पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर की एक ट्रायल कोर्ट ने सोमवार (22 दिसंबर 2025) को 72 वर्षीय हरगोबिंदो दास और उनके 40 वर्षीय बेटे चंदन दास की हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने इस जघन्य दोहरे हत्याकांड में दोषी पाए गए 13 आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह घटना 12 अप्रैल 2025 को धुलियान इलाके में हुई थी, जब एक उग्र भीड़ ने पिता और बेटे को उनके घर से घसीटकर बाहर निकाला और बेरहमी से हत्या कर दी।
दोषियों की पहचान दिलदार नदाब, अस्माउल नदाब उर्फ कालू नदाब, इंजामुल हक, जियाउल हक, फेकारुल शेख, अजफरुल शेख उर्फ बिलाई, मोनिरुल शेख, एकबाल शेख, नुरुल शेख, सबा करीम, हजरत शेख, हरजत अली, अकबर अली उर्फ एकबर शेख और यूसुफ शेख उर्फ शेख यूसुफ के रूप में हुई है।
इन सभी आरोपितों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(2), 310(2), 331(5), 191(3), 115(2), 126(2), 332(a) और 3(5) के तहत दोषी ठहराया गया। जंगीपुर उपमंडल न्यायालय के जज अमिताभ मुखोपाध्याय ने 23 दिसंबर 2025 को सजा का ऐलान करते हुए सभी को आजीवन कारावास दिया।
विशेष लोक अभियोजक बिवास चटर्जी ने बताया कि आरोपितों को हत्या, डकैती, जबरन घर में घुसपैठ, घातक हथियारों से दंगा, चोट पहुँचाने और अवैध रूप से बंधक बनाने सहित कई गंभीर धाराओं में दोषी पाया गया। उन्होंने कहा कि बंगाल में दोहरे हत्याकांड के मामलों में यह सबसे तेज सुनाए गए फैसलों में से एक है। मामले की जांच 25 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) ने की थी, जिसने तीन राज्यों में छापेमारी कर 983 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की।
इस मामले को लेकर पीड़ित परिवार पहले ही कलकत्ता हाईकोर्ट में CBI जांच की मांग को लेकर याचिका दाखिल कर चुका है, जिस पर सुनवाई अभी लंबित है। हरगोबिंदो दास की पत्नी ने कहा कि अदालत के फैसले के बाद ही वे आगे की कानूनी रणनीति तय करेंगे।
West Bengal under Mamata Banerjee is increasingly unsafe for Hindu Bengalis, who are facing targeted violence.
The brutal murder of the father–son duo Hargobinda Das and Chandan Das during the communal riots in Murshidabad is a deeply disturbing reminder of this reality.
— Amit Malviya (@amitmalviya) December 23, 2025
फैसले के बाद BJP नेता अमित मालवीय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ममता बनर्जी के शासन में पश्चिम बंगाल हिंदू बंगालियों के लिए लगातार असुरक्षित होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिता-पुत्र की भीड़ द्वारा की गई हत्या राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था का भयावह उदाहरण है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि इस हत्या का वक्फ संशोधन कानून से कोई सीधा संबंध नहीं था।
मालवीय ने आरोप लगाया कि इस मामले को लेकर लोगों को गुमराह करने और असली जिम्मेदारी से ध्यान भटकाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि सजा मिलने से पीड़ित परिवार का नुकसान तो पूरा नहीं हो सकता और न ही इससे राज्य में रह रहे हिंदुओं के मन से डर खत्म होगा। उन्होंने कानून-व्यवस्था और समान सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।
दिवंगत हरगोबिंदो दास की पत्नी पारुल दास ने घटना को याद करते हुए उस भयावह मंजर का जिक्र किया था। उन्होंने बताया कि सबसे पहले भीड़ ने उनकी दुकान में तोड़फोड़ कर लूटपाट की, फिर रसोई को नुकसान पहुँचाया और बाद में पत्थर, काँच और बोतलें फेंकी गईं। तीसरी बार जब भीड़ लौटी तो उनके हाथों में फावड़े, बेलचे और धारदार हथियार थे।
पारुल दास के अनुसार, भीड़ ने उनके पति और बेटे को घर से घसीटकर बाहर निकाला। उनके पति को नाले के पास और बेटे को एक पेड़ के नीचे मार डाला गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस चार घंटे बाद पहुँची और अगर समय पर कार्रवाई होती तो दोनों की जान बच सकती थी।
उन्होंने यह भी कहा कि उनका परिवार आज भी डर के साए में जी रहा है और उन्हें इलाके में BSF कैंप की जरूरत है। साथ ही, उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के कुछ लोगों पर परेशान करने के आरोप भी लगाए।
यह घटना उस समय हुई थी, जब पश्चिम बंगाल में वक्फ संशोधन कानून को लेकर हिंसा फैल रही थी। 11 और 12 अप्रैल को मुर्शिदाबाद जिले के कई इलाकों में हालात बेकाबू हो गए थे। घरों और गाड़ियों में आगजनी की गई और बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए।
जांच में सामने आया कि इसी अशांत माहौल का फायदा उठाकर 13 आरोपितों ने इस वारदात को अंजाम दिया, जबकि यह हत्या सीधे तौर पर आंदोलन से जुड़ी नहीं थी। SIT की चार्जशीट में यह भी बताया गया कि पास की एक मस्जिद पर फायरिंग की अफवाह फैलने के बाद भीड़ और उग्र हो गई थी।
घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे पूर्व-नियोजित बताते हुए हिंसा के लिए BJP और केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी BSF की है और अशांति के लिए केंद्र जवाबदेह है। साथ ही, उन्होंने वक्फ संशोधन कानून को खतरनाक बताते हुए इसे लागू न करने की अपील की।
ममता बनर्जी ने BJP और RSS पर भी आरोप लगाए कि वे झूठ और भ्रम फैलाकर राज्य में विभाजन की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंसा की आड़ में राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है।
आलोचकों का कहना है कि राज्य सरकार और प्रशासन अफवाहों को रोकने और हालात काबू में करने में विफल रहे। पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे, लेकिन सरकार ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी को तरजीह दी।
निष्कर्ष तौर पर, यह साफ है कि एक उग्र भीड़ की दरिंदगी में दास परिवार के दो निर्दोष लोगों की जान चली गई। अदालत ने दोषियों को सजा सुनाकर न्याय की दिशा में कदम जरूर उठाया है, लेकिन इस घटना ने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था, अल्पसंख्यक सुरक्षा और प्रशासनिक विफलता को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
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