महाराष्ट्र सरकार ने 5 फीसदी मुस्लिम आरक्षण (Muslim Reservation) पर फुल स्टॉप लगा दिया है। अब राज्य में आरक्षण प्रमाणपत्र (Caste Certificate) और वैधता प्रमाणपत्र जारी नहीं होंगे और किसी नए प्रवेश की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।
फडणवीस सरकार ने 17 फरवरी 2026 को आदेश जारी करते हुए कहा कि 2014 में लागू की गई सामाजिक और शैक्षणिक रूप से कमजोर मुस्लिमों (Socially and Educationally Backward Muslims) के लिए आरक्षण व्यवस्था अब समाप्त हो गई है।

2014 का आदेश और इतिहास
जुलाई 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण (Prithviraj Chavan) की कांग्रेस-एनसीपी (Congress-NCP) सरकार ने मुस्लिमों को 5% और मराठा समुदाय को 16% आरक्षण देने का अध्यादेश (Ordinance) जारी किया था। इस आदेश से राज्य में कुल आरक्षण 73% तक पहुँच गया था।
हालांकि इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में चुनौती दी गई थी। 2014 में हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण पर रोक लगा दी, जबकि मुस्लिम आरक्षण को बरकरार रखा गया। 2019 में हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण वैध ठहराया, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में रद्द कर दिया।
फडणवीस सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि मुस्लिम आरक्षण केवल अध्यादेश के जरिए लागू किया गया था और यह कानून में तब्दील नहीं हुआ। अध्यादेश की अवधि खत्म होने के बाद संबंधित आदेश भी स्वतः समाप्त हो गए। इसलिए सरकार ने औपचारिक रूप से इसे रद्द कर दिया है।
अल्पसंख्यक विभाग में तबादला
सरकार ने अल्पसंख्यक विभाग (Minority Affairs Department) के उपसचिव मिलिंद शेनॉय (Milind Shenoy) का भी तबादला कर दिया है। यह कदम उन विवादों के बाद लिया गया, जिनमें अजित पवार (Ajit Pawar) के निधन के तुरंत बाद 75 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा देने की मंजूरी शामिल थी। फडणवीस सरकार ने इन मंजूरियों को रद्द कर जांच शुरू कर दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र में संवेदनशील है और इससे राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ हो सकती हैं।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel