गर्मियों के आगमन से पहले भारत ने रावी नदी (Ravi River) का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान (Pakistan) जाने से रोकने की तैयारी तेज कर दी है। जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राणा (Javed Ahmed Rana) ने बताया कि शाहपुर कांडी बांध (Shahpur Kandi Dam) का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और यह परियोजना जल्द ही चालू होगी।
मंत्री राणा ने कहा कि इस परियोजना से सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) के तहत पाकिस्तान को जाने वाला अतिरिक्त पानी रोका जाएगा और बांध का पानी कठुआ (Kathua) और सांबा (Samba) जिलों की ओर मोड़ा जाएगा। यह परियोजना लगभग पांच दशक पहले 1979 में कल्पित की गई थी और इसका शिलान्यास 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) द्वारा किया गया था।
शाहपुर कांडी बांध की विशेषताएँ
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लागत: ₹3,394.49 करोड़
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पंजाब सरकार द्वारा वित्तपोषण: ₹2,694.02 करोड़ (लगभग 80%)
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केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषण: ₹700.45 करोड़ (20%)
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ऊँचाई: 55.5 मीटर
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हाइडल नहर लंबाई: 7.7 किलोमीटर
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सिंचाई क्षेत्र: पंजाब में 5,000 हेक्टेयर और जम्मू-कश्मीर में 32,173 हेक्टेयर
सिंधु जल संधि और भारत की नीति में बदलाव
पूर्व सिंचाई मंत्री ताज मोहिद्दीन (Taj Mohideen) ने कहा कि रावी नदी पर भारत का पूरा अधिकार है और इस बांध के संचालन पर सिंधु जल संधि लागू नहीं होती। 23 अप्रैल 2025 को भारत ने पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों द्वारा पहलगाम हमले के बाद औपचारिक रूप से संधि को “स्थगित” कर दिया।
इस कदम के बाद भारत ने सिंधु नदी बेसिन (Indus River Basin) में कई जलविद्युत परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है, जैसे कि सावलकोट, रैटल, बुरसर, पकल दुल, क्वार, किरू, कीरथाई-I और कीरथाई-II।
विशेषज्ञों का मानना है कि शाहपुर कांडी बांध परियोजना भारत-पाकिस्तान जल प्रबंधन (India-Pakistan Water Management) में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगी और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई को सुनिश्चित करेगी।
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