बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA की शानदार जीत के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरा से सांसद रह चुके आरके सिंह को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। यह निर्णय चुनावी नतीजों के कुछ ही घंटों के भीतर लिया गया, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरके सिंह को निष्कासित करने का मुख्य कारण उनका लंबे समय से पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों से दूर रहना और हालिया चुनाव के दौरान पार्टी लाइन के खिलाफ बयान देना बताया जा रहा है। चुनाव प्रचार के समय उन्होंने NDA द्वारा विवादित चेहरों—अनंत सिंह और विभा देवी—को टिकट दिए जाने का विरोध किया था। उनके इन बयानों को पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना गया।
बिहार भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' के आरोप में निलंबित कर दिया है। पार्टी ने उनसे एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। pic.twitter.com/VVbHslvxpA
— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 15, 2025
चुनाव के दौरान उन्होंने तारापुर से NDA उम्मीदवार सम्राट चौधरी को वोट न देने की अपील भी की थी। इसके अलावा शाहाबाद क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ भाजपा नेताओं की रैलियों से उनकी अनुपस्थिति ने भी शीर्ष नेतृत्व का ध्यान खींचा था। चुनाव प्रक्रिया के दौरान पार्टी ने चुप्पी साधे रखी, लेकिन परिणाम घोषित होते ही उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
यह पहला अवसर नहीं है जब आरके सिंह पार्टी नेतृत्व से टकराव में आए हों। फरवरी 2025 में भी उन्होंने भाजपा के कुछ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि पार्टी के कुछ नेताओं ने भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह को पैसे देकर काराकाट लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़वाया, जिससे NDA प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा को नुकसान हुआ। इतना ही नहीं, उन्होंने आरा में अपनी हार के लिए भी पार्टी के अंदरूनी नेताओं की साजिश को जिम्मेदार ठहराया था।
आरके सिंह का निष्कासन न केवल बिहार भाजपा की आंतरिक कलह को उजागर करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि NDA की जीत के बाद पार्टी नेतृत्व अनुशासनहीनता और असहमति पर तुरंत और सख्त कार्रवाई के मूड में है।
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