केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को एक बड़े बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार देशभर में 25 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण कर रही है। इन एक्सप्रेसवेज़ की कुल लंबाई 10,000 किलोमीटर होगी और इसके निर्माण पर लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह एक्सप्रेसवे देश के प्रमुख औद्योगिक, कृषि और व्यापारिक केंद्रों को जोड़ने के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। गडकरी ने कहा कि यह परियोजनाएँ ‘भारत माला परियोजना’ के तहत विकसित की जा रही हैं, जिससे परिवहन व्यवस्था को और अधिक तेज, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकेगा।
पीएचडीसीसीआई के 120वें वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए गडकरी ने यह भी बताया कि भारत के रणनीतिक महत्व वाली जोज़िला सुरंग (Zojila Tunnel) का लगभग 75 से 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। यह सुरंग जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से लद्दाख क्षेत्र को सालभर सड़क मार्ग से जोड़ने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि इस सुरंग के पूर्ण होने के बाद लद्दाख क्षेत्र को बाकी भारत से हर मौसम में जोड़ा जा सकेगा, जिससे सेना की आवाजाही, पर्यटन और व्यापार सभी को लाभ होगा।
गडकरी ने बताया कि अगर सड़क परिवहन मंत्रालय अपनी सड़क परियोजनाओं का मुद्रीकरण (Monetization) करता है, तो सरकार को इससे करीब 15 लाख करोड़ रुपये की आय हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि निजी निवेशकों को भी इस क्षेत्र में अधिक अवसर मिले ताकि सड़क बुनियादी ढांचा तेजी से विकसित हो सके।
मंत्री ने इस अवसर पर यह भी बताया कि एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों के विकास ने भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को 16 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया है। गडकरी ने कहा कि दिसंबर 2025 तक यह लागत 9 प्रतिशत तक घट जाएगी। इससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में भारी सुधार होगा। उन्होंने तुलनात्मक उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका और यूरोपीय देशों में लॉजिस्टिक्स लागत 12 प्रतिशत के आसपास है, जबकि चीन में यह 8 से 10 प्रतिशत के बीच है। भारत अब उस स्तर तक पहुँचने की दिशा में अग्रसर है।
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग पर बात करते हुए गडकरी ने कहा कि अगले पांच वर्षों में भारत को विश्व का नंबर 1 ऑटोमोबाइल हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है। जब उन्होंने सड़क परिवहन मंत्रालय का कार्यभार संभाला था, तब भारत का ऑटोमोबाइल क्षेत्र लगभग 14 लाख करोड़ रुपये का था, जो अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये का हो गया है। यह उद्योग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 4 लाख युवाओं को रोजगार दे रहा है और केंद्र तथा राज्य सरकारों को सबसे अधिक जीएसटी राजस्व प्रदान करता है। वर्तमान में अमेरिका का ऑटोमोबाइल क्षेत्र 78 लाख करोड़ रुपये, चीन का 47 लाख करोड़ रुपये और भारत का 22 लाख करोड़ रुपये के आकार का है, लेकिन भारत इस अंतर को तेजी से कम कर रहा है।
गडकरी ने ईंधन आयात पर भारत की निर्भरता को देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ बताया। उन्होंने कहा कि हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर खर्च हो जाते हैं। यह न केवल विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालता है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है। इसलिए सरकार का लक्ष्य स्वदेशी और स्वच्छ ऊर्जा जैसे एथनॉल, बायो-सीएनजी, हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है।
उन्होंने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र को ऊर्जा और जैव ईंधन उत्पादन से जोड़ना देश की आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है। किसानों ने अब मक्का, गन्ना और अन्य फसलों से एथनॉल उत्पादन कर लगभग 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की है। यह मॉडल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता घटाने में मददगार साबित होगा।
गडकरी ने अपने भाषण के अंत में कहा कि दिल्ली और अन्य महानगरों में वायु प्रदूषण एक गंभीर चुनौती है, और इसे कम करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। स्वच्छ ऊर्जा वाहनों, हरित एक्सप्रेसवेज़ और जैव ईंधन को अपनाकर भारत पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास – दोनों लक्ष्यों को एक साथ हासिल कर सकता है।
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