बिहार में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता वेरिफिकेशन अभियान के तहत अब तक 6.60 करोड़ मतदाताओं का गणना फॉर्म जमा हो चुका है, जो राज्य के कुल 7.90 करोड़ मतदाताओं का 88 प्रतिशत है। इस प्रक्रिया के तहत अब तक 35.50 लाख से अधिक ऐसे नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं जो या तो मृतक हैं, एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हैं या राज्य से स्थायी रूप से बाहर चले गए हैं। इनमें 12.5 लाख से अधिक मृत मतदाता शामिल हैं। इस अभियान के दौरान नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों के कुछ विदेशी नागरिकों के नाम भी मतदाता सूची में पाए गए, जिन्हें अब हटाया जा रहा है।
वोटर वेरिफिकेशन की यह कवायद राज्य के 261 शहरी निकायों के 5,683 वार्डों में चल रही है, जहाँ बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। 963 AERO अधिकारी इस प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। राज्य से अस्थायी रूप से बाहर रहने वाले मतदाता ECINet ऐप या वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।
Already over 6.6 crore out of the 7.89 crore electors in #Bihar included in the draft Electoral Roll
✅11 more days to go
✅Over 5.74 crore Forms uploaded on ECINet
Read in detail :https://t.co/5YphthkZsm#SIR pic.twitter.com/Aw7LUkN4Cc
— Election Commission of India (@ECISVEEP) July 14, 2025
हालाँकि, इस प्रक्रिया का विपक्षी दलों ने विरोध किया है और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग ने नागरिकों पर पहचान साबित करने की जिम्मेदारी डाल दी है, जिससे कई गरीब और प्रवासी मतदाता वोटिंग से वंचित हो सकते हैं। याचिकाकर्ताओं ने आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में शामिल न किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल एसआईआर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है लेकिन सुझाव दिया है कि आधार, ईपीआईसी और राशन कार्ड को भी पहचान दस्तावेजों के रूप में स्वीकार किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
इस बीच, सीमांचल के चार जिलों—कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज और अररिया—में 100 लोगों पर 120 से 126 आधार कार्ड पाए गए हैं, जिससे आधार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि किशनगंज में जनवरी से मई तक हर महीने औसतन 26-28 हजार निवास प्रमाण पत्र के आवेदन आ रहे थे, लेकिन जुलाई के पहले 6 दिनों में ही यह संख्या 1.28 लाख पार कर गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में घुसपैठियों की संख्या काफी अधिक है।