पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान (23 अप्रैल 2026) से ठीक पहले राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में कथित हस्तक्षेप को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी मुख्यमंत्री का जांच के दौरान हस्तक्षेप करना बेहद गंभीर मामला है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि “कानून बनाने वालों ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब कोई मुख्यमंत्री खुद जांच रोकने के लिए मौके पर पहुंच जाएगा।”
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 8 जनवरी की उस घटना से जुड़ा है, जब Enforcement Directorate की टीम कोलकाता में I-PAC (Indian Political Action Committee) के दफ्तर पर छापेमारी कर रही थी। आरोप है कि इस दौरान ममता बनर्जी खुद वहां पहुंचीं और जांच से जुड़े दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हटवा दिए।
कोर्ट ने इस स्थिति को “असाधारण” बताते हुए कहा कि बंगाल की जमीनी हकीकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि राज्य में पहले न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने जैसी घटनाएं भी हो चुकी हैं।
ED का आरोप और जांच पर असर
ED के मुताबिक, यह कार्रवाई कोयला तस्करी मामले में अनूप माजी से जुड़े ठिकानों पर की जा रही थी। एजेंसी का कहना है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के कारण कई अहम सबूत नष्ट हो गए, जिससे जांच प्रभावित हुई।
CBI जांच की मांग और कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ED की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों के खिलाफ CBI जांच की मांग की गई है। कोर्ट ने ममता पक्ष की उस दलील को भी खारिज कर दिया, जिसमें मामले को बड़ी बेंच को भेजने की मांग की गई थी।
चुनाव से पहले बढ़ी सियासी चुनौती
चुनाव से ठीक पहले कोर्ट की इन सख्त टिप्पणियों ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह मुख्यमंत्री ही क्यों न हो।
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