सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने वैश्विक संकेतों के बीच मिलाजुला रुख दिखाया। निवेशकों में सतर्कता का माहौल है क्योंकि इस पूरे हफ्ते करीब 200 बड़ी कंपनियां अपने दूसरी तिमाही (Q2 FY25) के नतीजे पेश करने वाली हैं, जिनका असर बाजार की दिशा पर निर्णायक रहेगा। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही दबाव में खुले थे। ओपनिंग में सेंसेक्स लगभग 217 अंकों की गिरावट के साथ 83,700 के करीब पहुंच गया था, जबकि निफ्टी भी 25,675 के स्तर तक फिसला। हालांकि, थोड़ी देर बाद बाजार ने निचले स्तरों से रिकवरी दिखाई। सुबह करीब 9:45 बजे तक सेंसेक्स 29 अंक की मामूली गिरावट के साथ 83,900 के स्तर पर और निफ्टी 5 अंकों की हल्की बढ़त के साथ 25,726 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। निफ्टी ने 25,650 के निचले स्तर से उभरते हुए मजबूती दिखाई, जिससे संकेत मिलता है कि फिलहाल 25,711 का स्तर बुल्स के लिए अहम सपोर्ट बना हुआ है। मार्केट विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी फिलहाल 25,700 से 26,100 के दायरे में सीमित रह सकता है, जब तक कोई बड़ा ट्रिगर नहीं आता।
सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो, बैंकिंग सेक्टर ने बाजार को सहारा दिया है। बैंक निफ्टी में हल्की तेजी देखने को मिली, जिसमें आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक जैसे प्रमुख बैंकों के शेयरों में खरीदारी का रुझान रहा। इन दिग्गज बैंकों की मजबूती ने बाजार को गिरावट से उबरने में मदद की। दूसरी ओर, आईटी, एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर में बिकवाली का दबाव हावी रहा। मुनाफावसूली के चलते इन सेक्टरों के शेयरों में गिरावट आई, जिससे बाजार की कुल भावना थोड़ी कमजोर रही।
शेयर स्तर पर, शुरुआती कारोबार में कुछ स्टॉक्स में तेज गिरावट देखने को मिली। निफ्टी 500 के प्रमुख लूजर्स में नेटवेब टेक, जेनसर टेक्नोलॉजीज, चेन्नई पेट्रोलियम और ब्लूडार्ट जैसे शेयर शामिल रहे, जिनमें 2% से 5% तक की गिरावट दर्ज की गई। इन स्टॉक्स में गिरावट की वजह निवेशकों की सतर्कता और नतीजों से पहले की पोजिशन एडजस्टमेंट मानी जा रही है।
बाजार अब पूरी तरह से कॉरपोरेट अर्निंग सीजन की दिशा पर निर्भर रहेगा। इस हफ्ते कई बड़ी कंपनियों के नतीजे आने हैं, जिनमें भारती एयरटेल, टाइटन कंपनी, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों के तिमाही परिणाम निवेशकों के सेंटीमेंट पर गहरा असर डाल सकते हैं और बाजार की आगे की चाल तय करेंगे।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल बाजार कंसोलिडेशन फेज में है। वैश्विक संकेत कमजोर हैं — खासकर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार उतार-चढ़ाव और डॉलर इंडेक्स की मजबूती भारतीय इक्विटी मार्केट पर दबाव डाल रही है। हालांकि, घरेलू स्तर पर बैंकिंग सेक्टर की मजबूती और डीआईआई (डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स) की लगातार खरीदारी बाजार को सपोर्ट दे रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक निफ्टी 25,700 के ऊपर टिके रहने में सफल रहता है, तब तक बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है। लेकिन अगर यह स्तर टूटता है, तो 25,500 तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं, 26,000 का स्तर ऊपर की ओर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस बना हुआ है।
कुल मिलाकर, सोमवार को बाजार ने सावधानीपूर्ण शुरुआत की है। नतीजों का सीजन और वैश्विक आर्थिक संकेत अगले कुछ सत्रों में बाजार की दिशा तय करेंगे, जबकि बैंकिंग सेक्टर में मजबूती फिलहाल निवेशकों के भरोसे को बनाए हुए है।
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