बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना में एनडीए गठबंधन ने अप्रत्याशित रूप से बड़ी और स्पष्ट बढ़त बना ली है, और रुझानों से संकेत मिल रहा है कि 243 सदस्यीय विधानसभा में उसका आंकड़ा 200 सीटों से ऊपर जा सकता है। इस बार चुनाव में भाजपा और जदयू पहली बार बराबर—101-101 सीटों—पर लड़ रहे थे, जिससे मुकाबला शुरू से ही दिलचस्प बना हुआ था। लेकिन परिणामों के रुझानों में जो सबसे बड़ी और चौंकाने वाली कहानी उभरकर सामने आई है, वह है लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) का शानदार प्रदर्शन।
चिराग पासवान के नेतृत्व वाली LJP(R), जिसे एनडीए ने सीट बंटवारे में 28 सीटें दी थीं—एक ऐसा निर्णय जिस पर सहयोगी दलों ने खुलकर सवाल उठाए थे—अब उन्हीं रुझानों में अपनी ताकत सिद्ध करती दिख रही है। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के अनुसार दोपहर 3:30 बजे तक LJP(R) 19 सीटों पर आगे चल रही थी। यह वही पार्टी है जिसने 2020 के विधानसभा चुनाव में केवल एक सीट जीती थी, लेकिन इस बार वह एनडीए के प्रमुख स्तंभों में एक के रूप में उभर रही है।
चिराग पासवान की व्यक्तिगत छवि और उनके संगठनात्मक रणनीति को भी इस अप्रत्याशित उछाल का बड़ा कारण बताया जा रहा है। अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “हनुमान” के रूप में वर्णित किए जाने वाले चिराग ने युवा मतदाताओं और पासवान समुदाय में मजबूत पकड़ बनाई है। इस चुनाव में उनका यह उभार एनडीए के लिए एक निर्णायक कारक बनता दिख रहा है।
साथ ही, भाजपा और जदयू के कार्यालयों में भी उत्साह और जश्न का माहौल है। शुरूआती दौर से ही एनडीए के पक्ष में हवा बनने लगी थी और दोपहर तक तस्वीर लगभग साफ हो गई कि राज्य में एनडीए की प्रचंड वापसी हो रही है। ऐसे में LJP(R) का प्रदर्शन न सिर्फ एनडीए की कुल सीटों को मजबूती दे रहा है बल्कि आने वाले दिनों में बिहार की सत्ता संरचना और गठबंधन की राजनीति में चिराग पासवान की भूमिका को भी अधिक प्रभावशाली बनाता दिख रहा है।
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