संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। भारत ने कहा कि पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकी हमलों में हजारों भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है और आतंकवाद को किसी भी रूप में सामान्य या वैध नहीं ठहराया जा सकता। भारत ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच पाकिस्तान के लिए आतंकवाद को जायज ठहराने का साधन नहीं बन सकता।
भारत ने अपने बयान में पाकिस्तान की दोहरी नीति को उजागर करते हुए कहा कि उसे भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। भारत ने दोहराया कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा। साथ ही यह भी कहा गया कि दशकों से पाकिस्तान आतंकवाद को एक नीति के रूप में इस्तेमाल करता आ रहा है, जिससे भारत को भारी मानवीय नुकसान उठाना पड़ा है।
#WATCH | Permanent Representative of India to the United Nations, Parvathaneni Harish, says, "I now respond to the comments of the representative of Pakistan, an elected member of the Security Council, which has a single-point agenda to harm my country and my people. He has… pic.twitter.com/I8pX4tt1zl
— ANI (@ANI) January 27, 2026
भारत ने यह भी याद दिलाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वही पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मदद और रहम की गुहार लगा रहा था, जबकि लंबे समय से वह भारत के खिलाफ सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है। भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।
सिंधु जल संधि के संदर्भ में भारत ने कहा कि उसने 65 वर्ष पहले इस समझौते को सद्भावना, मित्रता और अच्छे पड़ोसी संबंधों की भावना से स्वीकार किया था। लेकिन बीते साढ़े छह दशकों में पाकिस्तान ने इस संधि की भावना का लगातार उल्लंघन किया—जिसमें भारत पर तीन युद्ध थोपना और हजारों आतंकी हमलों को बढ़ावा देना शामिल है।
इन परिस्थितियों का हवाला देते हुए भारत ने कहा कि उसे सिंधु जल संधि को तब तक स्थगित रखने का निर्णय लेना पड़ा है, जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद और उसके सभी रूपों को विश्वसनीय तथा अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं करता। भारत ने पाकिस्तान को कानून के शासन पर आत्ममंथन करने की सलाह देते हुए उसकी संवैधानिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
अंत में भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और भरोसेमंद कदम नहीं उठाता, तब तक उसके दावों पर विश्वास नहीं किया जाना चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को कभी भी सामान्य नहीं किया जा सकता और न ही किसी भी रूप में उसे जायज ठहराया जा सकता है।
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