भारत के लिए 26 नवंबर एक गर्व और ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि इसी दिन साल 1949 में भारतीय संविधान को अपनाया गया। संविधान के मसौदे को 29 अगस्त 1947 को डॉ. भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में तैयार किया गया था। संविधान सभा का गठन हुआ और 26 नवंबर 1950 को लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली लागू की गई। संविधान की मूल प्रति, जिसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार किया गया था, किसी मशीन से नहीं छापी गई थी, बल्कि इसे पूरी तरह हाथ से लिखा गया। इस महान कार्य के लिए जिम्मेदारी प्रेम बिहारी नारायण रायजादा को दी गई, जो एक प्रसिद्ध कैलिग्राफी आर्टिस्ट थे।

संविधान के पन्नों को सजाने का कार्य शांतिनिकेतन के कलाकारों को सौंपा गया था। संविधान सभा के प्रमुख सदस्य पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. भीमराव अंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभभाई पटेल और मौलाना अबुल कलाम आजाद थे। यह सभा का निर्णय था कि संविधान को मशीन से प्रिंट करवाने के बजाय इसे हाथों से लिखा जाए, और इसके लिए रायजादा को जिम्मेदारी सौंपी गई। रायजादा का खानदानी पेशा कैलिग्राफी का था और 1901 में दिल्ली में जन्मे उन्होंने अपने पूरा संविधान बिना किसी गलती के हाथों से लिखा।


रायजादा ने इस काम के लिए एक भी पैसा नहीं लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से कहा कि उन्हें कोई फीस नहीं चाहिए, लेकिन उनकी एक शर्त थी कि संविधान के हर पन्ने पर उनका नाम अंकित किया जाए और अंतिम पन्ने पर अपने दादा मास्टर रामप्रसादजी सक्सेना का नाम लिखा जाए। इस काम के लिए हाथ से बने कागज पुणे से मंगवाए गए और रायजादा ने इसे तैयार करने के लिए 303 निब वाले कलम और 254 बोतल स्याही का इस्तेमाल किया।

संविधान के लिखित पन्नों को शांति निकेतन के नंदलाल बोस की अगुवाई वाली टीम ने कला और सौंदर्य के साथ सजाया। भारतीय इतिहास, संस्कृति और अनुभवों को इन पन्नों में कलात्मक रूप से दर्शाया गया। पूरे 6 महीनों के कठिन परिश्रम के बाद यह लिखित संविधान तैयार हुआ, और जनवरी 1950 में संविधान सभा के सभी 299 सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किए। प्रेम बिहारी नारायण रायजादा का यह योगदान न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि उनकी निःस्वार्थ सेवा और कला की कुशलता भारतीय लोकतंत्र की एक अमूल्य विरासत बन गई।
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