अमेरिका ने मिडिल ईस्ट (Middle East) में अपनी सैन्य शक्ति (military strength) तेजी से बढ़ा दी है। पिछले 24 घंटों में 50 से ज्यादा अमेरिकी फाइटर जेट (F-35, F-22, F-16) क्षेत्र में तैनात किए गए। इस कदम को ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका और ईरान (Iran) के बीच परमाणु कार्यक्रम (nuclear program) को लेकर कूटनीतिक बातचीत चल रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स (X)’ पर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के ट्रुथ सोशल ने भी इसकी पुष्टि की और लिखा कि “F-35, F-22 और F-16 समेत 50 से अधिक अमेरिकी फाइटर जेट विमानों को 24 घंटे के भीतर मिडिल ईस्ट भेजा गया है।”
BREAKING:
🇺🇸🇮🇷 Over 50 U.S. fighter jets, including F-35s, F-22s, and F-16s, have been sent to the Middle East within 24 hours. pic.twitter.com/2GsoPaYBWj
— Commentary: Trump Truth Social Posts On X (@TrumpTruthOnX) February 17, 2026
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फाइटर जेटों के अलावा एयर रिफ्यूलिंग टैंकर (air refueling tankers) भी भेजे गए हैं, जो इस बात का संकेत है कि अमेरिकी विमान लंबे ऑपरेशन के लिए तैयार किए जा रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यह कदम क्षेत्र में हवाई और नौसैनिक शक्ति (air and naval power) बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।
ईरान के खामेनेई की धमकी
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई (Ayatollah Khamenei) ने 17 फरवरी 2026 को अमेरिका को चेतावनी दी थी। खामेनेई ने कहा, “अमेरिकी युद्धपोत खतरनाक है, लेकिन उससे ज्यादा खतरनाक वह हथियार है जो इसे समुद्र की तह में पहुँचा सकता है। अमेरिका ने 47 साल में ईरान के इस्लामी रिपब्लिक शासन को खत्म नहीं कर सका, और तुम भी इसे नहीं कर पाओगे।”
अमेरिकी मुसलसल कह रहे हैं कि हमने ईरान की तरफ युद्धपोत भेजा है। ठीक है, युद्धपोत ख़तरनाक है, लेकिन उससे ज़्यादा ख़तरनाक वह हथियार है जो इस युद्धपोत को समुद्र की तह में पहुंचा सकता है।
— आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनई (@In_khamenei) February 17, 2026
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तैनाती से मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव (military tension in Middle East) बढ़ सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है।
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