असम में अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में ‘ऑपरेशन पुश-बैक’ के तहत सीमा पार से आए 8 घुसपैठियों को वापस भेज दिया गया है। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तस्वीर साझा करते हुए दी। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि सीमा पार के लोगों ने शायद भारत की ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना को जरूरत से ज्यादा गंभीरता से ले लिया, लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि सही समय पर बुद्धिमानी से कार्रवाई करना जरूरी होता है।
People across the border seemed to have taken our philosophy of अतिथि देवों भवः too seriously.
But they forgot that we also believe in
सुदुर्बलं नावजानाति कञ्चिद् युक्तो रिपुं सेवते बुद्धिपूर्वम्।
न विग्रहं रोचयते बलस्थैः काले च यो विक्रमते स धीरः॥
8 illegals thus PUSHED BACK. pic.twitter.com/3y3sankK8g
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) December 12, 2025
‘ऑपरेशन पुश-बैक’ भारत सरकार की एक नई रणनीति है, जिसे अप्रैल 2025 से लागू किया गया है। इसका उद्देश्य बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या मुस्लिमों की अवैध घुसपैठ को प्रभावी तरीके से रोकना है। इस नीति के तहत अब घुसपैठियों को पकड़ने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर थाने ले जाने, FIR दर्ज करने और वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया चलाने की जरूरत नहीं होगी। सुरक्षा बल पकड़े गए घुसपैठियों को बिना देरी के सीधे सीमा पार वापस भेज रहे हैं।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, पहले विदेशी घुसपैठियों को जेल भेजा जाता था और फिर अदालत में पेश किया जाता था। हर साल लगभग 1,000 से 1,500 विदेशी इस प्रक्रिया में पकड़े जाते थे। अब सरकार ने फैसला किया है कि ऐसे लोगों को देश के भीतर नहीं लाया जाएगा, बल्कि सीमा पर ही पकड़कर बांग्लादेश की ओर वापस भेज दिया जाएगा।
सीएम सरमा ने यह भी बताया कि हर साल करीब 5,000 लोग अवैध रूप से भारत में घुसने की कोशिश करते हैं। ‘पुश-बैक’ नीति लागू होने के बाद इस संख्या में बड़ी गिरावट आने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि सख्त और त्वरित कार्रवाई से घुसपैठ की कोशिशों पर प्रभावी रोक लगेगी।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम सरकार ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ अब तक के सबसे कठोर कदम उठाए हैं। राज्य कैबिनेट ने 1950 के कानून के तहत नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू किया है, जिससे प्रशासन को सीधे कार्रवाई की शक्ति मिली है।
नए नियमों के तहत संदिग्ध घुसपैठियों को अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए सिर्फ 10 दिन का समय दिया जाएगा। यदि तय अवधि में वे जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर पाते हैं, तो जिला प्रशासन 24 घंटे के भीतर डिपोर्टेशन या निष्कासन का आदेश जारी कर सकता है। इसके लिए अब विदेशी न्यायाधिकरणों की लंबी और जटिल प्रक्रिया जरूरी नहीं होगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीमा पार करते हुए पकड़े गए घुसपैठियों को 12 घंटे के भीतर ही वापस भेजा जा सकता है। साथ ही, सभी चिन्हित लोगों का बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय डेटा दर्ज कर कड़ी निगरानी की जाएगी। यह कदम इस बात का संकेत है कि असम सरकार राज्य की सांस्कृतिक पहचान और जनसांख्यिकीय संतुलन की रक्षा के लिए किसी भी हद तक सख्ती बरतने को तैयार है।
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