प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया 5 देशों की विदेश यात्रा भारत के लिए रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई है। इस यात्रा के दौरान UAE, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के साथ कई बड़े समझौते हुए, जिनका असर आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्थिति पर दिखाई देगा।
UAE: ऊर्जा और व्यापार में बड़ी साझेदारी
UAE के साथ भारत ने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर $200 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। साथ ही कच्चे तेल और LNG की दीर्घकालिक सप्लाई सुनिश्चित करने और भारत के रणनीतिक तेल भंडार को मजबूत करने पर सहमति बनी।
नीदरलैंड्स: सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी सहयोग
नीदरलैंड्स के साथ सेमीकंडक्टर निर्माण, हाई-टेक सहयोग और यूरोपीय निवेश को भारत में बढ़ाने के लिए साझेदारी को मजबूती दी गई।
स्वीडन: AI और इनोवेशन पर फोकस
स्वीडन के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया, जिससे रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
नॉर्वे: निवेश और रोजगार के अवसर
भारत-EFTA व्यापार समझौते के तहत $100 बिलियन निवेश और 15 वर्षों में लगभग 10 लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही खाद्य, ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर भी सहयोग बढ़ेगा।
इटली: व्यापार और रणनीतिक समझौते
इटली के साथ 2029 तक €20 बिलियन व्यापार का लक्ष्य तय किया गया है। समुद्री परिवहन, कृषि, महत्वपूर्ण खनिज और रणनीतिक क्षेत्रों में कई समझौते हुए।
चर्चा बनाम उपलब्धियां
जहां एक ओर इस यात्रा के दौरान बड़े आर्थिक और रणनीतिक समझौते हुए, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक विमर्श का फोकस कुछ अलग मुद्दों पर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि अक्सर महत्वपूर्ण उपलब्धियां चर्चा से बाहर रह जाती हैं, जबकि गैर-जरूरी मुद्दे सुर्खियां बन जाते हैं।
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