भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर देगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हाल ही में किसी प्रकार की फोन कॉल या बातचीत नहीं हुई है। जायसवाल ने कहा, “मुझे कल दोनों नेताओं के बीच किसी फोन कॉल या बातचीत की कोई जानकारी नहीं है।” वहीं ट्रंप ने वॉशिंगटन में मीडिया से बातचीत में कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें आश्वस्त किया है कि रूस से तेल की खरीद बंद कर दी जाएगी, हालांकि इसमें थोड़ा समय लगेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर आर्थिक दबाव डालना है ताकि यूक्रेन में चल रहा युद्ध समाप्त हो और हत्याओं को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि यह युद्ध पहले ही समाप्त हो जाना चाहिए था, लेकिन अब यह चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
जवाब में विदेश मंत्रालय ने भारत की ऊर्जा नीति को स्पष्ट करते हुए बताया कि भारत हमेशा अपने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और ऊर्जा की कीमतों को स्थिर रखने पर केंद्रित रहा है। भारत तेल और गैस का एक बड़ा आयातक देश है और इसकी प्राथमिकता यह है कि वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारतीय नागरिकों को सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित हो। इसके लिए भारत विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा आयात बढ़ाने और खरीद के विकल्पों को विस्तारित करने पर काम कर रहा है। जायसवाल ने यह भी बताया कि भारत की नीति राष्ट्रीय हितों से प्रेरित है और इसमें विदेशी दबाव या किसी अन्य देश की मांग प्राथमिकता नहीं है।
#WATCH | Delhi | On US President Trump’s statement over purchase of Russian oil by India, MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "… On the question of whether there was a conversation or a telephone call between Prime Minister Modi and President Trump, I am not aware of any… pic.twitter.com/CqjfqCEO0p
— ANI (@ANI) October 16, 2025
हालांकि रूस से तेल खरीदने के मामले को लेकर भारत और अमेरिका के बीच तनाव की खबरें भी सामने आई हैं। अमेरिका का आरोप है कि भारत की रूसी तेल खरीद पुतिन को यूक्रेन युद्ध के लिए आर्थिक मदद प्रदान कर रही है। इसी मुद्दे को लेकर हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने भारत से आयातित कुछ वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया, जिसमें रूस से तेल खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। भारत ने इस कदम को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यवहारिक” करार दिया है और स्पष्ट किया है कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुसार स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम है और किसी विदेशी दबाव के तहत यह निर्णय नहीं लिया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और विदेशों के दबाव या राजनीतिक दावों के आधार पर अपनी नीति नहीं बदलता। ट्रंप के दावों और अमेरिकी टैरिफ की कार्रवाई के बावजूद भारत का रुख स्पष्ट है कि वह ऊर्जा खरीद को लेकर स्वतंत्र और संतुलित निर्णय करेगा, जिससे भारतीय नागरिकों और अर्थव्यवस्था के लिए स्थिर और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध रहे।
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