और देश-विरोधी साज़िशें रचना बताया गया है।
एजेंसी ने बताया कि आरंभिक रिपोर्टों और जांच से यह निष्कर्ष निकला है कि आरोपित अवैध और देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल थे, जिनके उद्देश्य में धार्मिक उन्माद भड़काना, समाज में अशांति फैलाना और हिंसा को बढ़ावा देना शामिल था। यह मुकदमा सबसे पहले स्थानीय पुलिस द्वारा 26 संदिग्धों के खिलाफ दर्ज किया गया था और बाद में NIA ने विस्तृत जांच की।
PFI Bihar State President Arrested by NIA in Phulwarisharif Criminal Conspiracy Case pic.twitter.com/PuHc5ibreU
— NIA India (@NIA_India) September 13, 2025
जाँच में यह भी सामने आया कि महबूब आलम और कुछ अन्य आरोपित PFI के एक रहस्यमयी विजन डॉक्यूमेंट पर काम कर रहे थे — वह दस्तावेज़ जो 11 जुलाई 2022 को फुलवारीशरीफ़ के अहमद पैलेस से बरामद हुआ था। NIA ने कहा कि इस दस्तावेज़ में संगठन की गुप्त योजना और रणनीतियों का उल्लेख था।
एजेंसी के आरोप हैं कि आलम ने भर्ती, ट्रेनिंग, बैठकें और अन्य देश-विरोधी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की; साथ ही उन्होंने फंड जुटाने और उसे साथियों व PFI कार्यकर्ताओं तक पहुँचाने का काम भी किया। इस मामले की जाँच भारतीय दंड संहिता (BNS) और UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत जारी है।
जाँच में मिले दस्तावेज़ों में एक प्रमुख कहानी — “इंडिया विजन 2047” — का जिक्र है। बिहार पुलिस ने जुलाई 2022 में आठ पन्नों का वह दस्तावेज़ जब्त किया था, जिसमें कथित तौर पर 2047 तक भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने की योजना का रोडमैप लिखा था। दस्तावेज़ में कहा गया था कि केवल 10% मुस्लिम समर्थन से भी वे बहुसंख्यक समुदाय को दबाकर अपना वर्चस्व कायम कर सकते हैं — और भर्ती व प्रशिक्षण पर विशेष जोर था।

उस विजन डॉक्यूमेंट में बताया गया कि एक पीई (PE) विंग बनाकर भर्ती को तलवार, डंडे और अन्य हथियारों की ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे आक्रामक व रक्षात्मक दोनों तरह की गतिविधियों में काम आ सकें। साथ ही सरकारी विभागों, कोर्ट, पुलिस और सेना में विश्वासी मुसलमानों को घुसाने की रणनीति, विरोधियों को अलग-थलग करने या “ज़रूरत पड़ने पर हटाने” जैसी बातें भी शामिल थीं। मीडिया आउटरीच, हर इलाके में मौजूदगी और परिवार/संघ के नेताओं के खिलाफ जानकारी जुटाने जैसी रणनीतियाँ भी दस्तावेज़ में थीं।
दस्तावेज़ में विदेशों — विशेषकर तुर्की जैसे मित्र इस्लामी देशों — से मदद लेकर हथियारबंद विद्रोह खड़ा करने की बात भी उठाई गई; यहाँ तक कि कथित तौर पर प्रधानमंत्री पर हमले का जिक्र भी था। इन खुलासों के बाद NIA ने कई राज्यों में छापेमारी की, जिनमें बम बनाने के मैनुअल, ट्रेनिंग मॉड्यूल, विजन 2047 डॉक्यूमेंट और एक सीडी जैसी सामग्री जब्त की गई।
इन उपलब्धियों व सबूतों के आधार पर केंद्र सरकार ने सितंबर 2022 में PFI और उसके कुछ सहयोगी संगठनों पर पाँच साल का प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार ने कहा कि ये संगठन UAPA के तहत अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए गए हैं; बैन किए गए सहयोगी संगठनों में ऑल इंडिया इमाम्स काउंसिल, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), रहाब इंडिया फाउंडेशन, NCHRO, नेशनल वीमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और केरल स्थित रहाब फाउंडेशन जैसी संस्थाएँ शामिल थीं।
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