टेक्नोलॉजी की दुनिया ने जितनी सुविधाएँ दी हैं, उतनी ही खतरनाक राहें भी खोली हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार ‘इंडिपेंडेंट एंटी-स्लेवरी कमिश्नर (IASC)’ ने खुलासा किया कि सोशल मीडिया और ‘पिम्पिंग वेबसाइट्स’ के माध्यम से महिलाओं और मासूम बच्चियों का यौन शोषण और मानव तस्करी हो रही है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
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12 प्रमुख पिम्पिंग वेबसाइट्स पर करीब 63,000 विज्ञापनों की जांच की गई।
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इनमें से 10 में से 6 विज्ञापनों में सीधे मानव तस्करी और यौन शोषण के संकेत मिले।
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केवल एक महीने में इन वेबसाइट्स पर 4 करोड़ से ज्यादा विज़िटर्स पहुंचे।
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पीड़ित मिया डे फाओइट ने इसे आधुनिक गुलामी का बाजार बताया, जहाँ ग्राहक उम्र और नस्ल के आधार पर महिलाओं को चुनते हैं।
पीड़िताओं की दर्दनाक दास्तान
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पहचान के लिए टैटू: कुछ महिलाओं ने अपनी पहचान सुरक्षित करने के लिए शरीर पर टैटू बनवाए।
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हिंसा और धमकियां: किसी ग्राहक से इंकार करने पर बलात्कार और जान से मारने की धमकियां।
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बिचौलियों का कब्जा: अपराधी महिलाओं के नाम पर ग्राहकों से बातचीत करते हैं और मुनाफा हड़प लेते हैं।
अंतरराष्ट्रीय और सरकारी कार्रवाई
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ब्रिटिश सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां अब सक्रिय हो रही हैं।
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संसद में नए कानून लाए जा रहे हैं, जिनसे अदालतों को पिम्पिंग वेबसाइट्स को तुरंत सस्पेंड करने का अधिकार मिलेगा।
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टेक कंपनियों को निर्देश, किसी भी आपत्तिजनक विज्ञापन या बिना सहमति की तस्वीरें 48 घंटे में हटाने होंगे।
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Age Verification अनिवार्य करने की मांग उठ रही है ताकि बच्चों और कमजोर महिलाओं को सुरक्षित रखा जा सके।
सावधानी ही बचाव है
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संगठित अपराधी अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशाना बनाते हैं।
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इंटरनेट पर दिखने वाली ‘एस्कॉर्ट सर्विस’ या ‘मसाज पार्लर’ जैसी सेवाओं के पीछे अक्सर बड़ा अपराध छिपा होता है।
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